यह भक्ति गीत एक ऐसे भक्त की भावना को व्यक्त करता है जो भगवान की खोज में भटकते-भटकते अंततः उनके द्वार तक पहुँचता है। वह उनके दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल है और पूरे हृदय से प्रार्थना करता है भक्त को प्रकृति आकाश संध्या रंगों और प्रकाश में भगवान की झलक दिखाई देने लगती है। धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि भगवान हर जगह विद्यमान हैं और उनकी कृपा असीम है भक्त पूर्ण श्रद्धा प्रेम और समर्पण के साथ भगवान से केवल एक ही इच्छा रखता है उनके दिव्य स्वरूप का दर्शन और उनसे मिलन क्यूंकि भक्ति समर्पण ईश्वर की खोज और अंततः उनके साक्षात्कार की तीव्र इच्छा।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन , #Khada Hun Samne Tere Tere Drshan Ko Bekarar Bhagwan, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन
#Khada Hun Samne Tere Tere Drshan Ko Bekarar Bhagwan
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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खोजत खोजत मैं पहुँचा तेरे द्वार के पास भगवन
खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन
तुझको निहारूं मैं यादों में बसाकर
आज मेरे पास भगवन हृदय से लगाकर
हे मेरे परम सत्ता दिन दुनियां का तू अस्तित्व है
असीम है कृपा तेरी अन्नत तेरा रूप है
चारों ओर ढूंढता था मैं जंगल पहाड़ बीच
ढूंढ लिया तुझको मैं संध्या के शाम बीच
खोजत खोजत मैं पहुँचा तेरे द्वार के पास भगवन
खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन
साम को आकाश में मैं देखता तुझे हूँ
सुख सुनहरा रंग निरेखता तुझे हूँ
उज्ज्वल भविष्य है मेरा पास तेरे आया
सोने के रंग में पाकर हृदय को दिखाया
रंग दिया मुझको प्रभु रंग तेरा राग में
हृदय को गुलज़ार किया रंगों के साज में
दर्शन की प्रतिक्षा मेरी तुझको बुलाती
यादों में समाकर केवल तुम्हीं याद आती
खोजत खोजत मैं पहुँचा तेरे द्वार के पास भगवन
खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन
तेरे भवन का रूप कितना सुन्दर है
फैला है चारों ओर तुम्हीं तुम्हीं है
बहते समय से मैने तुझको पुकारा
दिल में बसाकर चाहत तुझको पेठाया
पास तेरे आया हूँ मैं अर्जी लगाया हूँ
दिल की चाहत को मैने आश में लगाया हूँ
तेरे समीप खड़ा हूँ पास मेरे आजा
देदो अपना दर्शन भगवन स्वरूप को दिखा जा
खोजत खोजत मैं पहुँचा तेरे द्वार के पास भगवन
खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन
सुनहरी छटा से भरा है आसमा ये तेरी
जैसे राजा स्वर्ण से मढ़ा मुकुट की दहेड़ी
दिव्य है स्वरूप तेरा जगमग जगमग करता
चमके आश्मा में जैसे सूरज है चमकता
सुंदरता का वैभव भगवन चारों ओर फैलाया
अपने गरिमा को अब आसमा में सजाया
श्रद्धा की आशा में मै तेरे पास आया
परम सत का दर्शन करु प्रार्थना पेठाया
खोजत खोजत मैं पहुँचा तेरे द्वार के पास भगवन
खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन
गीत=} #खड़ा हूँ सामने तेरे तेरे दर्शन को बेकरार भगवन
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