यह गीत एक गहरी आध्यात्मिक भावना को व्यक्त करता हैजिसमें माँ को शांतिप्रेम और ईश्वर का रूप माना गया है। कवि बताता है कि जब मन शांत होता है तब माँ ईश्वर का अनुभव अपने आप होने लगता है कि इंसान बाहर की दुनिया में भगवान और सत्य को खोजता रहता है लेकिन असली सत्य उसके अपने अंदर आत्मा में ही मौजूद होता है। बाहर की दुनिया केवल भ्रम माया है, जबकि सच्चा सुख और शांति आत्मज्ञान से मिलती है जब मनुष्य अपने भीतर झांकता है मोह और भ्रम को छोड़ देता है तब उसे ईश्वर का साक्षात अनुभव होता है और जीवन में सच्ची शांति और आनंद प्राप्त होता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे, #Shanti Sukh Ke Vishram Men Mere Pas Rahti Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे
#Shanti Sukh Ke Vishram Men Mere Pas Rahti Re
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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गहरी रातों में मईया मुझको याद आती रे
शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे
देख लेता हूँ तुझको मैं अंतर मन की आसमा मे
बात करता हूँ जीवन का मैं दुःख नहीं है सस्ता में
खोजना ना पड़ता है तुझको ढूंढना ना पड़ता है
आ जाती हो पास मेरे जब हृदय मेरा कहता है
ऐसा पूर्णता देती हो जो कभी टूट ना पाता
चारों ओर फैलाकर मुझको सत्य दिखाती मुझे यहां
गहरी रातों में मईया मुझको याद आती रे
शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे
मुझको सब कुछ दिखता है जब मैं आसमान में देखता हूं
तारे हंसते गाते है सब शोर मचाते दिखते है
दिल मेरा अब कहता बाहर में कुछ ना होता
सब होता आत्मा के अन्दर बाहर भरम का खोता
जीवन का वो परम सत्य सब में ही विद्यमान है
हर प्राणी हर वस्तु में भरा हुआ भरमार है
बाहर कही ना है भगवन तू तो मन के अंदर है
सारी सृष्टि में व्याप्त रहता है तू तो सबके अंदर है
गहरी रातों में मईया मुझको याद आती रे
शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे
देखता हूँ इस दुनियां में लोग सच को ढूंढे गली गली
धरती अम्बर आसमा खोजें खोज ना पाता प्रभु कही
हर जगह मौजूद है सच देख ना पाता कोई
पर्वत और पहाड़ में खोजे जंगल बीच में खोई
मानव का ये मन खोजता है बाहर की दुनियां में
अपने भीतर छुपा है सच प्रकृति की दुनियां में
जो देख लिया वो ध्यान किया सुख शान्ति को पाकर
छोड़ दिया सब मोह भरम को जीवन से निकाल कर
गहरी रातों में मईया मुझको याद आती रे
शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे
मेरा मन मुझसे अब कहता चल तू मेरे साथ यहां
दर्शन तुझे कराता हूँ मै जहां रहते भगवान तेरा
क्यों ढूंढता तू इधर उधर क्यों तू यहां भटकता
झाक कर देख अपने अंदर क्यों इतना तड़पता
सम्पूर्ण जगत में रहते है प्रभु हर जीवों में बास उनका
देख जरा तू गौर से रहते है तेरे पास यहां
आत्मा की गहराई को तू देख ले अंतर्मन से
दिख जाएंगे प्रभु तेरा तेरे तन मन में
गहरी रातों में मईया मुझको याद आती रे
शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे
गीत =} #शान्ति सुख के विश्राम में मेरे पास रहती रे
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