ये जीवन प्रेम और सृजन का उत्सव है इसे आने देना चाहिए रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि जीवन का मूल उद्देश्य प्रेम और सृजन है खुशियाँ और आनंद स्वाभाविक रूप से आते हैं इन्हें किसी नियम या समय में बांधना आवश्यक नहीं जीवन की सादगी और सहजता अपनाने से मन में स्वतंत्रता और आनंद आता है क्योंकि प्रकृति फूल भँवरे बाग़-बगीचा हमें सिखाते हैं कि सृजन और सुंदरता अपने समय पर प्रकट होती हैं।हमें जीवन में हर पल का आनंद लेने और प्रेम के साथ जीने देना चाहिए । वास्तव में जीवन के सहज और प्राकृतिक आनंद प्रेम और सृजन की भावना का सुंदर चित्रण है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, जीवन प्रेम का सृजन है इसे आने दो गुरुवर, #Jivan Prem Kaa Srijan Hai Ise Aane Do Guru, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Jivan Prem Kaa Srijan Hai Ise Aane Do Guru
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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आने दो खुशियों की बाहार अब इसे बांधो ना गुरुवर
जीवन प्रेम का सृजन है इसे आने दो गुरुवर
समय सही ना फिर भी इसको आने दो
सुन्दर सुन्दर बेमौका को अपनी राग सुनने दो
जीवन के हर कार्य को गुरुवर बाधना कोई जरूरी ना
वक्ताओं के अन्तराल में इसको रखना कोई जरूरी ना
कभी कभी खुशियों को लाता बेमौका कि दिनों
सुन्दर सुन्दर सृजन करता आंनदो की नियमों
आने दो खुशियों की बाहार अब इसे बांधो ना गुरुवर
जीवन प्रेम का सृजन है इसे आने दो गुरुवर
जीवन की सहजता को अब हमको भी अपनाने दो
सादगी से आजादी को मुझे दिल में अब बसाने दो
कुदरत के माध्यम से जीवन गहरा जो सन्देश देता
स्वीकार करूं मैं उस जीवन को जो गहरा उपदेश देता
कहता है ये दिल मेरा इस सृष्टी को देख कर
फूल खिलने का समय नहीं खिलने दो उस रूप को
बाग बगीचा हरा भरा है सृष्टि के सिंगर में
खिली हुई है धरती सारी प्रेम की परिवार में
आने दो खुशियों की बाहार अब इसे बांधो ना गुरुवर
जीवन प्रेम का सृजन है इसे आने दो गुरुवर
फूलों से हम सीखेंगे आशा की धरती सीचेंगे
प्रेम विचार को मनन करेंगे ख्यालों में हम सोचेंगे
देखा मैं भंवरों को बेमौका मधु गुंजन करे
दोपहर के समय में आकर आमो पे वो भजन करे
सुबह शाम आता है भंवरा कलियों को फुसलाता है
अपनी गीत सुनकर भंवरा फूलों को बहलाता है
सृष्टि के नियमों में देखा हटकर कुछ आनन्द खुशी
सौंदर्य सुन्दरता उत्पन्न करती बेमौका कि प्रेम खुशी
आने दो खुशियों की बाहार अब इसे बांधो ना गुरुवर
जीवन प्रेम का सृजन है इसे आने दो गुरुवर
तय समय नियमों को बाधना कोई जरूरी ना
कभी कभी बेवक्त आता है भागना कोई जरूरी ना
पत्थर पानी आते है खुशियों की सरगम गाते है
कही हंसाते कही रुलाते अपनी राग सुनाते है
बेवक्त समय जब सृजन करता सुंदरता को लाता
धीमी मधुर का गीत गुनगुनाता अपना रूप दिखाता
जीवन हर चीजों को कठोर नियम ना बांधे
समय सारणी बांध सके ना ना कोई उसे डांटे
आने दो खुशियों की बाहार अब इसे बांधो ना गुरुवर
जीवन प्रेम का सृजन है इसे आने दो गुरुवर
गीत=} #जीवन प्रेम का सृजन है इसे आने दो गुरुवर
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