आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति रचना, सूर्यास्त से जीवन का संदेश: अंधकार में भी आशा की किरण Suryast Se Jeevan Ka Sandesh: Andhkaar Mein Bhi Asha Ki Kiran,

आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति रचना, सूर्यास्त से जीवन का संदेश: अंधकार में भी आशा की किरण, Suryast Se Jeevan Ka Sandesh: Andhkaar Mein Bhi Asha Ki Kiran,

सूर्यास्त केवल दिन का अंत नहीं बल्कि विराम शांति और आत्मनिरीक्षण का संदेश है। जीवन में उतार-चढ़ाव भय और अंधकार स्वाभाविक हैं, लेकिन कर्म, विश्वास और ध्यान से अंधकार में भी प्रकाश और आशा लौटती है। हर अंत में नई शुरुआत और हर रात के बाद भोर अवश्य आती है।

 सूर्यास्त का सुंदर दृश्य हमें जीवन की गहराइयों को समझाता है। पूरे दिन की रोशनी ऊर्जा और गतिविधियाँ जैसे सूर्य के साथ ही सिमट जाती हैं और संध्या एक शांत संदेश लेकर आती है। रात का अंधेरा भले ही मन में भय और अस्थिरता पैदा करे, लेकिन वही हमें अपने कर्म आत्मचेतना और ईश्वर की कृपा को याद दिलाता है। जीवन में उतार-चढ़ाव परिवर्तन और घबराहट आना स्वाभाविक है पर जैसे हर रात के बाद भोर होती है वैसे ही आशा प्रकाश और नई शुरुआत भी हमेशा लौट आती है।

ढलते सूर्य का दृश्य ध्यान से देखने पर ऐसा महसूस होता है कि दिन भर का कोलाहल प्रकाश और ऊर्जा अब शांति मौन और समापन में बदल रहे हैं। जैसे सूर्य अपनी किरणों को अपने आंचल में समेटकर क्षितिज की ओर लौट रहा हो। उसे निहारते हुए मन में एक गहरी शांति और विराट सुख का अनुभव होता है मानो प्रकृति स्वयं हमें ठहरकर जीवन को समझने का संदेश दे रही हो।

प्रकृति की अद्भुत लाली और रक्तिम आकाश जब किसी कलाकार की कृति की तरह आँखों के सामने उभरते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा तन मन और आत्मा शांति और सुकून से भर उठते हैं। जैसे किसी शांत सरोवर में खिला कमल अपनी कोमल सुंदरता से वातावरण को भर देता है वैसे ही यह दृश्य हृदय को सौन्दर्य और संतोष से परिपूर्ण कर देता है।

प्रकृति का यही सत्य है कि उसमें सौन्दर्य और कठोरता दोनों साथ-साथ विद्यमान रहते हैं और उसी संतुलन में शान्ति का वास्तविक मधुर स्वरूप छिपा होता सूर्यास्त केवल एक दृश्य नहीं बल्कि एक गहन अनुभूति है जो सौन्दर्य शक्ति और शान्ति के अद्भुत मिश्रण से आत्मा को स्पर्श करती है। यह मधुर ऊर्जा का एक विराट स्वरूप बनकर मन को सजाती है और भीतर एक अनकही शांति भर देती है।

लेकिन यही अंधेरा हमें यह भी सिखाता है कि प्रकाश का महत्व क्या है और हर गहरी रात के बाद एक नई सुबह अवश् हैं। जब सूरज छिप जाता है तो संसार मानो अंधेरी रातों की गोद में प्रवेश कर जाता है। चारों ओर अंधकार फैल जाता है और जीवन कुछ क्षणों के लिए बोझिल-सा लगने लगता है। सब कुछ जैसे ठहर गया हो निर्जीव-सा प्रतीत होता है। इसी अंधकार में मन के भीतर भय और असुरक्षा की परछाइयाँ भी जन्म लेने लगती हैं।

रात की अवस्था उस अज्ञात भय का प्रतीक है जो भीतर ही भीतर मनुष्य को विचलित करता रहता है एक ऐसा डर जिसका कोई स्पष्ट रूप नहीं होता फिर भी उसकी छाया मन पर गहराई से छा जाती है क्योंकि जब मनुष्य रात के सन्नाटे में किसी अनजानी मृत्यु-सी आहट महसूस करता है तो उसका मन घबराहट और बेचैनी से भर उठता है। यह चंचल मन न जाने किन-किन दिशाओं में भटकने लगता है और व्यक्ति अपनी स्थिरता खो बैठता है।

कर्म के मार्ग पर चलने में डगमगाहट भी है डर भी है भय दुःख और सुख हँसी और खुशी सब कुछ इसी संसार का हिस्सा हैं। परंतु अंतिम सत्य यही है कि हमें अपने जीवन में क्या प्राप्त करना है यह हमारे कर्म और हमारे विश्वास पर ही निर्भर करता है ईश्वर ने मनुष्य को कर्म करने की अद्भुत क्षमता प्रदान की है और जीवन का वास्तविक अर्थ भी कर्म से ही प्रकट होता है। अंधकार में भी प्रकाश का निर्माण केवल कर्म और विश्वास से ही संभव है। बिना कर्म के यह जीवन निरर्थक प्रतीत होता है।

आंतरिक अंधकार हमें अपने ही प्रकाश से विमुख कर देता है पर सच यह है कि उसी मन के भीतर कहीं न कहीं एक दीप भी जलता रहता है जिसे केवल विश्वास और जागरूकता से फिर से प्रज्वलित किया जा सकता है। क्योंकि यह रात का अंधेरा केवल बाहर ही नहीं होता बल्कि मन के भीतर भी उतर आता है। और जब मन के अंदर अंधकार छा जाता है तो वह जीवन में खिलती हुई रोशनी से हमें दूर कर देता है।

सच्ची समझ यही है कि इन परिवर्तनों को स्वीकार करते हुए मन को धीरे-धीरे स्थिर करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है ये मन इतना चंचल है कि कभी स्थिर नहीं रहता। परिवर्तन की बेला आते ही यह घबरा उठता है और यही चंचलता ही भय का कारण बन जाती है परंतु मानव जीवन का सत्य है जहाँ जीवन है वहाँ उतार-चढ़ाव भी स्वाभाविक हैं। परिवर्तन अनिवार्य है और उसी के साथ डर असमंजस और अस्थिरता भी आते हैं।

घबराहट की आस्था मानव को सहारा देती है और भीतर एक नई शक्ति एक नया संतुलन जगाने का मार्ग भी दिखाती है क्योंकि मनुष्य जीवन की घबराहट एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति उसकी वेदना से व्याकुल होकर भीतर से बेचैन हो उठता है। ऐसे क्षणों में वह देवी-देवताओं ईश्वर परमात्मा और दिव्य माता भवानी की कृपा को स्मरण करता है। उनके तेज और संरक्षण में आश्रय खोजते हुए वह उस घबराहट से मुक्त होने की कामना करने लगता है।

हर शुरुआत में एक अंत छिपा होता है, और हर अंत में एक नई शुरुआत की संभावना रहती है सूर्यास्त केवल दिन का अंत नहीं है बल्कि यह भोर का वादा भी लेकर आता है। यही वह चक्र है जिसे हम प्रकृति और जीवन का अद्भुत प्रवाह कहते हैं।

जीवन के प्रत्येक अंत में नया आरंभ छिपा होता है और हर कठिनाई के बाद आशा और उजाला अवश्य लौटता है सूर्य हमारे जीवन में आशा और चक्रात्मक प्रवाह का प्रतीक है। हर दिन अपने सूर्योदय और सूर्यास्त के माध्यम से वह हमें यह निर्मल संदेश देता है मैं जा रहा हूँ पर समाप्त नहीं हो रहा मैं फिर लौटूँगा और अपने प्रकाश से संसार को पुनः आलोकित कर सब कुछ जगमगा दूँगा।

प्रकृति और ब्रह्मांड के चक्र में सूर्य ईश्वर का रूप है और उसकी ऊर्जा आशा और प्रेरणा का प्रतीक है। हर नया दिन हमें नई शुरुआत और अवसर का निमंत्रण देता है।

इस जीवन में अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो प्रभात का सूर्य अवश्य लौटता है वह अपने प्रकाश से हमारे हृदय को पुन आलोकित कर देता है और हम फिर से पुष्पों की बगिया की भाँति खिल उठते हैं आशा सौंदर्य और जीवन की सुगंध से जगमगाते हुए।

जब हम ढलते सूर्य को ध्यान से देखते हैं तो हम केवल आकाश में घटती खगोलीय घटना नहीं देख रहे होते। हम समय के परिवर्तन को देख रहे होते हैं दिन का अर्थ है गतिविधि कर्म संघर्ष विचार और इच्छाएँ सूर्यास्त का अर्थ है विराम समर्पण और लौटना।

सूर्य दिन भर बिना थके प्रकाश देता है किसी से कुछ नहीं माँगता। जब उसका समय पूरा होता है वह चुपचाप अपनी किरणों को समेट लेता है और हमें एक सूक्ष्म शिक्षा देता है कर्म करो परंतु अंत में थकान नहीं शांति लेकर लौटो।"

जैसे सूर्य अपनी किरणों को अपने हृदय में समेटता है वैसे ही हम भी दिन भर की बाहर फैली हुई चेतना को धीरे धीरे अपने भीतर में समेटते है और मन शांति की दुनियां में प्रवेश कर जाता है इसीलिय कहा जाता है इसी कारण कहा गया है कि वास्तव में जो बाहर से अंतर्मुखी होने की प्रक्रिया घटती है वही प्रक्रिया हमारे भीतर भी घटती है !

दिन भर की बाहर फैली हुई चेतना जब धीरे-धीरे भीतर लौटने लगती है उस क्षण मन स्वाभाविक रूप से शांत होता है क्योंकि प्रकृति स्वयं शांत हो रही है पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटते हैं, रंग मद्धम हो जाते हैं आकाश बोलना बंद कर देता है और जब मन प्रकृति के इस लय में आ जाता है,तब जो अनुभूति होती है, वही है विराट सुख यह सुख किसी वस्तु से नहीं आता,यह सुख संघर्ष के रुक जाने से आता है। जो सूर्यास्त को ध्यान से देखता है वो अनजाने ही ध्यान में प्रवेश कर जाता है क्योंकि वहाँ न तो भूत रहता है, न भविष्य न स्मृतियों का बोझ न अपेक्षाओं की दौड़ केवल एक शांत पूर्ण वर्तमान जो सत्य है!

ईश्वर ने मनुष्य को कर्म करने की क्षमता दी है,और जीवन का वास्तविक अर्थ भी कर्म से ही उपजता है।अंधकार कितना ही गहरा क्यों न हो,उसमें प्रकाश कर्म और विश्वास से ही रचा जा सकता है। क्योंकि बिना कर्म के यह जीवन आख़िर किस प्रयोजन का?

जहाँ कर्म है, वहाँ डगमगाहट भी है डर, भय, दुःख और सुख,हँसी और खुशी इस संसार में सब कुछ विद्यमान है।परंतु अंतिम सत्य यही है कि इन सबके बीच हमें यह जानना होगा कि हमें वास्तव में प्राप्त क्या करना है सिर्फ़ भोग, या आत्मबोध सिर्फ़ चलना, या सही दिशा में चलना।

रात का अँधेरा तो समय के साथ कट जाता है, लेकिन मन का अँधेरा अगर घर कर जाए तो इंसान को भीतर से थका देता है। जब मन पर अँधेरा छा जाता है, तब जीवन में मौजूद रोशनी—उम्मीद, प्रेम, उद्देश्य सब होते हुए भी दिखाई नहीं देते।

अँधेरा चाहे जितना घना हो एक छोटी-सी रोशनी भी उसे चुनौती दे देती है। मन के अँधेरे में वह रोशनी कभी किसी अपने की बात होती है, कभी किसी उद्देश्य की याद और कभी खुद से किया गया एक ईमानदार संवाद।

आपने मनुष्य जीवन का बहुत सूक्ष्म और सत्य चित्र खींचा है।मन का चंचल होना उसका स्वभाव है दोष नहीं। वही मन कल्पना करता है आगे बढ़ाता है पर जब परिवर्तन आता है तो यही चंचलता भय का रूप ले लेती है। क्योंकि मन स्थिरता चाहता है, जबकि जीवन स्वभाव से प्रवाह है।

वास्तव में परिवर्तन से डर मनुष्य को इसलिए लगता है क्योंकि वह भविष्य को पकड़ नहीं पाता। लेकिन उतार–चढ़ाव ही जीवन की पहचान हैं जहाँ ठहराव है वहाँ जड़ता है और जहाँ प्रवाह है वहीं जीवन है।

मन चंचल है ठहरना नहीं जानता परिवर्तन की आहट से वह घबरा जाता है। जीवन है तो उतार-चढ़ाव होंगे ही और यही मानव जीवन की वास्तविक कहानी है क्योंकि मन की अस्थिरता और जीवन की अनिवार्यता को स्वीकार करने का संदेश देता है।

जब जीवन की घबराहट असहनीय हो जाती है तब मनुष्य का अहं, उसका तर्क और उसकी शक्ति सब मौन हो जाते हैं। उसी क्षण वह किसी न किसी दिव्य सत्ता की ओर देखता है। यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि मनुष्य की सहज मानवीय पुकार है।

देवी-देवता ईश्वर परमात्मा या दिव्यमाता भवानी ये केवल आस्था के प्रतीक नहीं होते बल्कि भयग्रस्त मन के लिए संरक्षण आश्रय और विश्वास बन जाते हैं। मनुष्य जब अपने को असहाय अनुभव करता है तब उस दिव्य तेज को स्मरण कर स्वयं को सुरक्षित मानने लगता है और वही स्मरण उसकी घबराहट को धीरे-धीरे शांत करता है।

जब घबराहट वेदना बन हृदय को घेर लेती है तब मनुष्य की चेतना शरण की राह खोजती है ईश्वर देवी परमात्मा नाम चाहे जो हो उनके तेज में मन संरक्षण पाता है और भय से विमुख होने की आशा जगाता है।

प्रकृति भाव भय आशा।परिवर्तन और आध्यात्मिकता की एक अनंत यात्रा है सूर्योदय जीवन का प्रतीक है दिन कर्म का विस्तार है संध्या समापन की शांति है और रात भय व आत्मचिंतन का गहन क्षण फिर भोर आती है पुनर्जन्म की तरह।नई शुरुआत का संदेश लेकर क्योंकि सूर्य साक्षात ईश्वर है ऊर्जा आशा और प्रेरणा का शाश्वत स्रोत।

जो व्यक्ति सूर्यास्त को ध्यानपूर्वक देखता है वह अनजाने ही ध्यान में प्रवेश कर जाता है वहां न भूत रहता है न भविष्य।न स्मृतियों का बोझ न अपेक्षाओं की दौड़ केवल एक शांत पूर्ण वर्तमान होता है जो सत्य है जो हमेशा मौजूद है सूर्यास्त हमें यही सरल परन्तु गहन शिक्षा देता है वर्तमान में जीवो और शांति में विलीन हो जाओ।

टिप्पणियाँ

मेरी हृदय मेरी माँ

यह गीत जीवन के परिवर्तन आत्मचेतना और भगवान के रहस्य को समझने की एक आध्यात्मिक खोज को व्यक्त करता है।कवि इस गीत के माध्यम से भगवान से प्रश्न करता है कि वह पागल नहीं है बल्कि जीवन और चेतना के गहरे रहस्यों को समझने की कोशिश में भटक रहा है। संसार हर पल बदलता रहता है सुख-दुःख आशा-निराशा जन्म-मरण सब आते-जाते रहते हैं। मनुष्य बाहर की दुनिया को आँखों से देखता है लेकिन असली सत्य मन आत्मा और चेतना के भीतर छिपा है। यह जीवन कोई स्थिर चीज नहीं है बल्कि लगातार बदलने वाली प्रक्रिया है। जो व्यक्ति इस परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है और भीतर की चेतना को समझने का प्रयास करता है वही जीवन के सच्चे अर्थ को जान पाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, भटका चेतना के सागर में ना मैं पागल भगवन, #Bhatka Chetna Ke Saagar Mein Na Main Paagal Bhagwan, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

संघर्ष संतुलन और अवसर की खोज जीवन अवसर नहीं, चेतना की यात्रा, Sangharsh Santulan Aur Avasar Ki Khoj Jeevan Avasar Nahin, Chetna ki Yatra,

आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना,मानव और ब्रह्मांड की एकता का अनुभव, Manav Aur Brahmand Ki Ekta Ka Anubhav,

यह गीत जीवन के दर्द धोखे और अकेलेपन की भावना को व्यक्त करता है। कवि कहते हैं कि आज दुनिया दुख को नहीं समझ रही है और उसे एक तमाशा समझती है लेकिन एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब लोग उनके दर्द को समझेंगे और पछताएँगे क्योंकि जीवन में कई लोग अपने स्वार्थ और गलत सोच के कारण दूसरों का दिल तोड़ देते हैं। इंसान कई बार अपने ही लोगों से ठोकर खाकर अकेला रह जाता है। फिर भी जीवन का विश्वास है कि जीवन में नफरत नहीं बल्कि प्रेम दया और करुणा ही सबसे बड़ी शक्ति है। ईश्वर सब कुछ देखता है और हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल जरूर मिलता है। इसलिए सच्चाई और प्रेम के रास्ते पर चलना ही जीवन का सही मार्ग है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मेरा दुःख जब देखेगा ना भूलेये दुनियां #Mera Dukh Jab Dekhegi Naa Bhooleye, ✍🏻#Write Halendra Prasad

आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति रचना, सूर्य के तीन रूप और जीवन का दर्शन संतुलन ही शाश्वत सत्य, Surya Ke Teen Roop Aur Jeevan Ka Darshan Santulan Hi Shashvat Saty,

जब हम स्वार्थ और तृष्णा से ऊपर उठकर निष्पक्ष और निर्मल दृष्टि से संसार को देखेंगे तब मनमस्ति और मुक्ति का अनुभव होगा क्योंकि स्वार्थ और लालसा जीवन को उलझाते हैं व्यक्ति अपनी इच्छाओं और मोह में फंसकर असली आनंद और शांति से दूर हो जाता है अवलोकन का दृष्टि अपनाना आवश्यक है क्योंकि स्वार्थ पक्षपात और मोह से ऊपर उठकर देखना ही मन को वास्तविक आनंद मनमस्ति देता है माया और लालच भ्रम फैलाते हैं वे अंदर की शक्ति बुद्धि और आत्मिक प्रकाश को ढक देते हैं।जीवन का उद्देश्य आत्मिक जागरण है और ज्ञान आत्मा का प्रकाश है और जीवन का दिव्य गुण ही असली सुख हैं।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मनमस्त हो जाएगा जब तुम निरेखा करोगे, #Manmast Ho Jayega Jab Tum Nirekha Karoge, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

ये जीवन अनेक रंगों से भरा है, इसलिए हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना ही जीवन का सार है। इस गीत के माध्यम से जीवन की सच्चाई को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कवि बताते हैं कि जीवन एक आंधी की तरह है, जिसमें सुख-दुःख, हँसी-आँसू, आशा-निराशा जैसी सभी भावनाएँ आती-जाती रहती हैं। जैसे समुद्र की लहरें उठती और गिरती हैं, वैसे ही जीवन में भी परिवर्तन लगातार होता रहता है।कवि माँ को प्रकृति और सृष्टि की शक्ति के रूप में देखते हैं, जो मनुष्य को हर अनुभव से परिचित कराती है कभी खुशी देती है तो कभी दुःख। जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है, सब समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।क्योंकि की मनुष्य को संघर्षों के बीच आशा, धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए। निरंतर अभ्यास और मेहनत से ही सफलता प्राप्त होती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति रचना भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, आती जाती है सब बातें इस जीवन के आंधी में, #Aati Jati Hai Sab Bate Is Kivan Ke Aandhi Mem, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

यह गीत माँ की महिमा, त्याग, प्रेम और शक्ति का भावपूर्ण वर्णन करती है। कवि बताता है कि माँ ही उसकी सबसे बड़ी रक्षक और प्रेरणा स्रोत है। संसार के तीर-तलवार, दुख-कष्ट और स्वार्थी लोगों का व्यवहार उसे विचलित नहीं कर सका, क्योंकि माँ के संस्कार और आशीर्वाद उसके साथ हैं माँ ने उसे कठिन परिस्थितियों में तपाकर मजबूत बनाया, ज्ञान दिया, साहस दिया और सही मार्ग पर चलना सिखाया। जब दुनिया स्वार्थ से भरी दिखाई देती है और कठिन समय में कोई साथ नहीं देता, तब माँ ही सच्ची सहारा बनती है। कवि माँ को देवी, शक्ति और ईश्वर का स्वरूप मानता है तथा उसके चरणों में समर्पित होकर कृतज्ञता व्यक्त करता है।माँ का प्रेम निष्काम, अटूट और जीवन का सबसे बड़ा आधार है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #मेरी मईया तू बनाई मुझको फूल दिल के, #Meree Maiya Too Banaee Mujhako Phool Dil Ke, #Halendra Prasad,

जीवन का वास्तविक सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं बल्कि अंतरात्मा की अनुभूति प्रेम करुणा और आत्मसंतोष में है। इसलिए मनुष्य को अपने भीतर के समन्दर यानी आत्मज्ञान को देखने और समझने का प्रयास करना चाहिए। यह गीत मनुष्य को यह संदेश देती है कि बाहरी दुनिया की चकाचौंध और दिखावे में उलझने के बजाय उसे अपने हृदय और आत्मा के भीतर झांकना चाहिए क्योंकि कि सच्चा ज्ञान करुणा और शांति मनुष्य के अंदर ही मौजूद है। दुनिया की चमक-दमक अक्सर मनुष्य को प्रेम दया और सत्य से दूर कर देती है। सच्ची शक्ति में अहंकार नहीं होता बल्कि उसमें करुणा और विनम्रता होती है। जो व्यक्ति दूसरों को सुख देता है और प्रेम बांटता है वही वास्तव में आनंद और आत्मसंतोष प्राप्त करता है। दीपक की तरह महान मनुष्य स्वयं कठिनाई सहकर भी दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #कहता दिलवा मेरा मुझसे मैं समन्दर देखूं रे, #Kahata dilva Mera Mijhase Mai Samndar Dekhu Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

जीवन के हर सुन्दर सफर के पीछे कठिन परिश्रम धैर्य और संघर्ष छिपा होता है। यह गीत जीवन के सफर की सच्चाई को दर्शाता है। जीवन बाहर से बहुत सुन्दर और मोहक दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे कई कठिनाइयाँ संघर्ष और दर्द छिपे होते हैं। आँखें केवल जीवन के सुन्दर नजारे देखती हैं, परन्तु असली तकलीफ और मेहनत पैरों को सहनी पड़ती है जो पूरे रास्ते चलते हैं। दुनिया अक्सर किसी की सफलता और खुशहाली को देखती है लेकिन यह नहीं जानती कि उस सफलता को पाने के लिए उसने कितनी तकलीफ संघर्ष और त्याग सहा है। जो व्यक्ति बाहर से चमकता हुआ दिखाई देता है उसका रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, जो देखा आँखो ने नजारे बड़ा मोहक लागे मन गुरुजी, #Jo Dekha Aankhon Ne Nazare Bada Mohak Lage Man Guruji, Writer ✍️ #Halendra Prasad,