यह गीत सिखाता है कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे सुंदर माध्यम कला और संगीत है और जीवन की सच्ची शांति बाहरी दुनिया में नहीं बल्कि हमारे अंदर और ईश्वर में होती है। क्योंकि यह गीत कवि की गहरी भावनाओं और अंतर्मन की पीड़ा को व्यक्त करता है। कवि कहता है कि वह अपने दिल की बातों को सीधे शब्दों में नहीं कह पाता इसलिए उन्हें गीत और संगीत के माध्यम से प्रकट करता है। उसके भीतर बहुत दर्द संवेदनाएँ और अकेलापन है जिसे वह छुपाकर जीता है।गीत में दुनिया की सच्चाई भी दिखाई गई है जहाँ हर व्यक्ति धन दौलत और इच्छाओं के पीछे भाग रहा है लेकिन अंदर से सभी कहीं न कहीं दुखी हैं। इस भाग-दौड़ भरी दुनिया में सच्ची शांति मिलना कठिन है। यह एहसास होता है कि उसे सच्चा सहारा अपने भीतर और ईश्वर में मिलता है। जब भी वह ईश्वर को याद करता है, उसे शांति और संबल प्राप्त होता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, धीमी धीमी सी कोमल की आवाज में कहूं, #Dhimi Dhimi Si Komal Ki Aavaj Men Kahu,Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Dhimi Dhimi Si Komal Ki Aavaj Men Kahu
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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जो कह पाऊं ना मैं बातें वो मैं गीत में कहूं
धीमी धीमी सी कोमल की आवाज में कहूं
मन की गहरी बातों को मैं कैसे कह पाऊंगा
सीधे साधे शब्दों में ना उसको मैं देख पाऊंगा
गहरी भावना गहरी वेदना गहरी है मेरी दुनिया
कह ना पाता उन बातों को गहरी है मेरी रोदाना
आँखो से आती है जब जब मुझको रोना पड़ता है
छुप छुपकर रोता हूँ मैं छुप छुप रहना पड़ता है
जो कह पाऊं ना मैं बातें वो मैं गीत में कहूं
धीमी धीमी सी कोमल की आवाज में कहूं
मधुरी मधुरी ध्वनियों से मेरी दिल की बातें आती है
गीत और संगीत में मिलकर अपनी राग सुनाती है
सहज रूप से बोल जाती है मन की बातें खोलकर
ममता की दरिया में डूबती दिल की धड़कन तोड़कर
भाग दौड़ का जीवन कैसा कैसा है ये दुनियां
एक दूसरे को खींच रहे है तंज कसे हरमुनिया
इस दुनियां में कितने को मैं रोते रोज देखा है
बिन आँसू के आँखो में अब जलता आग देखा है
जो कह पाऊं ना मैं बातें वो मैं गीत में कहूं
धीमी धीमी सी कोमल की आवाज में कहूं
दुनियां का मैं रंग देखा है रंग बिरंगी चाहत को
सत्ता शासन सबको चाहिए़ निर्धन और विरासत को
कोई नहीं है खाली यहां कोई नहीं है खोखला
कोई नहीं है कोरा निर्जन कोई नहीं है रोकड़ा
व्यस्त है सारी दुनियां जग में अपनी अपनी कामों में
धन दौलत की चाहत लेकर आँख गड़ाया आहट में
चलता फिरता जोगी बोला कैसा है ये दुनियां
मिट्टी के तन मन को सींचता सोने से भी बढ़िया
जो कह पाऊं ना मैं बातें वो मैं गीत में कहूं
धीमी धीमी सी कोमल की आवाज में कहूं
भीतर की भावना को जब मैं देखा अपनी आँखों से
मीठी मीठी शांति लेकर आई थी वो रातों के
हंसता था मेरा मुखड़ा देखकर दुनियां की सब बातें
काली काली रातों में जब देखता था मैं रातें
मुझको ऐसी दिखती थी जैसे कोई पास मेरे
लगता था भगवन है मेरा मेरे साथ याद मेरे
जब जब उसको याद किया मैं मेरे पास आया
दिल धड़कन में मिलकर वो तो मेरा साथ दिया
जो कह पाऊं ना मैं बातें वो मैं गीत में कहूं
धीमी धीमी सी कोमल की आवाज में कहूं
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