सौरभ भर प्राण रोवै भींगे वन सारा, Sourabh Bhar Pran Rovai Bhinge Van Sara, Writer ✍️ #Halendra Prasad, भक्ति शक्ति आराधना भजन कीर्तन गीत,
गीत =} #सौरभ भर प्राण रोवै भींगे वन सारा
#Sourabh Bhar Pran Rovai Bhinge Van Sara
Writer ✍️ #Halendra Prasad #CISF
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रही रही गिरती जल धारा हई आषाढ़ के भोला
रिमझिम बरसेला सावनवा हई अविरल के फुहार में भोला
दिनवा निकल जाता बैठे घर के कोना में
रचता स्वप्न कैसा मनवा दिल के सलोना में
सजल वायु जूही वन में हस के बुलाती
खुशबू महकाके जग में शिव पे चढ़ जाती है
उठाती है तरंगे मन में मिलती ना किनारा
सौरभ भर प्राण रोवै भींगे वन सारा
रही रही गिरती जल धारा हई आषाढ़ के भोला
रिमझिम बरसेला सावनवा हई अविरल के फुहार में भोला
रात है अंधेरी भोला पहर है सलोना
कैसी स्वर गूंजे मन में भींगे बदन सारा
किस उलझन में खोया किसे मैं बताऊं
मन घबराए जब जब भोला को जगाऊं
बरसे सावन रिमझिम बारिश वनमे दिल को बुलाता
झूम कर बरसता जब कोयल गीत गाता
मिटी मीठी बोली सुनी के मन जगमगाए
बादल के बयार बहे गंगा जल ढोवाये
रही रही गिरती जल धारा हई आषाढ़ के भोला
रिमझिम बरसेला सावनवा हई अविरल के फुहार में भोला
करू मैं उपासना तेरी ध्यान में मैं डूब कर
निष्फल ना करना प्रभु आया द्वार बिखर कर
करदो निर्माण मन का सिद्धि को जगा दो
पूजूंगा चरण को तेरी यही ज्ञान पेठा दो
करो कल्याण प्रभु हरो तुम विपत्ति
दुख में जो तड़पे मानव देदो ध्यान सारी
हे सुख दाता भोला हे महाकालेश्वर
तूही ज्योतिर ज्वाला भगवन तूही है महेश्वर
रही रही गिरती जल धारा हई आषाढ़ के भोला
रिमझिम बरसेला सावनवा हई अविरल के फुहार में भोला
गीत =} #सौरभ भर प्राण रोवै भींगे वन सारा
#Sourabh Bhar Pran Rovai Bhinge Van Sara
Writer ✍️ #Halendra Prasad #CISF
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