यह गीत पढ़कर सच में आपके दिल छू जाएगा इसे पढ़ते हुए माँ के प्रति प्रेम श्रद्धा आस्था और व्यथित मन की गहराई महसूस होती रहेगी यह गीत माँ के प्रति गहन प्रेम श्रद्धा और विश्वास की अभिव्यक्ति है। जीवन की कठिनाइयों गरीबी और मानसिक संघर्ष के बावजूद माँ की कृपा और माँ के साथ ने मेरे हृदय में ख़ुशी शांति और आत्मविश्वास लौटाया माँ ने जीवन की उलझनों और माँ की कृपा से मिलने वाली आशा का प्रतीक मुझे माँ में नजर आया है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा, Ye Kaisa Chhaya Hai Vidmbana Jo Thirkne Laga, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा
#Ye Kaisa Chhaya Hai Vidmbana Jo Thirkne Laga
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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की मेरा दिल मुझे देखकर अब माँ हँसने लगा
ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा
अजबे आहत करता वेध देता मन को
उठता है अन्तर से नाप लेता दिल को
मुझमें वो शक्ति ना माँ उसको समझने का
आया हूँ मैं तेरे हूँ मैं तेरे पास बसने का
की मेरा दिल मुझे देखकर अब माँ हँसने लगा
ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा
बहुत बार देखा मैंने अपनी क्षमता को
आंक नहीं पाया मैं दिल की हवा को
रोक दिया मौन मेरा बोलने ना देता
टूट कर बोलता है जब ये बिखरने ना देता
मना करता मुझको बार बार कुछ मत बोलो
देखने दो आँखों को तुम कानों से सुनो
की मेरा दिल मुझे देखकर अब माँ हँसने लगा
ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा
खुशियों के फूल पे जो छाया धूल का मंजर
बनाया गरीब हमको प्रेम का समन्दर
हो कर कंगाल मैं माँ तेरे पास आया हूँ
दरिद्र ने घेरा मुझको तुझको बताया हूँ
जो कुछ हूँ आज मैं माँ वो सब तेरी कृपा है
तूने बचाया माँ मुझे तेरी ही दया है
की मेरा दिल मुझे देखकर अब माँ हँसने लगा
ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा
मेरा निवेदन तुझसे बात मेरी सुनो माँ
डूबकर गरीबी देखो सच को तुम ढूंढों माँ
सुध बुध खोया जब मैं खो गया हूँ तुझमें
जीने की आधार तुम हो मर गया हूँ कब में
मेरे गरीबी को माँ तूने ही ढक्का
मुझे अपना कर माँ तू आँचल में रखा
की मेरा दिल मुझे देखकर अब माँ हँसने लगा
ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा
परम्परा की होड़ो ने मुझे पागल बनाया था
रो रो बिलखता था जब कोई ना बचाया था
सूर्य के किरणों के जैसा आई जब जीवन में
छा गई तू दिल में माँ जीवन के सफर में
तुझसे जुड़ा जब माँ मैं खुशियां लौट आई
भाग गया दुःख मेरा जो मुझको सताई
की मेरा दिल मुझे देखकर अब माँ हँसने लगा
ये कैसा छाया है विडम्बना जो थिरकने लगा
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#Ye Kaisa Chhaya Hai Vidmbana Jo Thirkne Laga
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