ईश्वर की अदृश्य शक्ति ही सृष्टि के निर्माण, संचालन और निरंतर विकास का आधार है यह गीत भगवान की उस अदृश्य शक्ति का वर्णन करता है जो पूरी सृष्टि में हर समय कार्य करती रहती है। प्रकृति के हर छोटे-बड़े परिवर्तन जैसे बीज से पौधा कली से फूल और फल बनना इसी दिव्य शक्ति का प्रमाण हैं।यह सृष्टि कभी रुकती नहीं बल्कि निरंतर सृजन और विकास की ओर बढ़ती रहती है। मनुष्य भले ही विश्राम करता है लेकिन भगवान की शक्ति हर पल सक्रिय रहती है और संसार को चलाती रहती है।अंत में कवि भगवान से प्रार्थना करता है कि वे सभी को शक्ति बुद्धि और अपने प्रेम का अनुभव कराएं। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, सृजन करती है विकास की हर कार्य में काम करती भगवन, #Srijan Karti Hai Vikas Ki Har Karya Mein Kaam Karti Bhagwan, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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तेरी छीपी हुई है शक्ति इस प्रकृति की हर जीव में भगवन
सृजन करती है विकास की हर कार्य में काम करती भगवन
अदृश्य शक्ति की महिमा हर वस्तु में मिलती है
फूल फलों की डाली से वो मधुर गीत में खिलती है
बीज के अन्दर छिप जाती है अंकुर बनकर बाहर आती
बढ़कर कली बनती है जब वो फूलों सा मुस्काती
बन जाता वो मीठा फल फूलों से आगे बढ़कर
देता है वो फल मीठा दुनियां में सज धज कर
तेरी छीपी हुई है शक्ति इस प्रकृति की हर जीव में भगवन
सृजन करती है विकास की हर कार्य में काम करती भगवन
दुनियां में जो होता उद्भव वो आगे बढ़ते जाता
वृद्धि सृजन को सिंचकर विकास बढ़ाते चलता
दिव्य शक्ति का काम है दिव्य परिष्कार विकास बढ़ाना
जीवों को सुजीत करना सृजन करते जाना
देख ना पाता सीधे कोई तेरी शक्ति को आंखो से
परिवर्तन का उद्भव दिखता सामने में आ जाने से
शक्ति तेरी अद्भुत है अद्भुत है तेरी सृजन
भर दे सब में बल बुद्धि तूही है सृष्टि तनमन
तेरी छीपी हुई है शक्ति इस प्रकृति की हर जीव में भगवन
सृजन करती है विकास की हर कार्य में काम करती भगवन
रुकती ना ये सृष्टि भगवन रुकता ना कोई काम
चलती है ये हरदम करती ना विश्राम
अपने नियमों से चलती रहती देती है संकेत हमे
रोज सुबह नए नए आश्चर्य सुंदरता लाती है
करते करते कामों को जब थक कर सो जाता हूँ
लगता है मुझे रुक गया सब काम जब मैं उठता हूँ
ऐसी आभा होती है मुझे निद्रा में भी आती
थके बदन को झोरकर वो चुप चाप चल जाती
तेरी छीपी हुई है शक्ति इस प्रकृति की हर जीव में भगवन
सृजन करती है विकास की हर कार्य में काम करती भगवन
जब निद्रा से जागा मै तो भागा बाड़ी की ओर
फूल खिले थे मुस्का कर देखे मेरी ओर
अद्भुत है परिवर्तन तेरी रातों दिन करता तू काम
आश्चर्य होता है मुझको जब देखूं फूलों का मुस्कान
सो जाता जब थक कर मैं उठ ना पाता हूँ
करता है तू काम हमेशा क्यों ना थकता है
थकता है ना रुकता है तू शक्ति तेरी अपरम्पार है
हे भगवन तू दिख जा मुझको कैसा तेरा प्यार है
तेरी छीपी हुई है शक्ति इस प्रकृति की हर जीव में भगवन
सृजन करती है विकास की हर कार्य में काम करती भगवन
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