यह गीत सिखाता है कि भक्ति का असली स्वरूप दिखावे में नहीं, बल्कि शांत, निर्मल और सच्चे हृदय में होता है क्योंकि यह भक्ति गीत सच्चे और शांत भाव से माँ की उपासना का संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि देवी को दिखावा, शोर-शराबा या बाहरी आडंबर पसंद नहीं बल्कि सच्चे मन प्रेम और शांति से की गई भक्ति ही उन्हें प्रिय है कवि अपने जीवन को माँ की इच्छा के अनुसार ढालते हुए नफरत छोड़कर प्रेम सरलता और समर्पण का मार्ग अपनाने की बात करता है। वह माँ को सर्वशक्ति मानकर दिल से याद करता है और मानता है कि सच्ची भक्ति भीतर से होती है जहाँ भक्त और माँ का संबंध गहरे प्रेम और विश्वास पर टिका होता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मईया रे करता ना दिखावा मैं भक्ति का मईया, #Miya Re Karata Naa Dikhawa Mai Bhkti Kaa Maiya, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Miya Re Karata Naa Dikhawa Mai Bhkti Kaa Maiya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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शोर शरबा ऊंची आवाज में मैं ना कुछ अब कहता मईया
मईया रे करता ना दिखावा मैं भक्ति का मईया
तेरी इच्छा को मै माता जीवन में उतरा हूँ
आग लगाया नफरत मैं शोहरत को सजाया हूँ
सच्चे मन से भक्ति करता सुख शान्ति से रहता हूँ
रूप सजाकर दिल में मईया तुमसे प्रेम मैं करता हूँ
बल बुद्धि तू विद्या देदे देदे मुझपे ध्यान अपनी
मैं तेरा बेटा हूँ मईया देदे मुझको ज्ञान तनी
शोर शरबा ऊंची आवाज में मैं ना कुछ अब कहता मईया
मईया रे करता ना दिखावा मैं भक्ति का मईया
मन की भाषा व्यक्त करे माँ दिल में मेरे आकर
धीरे धीरे प्रेम करता माँ दिल मेरा सहलाकर
मन की बातों को मैं माता धीरे धीरे कहता हूँ
आँख कि जलधारा से माँ चरणों को तेरी धोता हूँ
शान्त भाव है हृदय हमारा शान्ति में अब रहता
आँखो में आकर के मईया चरणों में गिर जाता
भक्ति का सब रूप जानता शान्ति से सब कहता
दिल सच्चा है दिल की बातें तेरे पास पेठाता
शोर शरबा ऊंची आवाज में मैं ना कुछ अब कहता मईया
मईया रे करता ना दिखावा मैं भक्ति का मईया
मैं जानू सब जोग हे माता तुमको क्या भाता है
पसंन्द ना करती शोर दिखावा हमको ना आता है
शांति सरल की देवी तू माँ तूही वेद माता है
धरती अम्बर और समन्दर तूही सागर है
तुझको भाता है माता सच्चे मन की भक्ति
प्रिय प्रेम की शक्ति है माँ मुझको भाता सच्ची
मैं ना उग्र होता हूँ माता भोला भाल सिपाही
मन भावना को व्यक्त करता हूँ तेरे पास दिखाई
शोर शरबा ऊंची आवाज में मैं ना कुछ अब कहता मईया
मईया रे करता ना दिखावा मैं भक्ति का मईया
तेरी पूजा दिल से करता दिल में तुझे बसाता हूँ
शोर शरबा करता ना माँ दिल से तुझे बुलाता हूँ
मन की चाहत को मैने मन में मार दिया है
तुझको मैं अपना कर तेरा ध्यान किया है
शुद्ध भाव की ज्ञान की देवी तूही काली दुर्गा है
ताराचण्डी माँ मुंडेश्वरी तूही वैष्णो देवी है
तू जाने असली भक्ति को जो शांति से होती
निर्मल मन से प्रेम करती माँ तू शांति की देवी
शोर शरबा ऊंची आवाज में मैं ना कुछ अब कहता मईया
मईया रे करता ना दिखावा मैं भक्ति का मईया
गीत=} #मईया रे करता ना दिखावा मैं भक्ति का मईया
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