जीवन की वास्तविक यात्रा बाहरी नहीं बल्कि आत्मा की भीतर की यात्रा है जहाँ गुरु का ज्ञान अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है यह गीत एक साधक के मन की आंतरिक यात्रा को दर्शाता है। कवि जीवन के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे दिशा स्पष्ट नहीं दिखती लेकिन भीतर कोई अदृश्य दिव्य शक्ति जागृत हो रही है। आत्मा बार-बार सत्य परमात्मा और आत्मज्ञान की ओर बुलाती है जबकि मन और बुद्धि तर्क-वितर्क में उलझे रहते हैं। गीत में आत्मा और परमात्मा के आकर्षण को नदी और सागर के संबंध से समझाया गया है। कवि स्वीकार करता है कि वह भ्रम अज्ञान और संदेह में घिरा है इसलिए गुरु से आशीर्वाद और सही मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर, #Bheetar Hoti Hai Halchal Koi Shakti Hai Apaar Guruvar, Writer ✍️ #Halendra Prasad
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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मुझको समझ नहीं आता मैं किस मोड़ पे खड़ा हूँ गुरुवर
भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर
मालूम होता धीरे धीरे समझ नहीं आता
संवेदना की बोध में हमदर्दी ज्ञान आता
बना है रहस्य उसका लक्ष्य मकसद पाने को
इरादा है मन का गुरुवर भूत को भुलाने को।
भीतरी पुकार मेरी मुझको समझाती
कभी कभी लोहे को भी सोना बताती
मुझको समझ नहीं आता मैं किस मोड़ पे खड़ा हूँ गुरुवर
भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर
आत्मा पुकारे गुरुवर उस भगवन को
सत्य की पुकार में खड़ा रहता है हरदम
इसके पास गहरी शक्ति भीतर में पड़ी है
उठने को ऊपर हरदम मन को बुलाती है
तर्क वितर्क करता कैसे समझाऊं
बुद्धि से प्रधान मन है कैसे बत्तियांउ
समझता तुरन्त ना बहुत देर करता
जॉच पड़ताल करता तुंरत ना समझता
मुझको समझ नहीं आता मैं किस मोड़ पे खड़ा हूँ गुरुवर
भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर
आता ना समझ में मुझको खींचकर ले जाता है
आत्मा का आकर्षण मुझको बार बार बुलाता है
कैसी ये इच्छा है कैसा इसका रूप है
अदृश्य है आकर्षण इसकी जादू जैसी खींच है
जैसे जैसे नदियां सारी सागर की ओर जाती है
वैसे खींचती मुझको आत्मा परमात्मा की ओर ले जाती है
नियति का नीयत कैसा किस किस ओर ले जाती
ले जाती है सत्य ओर भरम को हटाती
मुझको समझ नहीं आता मैं किस मोड़ पे खड़ा हूँ गुरुवर
भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर
मुझको लगता है भ्रम अज्ञान में मै डूबा हूँ
व्यर्थ के खिंचाव को मै वास्तव में देखा हूँ
अभी उसका मकसद मुझको समझान नहीं आता
स्पष्ट में दिखता ना मुझको आंखों का विधाता
मेरे जीवन का रास्ता कहा जा रहा है
खड़ा हूँ किस मोड़ पर मैं हृदय गा रहा है
बुद्धि के साथ दिल मेरा उलझ कर अब रहता
पूछता हूँ कारण मैं तो तर्क करते रहता
मुझको समझ नहीं आता मैं किस मोड़ पे खड़ा हूँ गुरुवर
भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर
अनुभव की चाहत में मैं सन्देह में घिरा हूँ
होता विश्वास ना अब किस ओर घुमा हूँ
जीवन की हर पहलू समझ में ना आता
अनुभव को जीता जब मैं सबूत को दिखाता
अर्थ पूर्ण यात्रा को व्यर्थ में समझता मैं
जीवन की शुरुआत को फिजूल समझता मैं
देदो आशीष अपनी मार्ग दिखा दो
तेरे पास आया हूँ रास्ता बता दो
मुझको समझ नहीं आता मैं किस मोड़ पे खड़ा हूँ गुरुवर
भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर
गीत=} #भीतर होती है हलचल कोई शक्ति है अपार गुरुवर
#“Bheetar Hoti Hai Halchal Koi Shakti Hai Apaar Guruvar.
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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