मन के भ्रमों और अतीत की चिंताओं में फँसने के बजाय वर्तमान को प्रेम और सहजता से जीना ही जीवन की सच्ची राह है क्योंकि इस गीत में कवि ने मनुष्य के चंचल मन जीवन की उलझनों और समय के महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया है। कवि जीवनभर अच्छा और बुरा समझने की कोशिश करता है लेकिन अंत में उसे एहसास होता है कि अधिकांश उलझनें मन की कल्पनाएँ हैं मनुष्य सही-गलत के विचारों में उलझकर वर्तमान का आनंद खो देता है और जीवन का बहुमूल्य समय व्यर्थ कर देता है। बचपन की यादें पुराने मित्र और बीते दिन बार-बार मन को विचलित करते हैं। मन कभी हँसता है कभी रोता है और लगातार बदलता रहता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल वचन,मिलता पथ को प्रमाण ना सब मन का खेला , #Meelta Path Ko Praman Naa Sab Man Kaa Khela, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
# Meelta Path Ko Praman Naa Sab Man Kaa Khela
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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बहुत दिन से मैं सोचूं क्या है अच्छा और बुरा
मिलता पथ को प्रमाण ना सब मन का खेला
सही गलत में उलझा उलझनों की डाल में
मिल नहीं पाया रास्ता प्रेम के खुमार में
जिन्दगी का सारा वक्त समझने में लगाया
समझ नहीं पाया मैं केवल समय को गंवाया
बहुत छोटी बातों को गहराइयों में खोजा
मिला नहीं हल मुझको बातों में मैं डूबा
बहुत दिन से मैं सोचूं क्या है अच्छा और बुरा
मिलता पथ को प्रमाण ना सब मन का खेला
होता है एहसास अब जब समय को गंवाया
पुराने बेकार दिन थे याद मन में आया
जो चला गया वो वापस फिर से आता है
मन को भरमाकर वो मन को दौड़ता है
जीवन हिस्सा था वो जो साथ में रहता था
दोस्त था वो बचपन का जो साथ में रहता था
बीत गया दिन वो याद क्यों आता है
मन में समाकर वो मन को घबराता क्यों है
बहुत दिन से मैं सोचूं क्या है अच्छा और बुरा
मिलता पथ को प्रमाण ना सब मन का खेला
मन को क्या कहूं मैं मन हैं चँचल
पल पल बदलता है पल में आता है अपने घर
अक्सर उलझ जाता सही और गलत में
भूल जाता जीना ये विद्यमान को सफर में
ख्यालों की भाव जब चिन्तन में दल
इरादा बदलकर मन को भरमाया
मन की स्थिति अब मन से जो पूछे
मन भी घबराता है दिल से ना सीखे
बहुत दिन से मैं सोचूं क्या है अच्छा और बुरा
मिलता पथ को प्रमाण ना सब मन का खेला
जब मैने देखा मन को मन में समाकर
करता है प्रभावित इसको यादों में झूला कर
जीता ना सूझबूझ से जीता ना बुद्धिमता से
भाग जाता बीते कल में अपनी इच्छा से
कभी रोता कभी हंसता कभी मुस्कुराता है
यादों को सजाकर दिल में दिल को अकुलाता है
जीवन का समय वो व्यर्थ में बिता
सही गलत सोचने में जीवन रोया
बहुत दिन से मैं सोचूं क्या है अच्छा और बुरा
मिलता पथ को प्रमाण ना सब मन का खेला
गीत=} #मिलता पथ को प्रमाण ना सब मन का खेला
# Meelta Path Ko Praman Naa Sab Man Kaa Khela
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