यह गीत एक बेटे के दिल की आवाज़ है जो माँ से सवाल करता है कि जब उसने इतनी सुंदर दुनिया बनाई है तो फिर उसमें दुख गरीबी और उदासी क्यों है। त्योहारों और खुशियों का महत्व कम होता दिख रहा है लोगों में पहले जैसा उत्साह नहीं रहा। गरीब और जरूरतमंद लोग भूख अभाव और तकलीफों से जूझ रहे हैं जबकि त्योहार उनके जीवन में खुशियाँ नहीं ला पा रहे, कई लोग जीवन में अकेलेपन दर्द और संघर्षों से घिरे हैं जिनकी कोई सुनने वाला नहीं है। वह माँ से प्रार्थना करता है कि वह इन दुखों को दूर करे सबके जीवन में आशा ज्ञान उत्साह और खुशियाँ भर दे। अंधकार को मिटाकर प्रेम और प्रकाश से जीवन को रोशन कर दे।संक्षेप में यह रचना मानव जीवन के दुख-दर्द, सामाजिक असमानता और ईश्वर से करुणा पुकार का सुंदर चित्रण है जिसमें आशा और सकारात्मक बदलाव की प्रार्थना भी निहित है, आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,तूने दुनियां बनाई माँ तुमसे मैं सवाल कर डालूं, #Toone Duniya Banai Maa Tumse Mai Sawal Kar Dalu, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Toone Duniya Banai Maa Tumse Mai Sawal Kar Dalu
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मेरा दिलवा मुझसे बोला मैं कुछ बात कर डालूं
तूने दुनियां बनाई माँ तुमसे मैं सवाल कर डालूं
पर्व त्यौहार बनाया तूने खामोशी के साथ क्यों
उत्सव के मेला खुशियां लाती ना उत्साह क्यों
कितने रात बीती है माता त्यौहारो की याद में
जलते ना दीपक अब मईया बारिश के जज्बात में
दिखता ना उत्साह मुझे माँ पर्व त्यौहार की गलियों में
दिल मेरा अब ढूंढ़ रहा है किधर छुपा है कलियों में
उत्सव का प्रकाश ना दिखता दिखता ना उत्साह
दिल मेरा अब मुझसे कहता प्यास लगी है प्यास
मेरा दिलवा मुझसे बोला मैं कुछ बात कर डालूं
तूने दुनियां बनाई माँ तुमसे मैं सवाल कर डालूं
बीत जाती वो राते माता चुपचाप रहकर यादों में
दिखती ना अज्ञात राते ख़ामोश रहे जज्बातों में
जान गया मैं जिसको माता वो क्यों छुपा सा रहता है
मेरे मन में बैठकर माता क्यों अनजान सा रहता है
लोगों के जीवन में माता खुशियों का अभाव क्यों
आया है उत्सव का मेला फिर भी वो उदास क्यों
निर्धन और गरीब को देखो जिसके घर में चूल्हा ना
मांग रहा है रोटी तुमसे खुशियों का सौगात ना
तन को ढक ना पाता वो मन को कैसे ढकता
भूख लगी है पेट को माता पेट को कैसे भरता
मेरा दिलवा मुझसे बोला मैं कुछ बात कर डालूं
तूने दुनियां बनाई माँ तुमसे मैं सवाल कर डालूं
दुखों की पहाड़ ने घेरा चारों ओर से पत्थर से
तोड़ ना पाता जंजीरों को जंजीर बने है जंतर से
आँख के आँसू बहते है पेट की भूख को कहते है
मिल जाता जब जूठा भोजन वहीं खुशी से करते है
सुनसान उदासी की राहों ने उनको ही अपनाया
मात पिता है गालियां उनका जिन्होंने अपनाया
छोड़ दिया है घर द्वारों को तोड़ दिया है नाता
मिलती ना अब खुशियां उनको प्यास लगी है प्यासा
पत्थर पानी पड़ते है वर्षों तक वो चलते है
आंगन ना चौबारा उनका फिर भी दिल से फलते है
मेरा दिलवा मुझसे बोला मैं कुछ बात कर डालूं
तूने दुनियां बनाई माँ तुमसे मैं सवाल कर डालूं
ज्ञान आशा की ऊर्जा को माँ देदो उनकी झोली में
अंधकार मिटा दो जीवन से माँ दीप जला दो होली के
निराश ना होने दो माँ अब उनको खुशहाल करो
आशा की विजय से माता उनसे तुम अब प्यार करो
जीवन में उत्साह जगा दो जोश प्रेरणा भर दो
काली रात को काट दो मईया मन में रोशनी भर दो
खुशहाली का बर देदो तुम उदासी ले जाओ
दीप जला दो खुशियों का माँ प्रेम की खुशियां भर दो
जीवन में उत्साह माता हरदम खुशियां लाता
उत्सव के आने के पहले मन से दुख बहंगाता
मेरा दिलवा मुझसे बोला मैं कुछ बात कर डालूं
तूने दुनियां बनाई माँ तुमसे मैं सवाल कर डालूं
गीत=} #तूने दुनियां बनाई माँ तुमसे मैं सवाल कर डालूं
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