यह गीत एक भावुक मनुष्य के अतीत की यादों पर आधारित है जिसमें वह रात के अकेलेपन में अपने बचपन जीवन के पुराने दिनों और किए गए कार्यों को याद करता है। उसे उन दिनों की सरलता और मासूमियत की याद आती है लेकिन साथ ही कुछ गलतियों का पछतावा और आत्मग्लानि भी महसूस होती है। कवि अपनी माँ के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करता है जिन्हें वह जीवन की आधारशक्ति और दैवीय रूप में देखता है। साथ ही वह अपने गुरु या मार्गदर्शक के प्रति भी कृतज्ञता प्रकट करता है जिनके आशीर्वाद से उसका जीवन संवरता है।क्यूंकि यह गीत स्मृति पछतावा माँ के प्रति भक्ति और गुरु के प्रति समर्पण की भावनाओं को व्यक्त करती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मेरी आँखें जागे रात को बुलाकर यादों में, #Meri Aankhe Jage Rat Ko Bulakar Yado men, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #मेरी आँखें जागे रात को बुलाकर यादों में
#Meri Aankhe Jage Rat Ko Bulakar Yado men
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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जो बीत गया वो याद आता है इन रातों की राहों में
मेरी आँखें जागे रात को बुलाकर यादों में
जीवन का वो क्षण था कैसा कैसा वो जमाना था
दुःख सुख का कोई बोध नहीं था बच्चा दिल परवाना था
दुखी होता है दिल मेरा अब उस दिनों की याद में
चले गए वो व्यर्थ दिन जो सुख देते संसार में
त्याग दिया निंदो को आँखें पता नहीं क्यों सोता ना
जाग रही है रात को आँखें विरह जगत को पिता ना
जो बीत गया वो याद आता है इन रातों की राहों में
मेरी आँखें जागे रात को बुलाकर यादों में
पछतावा अफसोसो ने मुझे चारों ओर से घेरा
महसूस कराया उन दिनों को जिसने मुझे रुलाया
भाव विभोर की दुनियां में मुझे मानसिक पीड़ा मिला था
गलत कार्य के बाद मुझे अपराध का बोध हुआ था
यादों का याददाश्त कैसा है कैसा था अपराध
सुध बुध में बैठा है मेरे जाता नहीं वो बात
धारणा बनकर आता है रूप स्वरूप दर्शाता है
चलता है मेरे आगे आगे अपना असर थमाता है
जो बीत गया वो याद आता है इन रातों की राहों में
मेरी आँखें जागे रात को बुलाकर यादों में
जीवन के उस क्षण को मैने उसे समर्पित किया
वो रहती थी गांव में मेरे जिसे पूज कर जिया
जो मांगा वो दिया मुझे ओ संघर्ष कराकर बोली
यादों में रहती है वो मेरे मात भवानी काली
मैं उसे समर्पण करता हूँ उसकी याद में जीता
सब कुछ है वो मेरी मईया जिसने मुझे है सिंचा
ना मूरत ना रूप कोई है हृदय बीच में रहती
याद आती मुझे हरदम वो आत्म दिल में रहती है
जो बीत गया वो याद आता है इन रातों की राहों में
मेरी आँखें जागे रात को बुलाकर यादों में
ये जीवन मेरा पूरा गुरुवर उसको ही समर्पित
स्वीकार किया है मुझको तो प्रेम उसका है अर्पित
जीवन में सब कुछ प्राप्त किया मैं उसके आशीर्वादों से
प्रेम दिया अधिकार दिया मुझे उसके पास बैठने से
बीते समय मुझे याद आते है मन के भीतर राह देखूं
पत्थर की मूर्त को देखकर इन रातों से बात करु
जीवन का हर पल समर्पित हरदम याद रहता है
ममता की वो गठरी मुझसे भूल नही पाता है
जो बीत गया वो याद आता है इन रातों की राहों में
मेरी आँखें जागे रात को बुलाकर यादों में
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