यह गीत बताता है कि मनुष्य जीवन भर खजाना यानी सुख शांति और समाधान बाहर की दुनिया में ढूंढता रहता है लेकिन उसे वह कहीं नहीं मिलता। इसका कारण मन में भरा भ्रम संदेह और घबराहट है, जो उसे सही रास्ता नहीं देखने देता अंत में आत्मा समझाती है कि असली खजाना बाहर नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर ही छिपा है। जब मन शांत और धैर्यवान होता है, तब सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है और समाधान स्वयं मिल जाता है।क्योंकि जीवन का सच्चा खजाना बाहर नहीं बल्कि शांत और स्थिर मन के भीतर ही मिलता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #ढूंढू जीवन का खजाना मिलें ना मुझको दोबारा गुरुजी #Dhoondhu Jeevan Ka Khazana, Mile Na Dujhko Dobara Guruji, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Dhoondhu Jeevan Ka Khazana, Mile Na Dujhko Dobara Guruji
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मेरे मन बीच भरा है कैसा भरम मतिभ्रम गुरूजी
ढूंढू जीवन का खजाना मिलें ना मुझको दोबारा गुरुजी
कीतना व्याकुल किया मुझको उलझाकर
शंका संदेहों ने मुझे मार दिया झुंझलाकर
खोई हुई वस्तु को मैं ढूंढता जिगर में
मिलता ना वस्तु मुझे उलझन दिया घर में
कोना अटारी कोठा ढूंढा दरबदर में
मिला ना खजाना हमको पानी चुए दन बदन में
मेरे मन बीच भरा है कैसा भरम मतिभ्रम गुरूजी
ढूंढू जीवन का खजाना मिलें ना मुझको दोबारा गुरुजी
बड़ी प्रयासों से मैं खोजता ढूंढता हूँ
मनके भरम में मैं दौड़ता कूदता हूँ
जिधर जाता मैं नाकाम हो जाता
मन के भरम मैं गुलाम हो जाता
तीव्र आशा मेरी चैन से ना बैठे
खोजता फिरता है वस्तु बेचैन होके तरसे
मिलता ना खजाना मुझे घर के अंदर में
रखा था घर में मैं संदूक के जिगर में
मेरे मन बीच भरा है कैसा भरम मतिभ्रम गुरूजी
ढूंढू जीवन का खजाना मिलें ना मुझको दोबारा गुरुजी
बहुते बेचैन हूँ मैं खोजने पर मिले ना
लगता है पास में है ढूंढने से निकले ना
मन की व्याकुलता ने मुझे अजीबे फसाया
सोच समझदारी को मेरे जल्दबाजी में लटकाया
मन की घबराहट मुझे सोचने ना देती
दरबदर दौड़कर मुझे उत्तेजित बनाती
सही ढंग से देखता ना सही से समझता
पास में पड़ी है वस्तु देखे बिन तरसता
मेरे मन बीच भरा है कैसा भरम मतिभ्रम गुरूजी
ढूंढू जीवन का खजाना मिलें ना मुझको दोबारा गुरुजी
धीरे धीरे आत्मा मेरी मुझसे अब बोली
बात ना है वस्तु का मस्ती में डोली
जीवन की समस्या सत पर लागू जब होता है
अवसरों पर लागू होता धैर्य पर दिखाता है
मन जब शांत होता चीजें साफ दिखाई देती
जाहिर स्पष्ट होता चीजें दिखाई देती
समाधान मिलता है साफ सुथरा प्रत्यक्ष में
प्रकट होता छुपा चीज व्यक्त करता सफर में
जीवन में घबराहट जड़ीबाजी काम ना आती
मार देती मति को मन को फसाती
मेरे मन बीच भरा है कैसा भरम मतिभ्रम गुरूजी
ढूंढू जीवन का खजाना मिलें ना मुझको दोबारा गुरुजी
गीत =} #ढूंढू जीवन का खजाना मिलें ना मुझको दोबारा गुरुजी
#Dhoondhu Jeevan Ka Khazana, Mile Na Dujhko Dobara Guruji
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