सच्चा सुख और शांति बाहरी धन-दौलत में नहीं बल्कि मन की निर्मलता संतुलन और आत्मा की गहराई में निहित है।यह गीत सोना चांदी और विभिन्न रंगों के माध्यम से जीवन के बाहरी आकर्षण और आंतरिक सत्य को समझाती है। सोना धन वैभव और समृद्धि का प्रतीक है जबकि चांदी शीतलता शांति और मन की पवित्रता को दर्शाती है। ये सभी बाहरी चीजें मन को आकर्षित करती हैं और क्षणिक सुख देती हैं लेकिन ये नश्वर और अस्थायी हैं क्योंकि इन रंगों और भौतिक वस्तुओं के मोह में फँसकर मनुष्य माया और भ्रम में पड़ जाता है जिससे वह सच्चे सत्य और आत्मिक शांति से दूर हो जाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,#देता समृद्धि संपन्नता धन दौलत सोना चांदी का, #Deta Smridhi Smpnnta Dhan Doulat Sona Chandi Kaa, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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सोने का ये रंग है अमरत वैभव और खुशहाली का
देता समृद्धि संपन्नता धन दौलत सोना चांदी का
चांदी का ये रंग हृदय को शीतल शुद्ध कर देता है
मन को करता निर्मल मईया तन में गूथा जाता है
कोमल कोमल ज्योति इसकी कोमल इसके तेज
उज्ज्वल कर दे तनमन को ये अजब इसकी है खेल
सुख शान्ति सन्तुलन देता दिल को ठंडक मिलती
हर लेती है दुख पीड़ा को जब पावों में सजती
सोने का ये रंग है अमरत वैभव और खुशहाली का
देता समृद्धि संपन्नता धन दौलत सोना चांदी का
जैसे राहत देती है गर्मी में ठनढ हवाएं आकर
वैसे शांति देती है चांदी मन भावना में छा कर
शुद्ध पवित्र निर्मल है स्वच्छ इसकी है कांति
दमक ज्योति का प्रकाश आभा हरदम शोभा देती
मन को साफ करती है सन्देह हटाती मन से
जगमग करती दिल को हँसी लाती है मुख पे
चांदी का ये रंग रूप बाहर का कोई खेल नहीं
अंतर मन का शीतल मन है निर्मलता का प्रेम यही
सोने का ये रंग है अमरत वैभव और खुशहाली का
देता समृद्धि संपन्नता धन दौलत सोना चांदी का
मन की शान्ति स्वच्छ होता जब चमके चारों ओर
रंग विरंगी स्वर्ण आभा रजत खिले चारों ओर
नीले नीले रंग जीवन को एक सन्देश सुनाता आता है
जीवन को उपयोगी करता मन में खुशियां भरता है
नश्वर रंगों को देखा जब आत्मा की गहराई से
मनोहारी की रूप दिखा मुझे लालच की जुदाई में
माया का वो जाल फैला था मोहकता ही छाई थी
पकड़ रखा था भ्रम ने दिल को चेहरा भी मुरझाई थी
सोने का ये रंग है अमरत वैभव और खुशहाली का
देता समृद्धि संपन्नता धन दौलत सोना चांदी का
सुन्दर मनहर खींच लेते है मन को मोहित करके
स्वर्ण रजत नीला हरा खींच लेते भ्रम भरके
जितने सुन्दर रंगों का ये रंग ह्रदय को भाता है
नश्वर है नाशवान ये रंग आत्मा को भटकता है
स्थाई नहीं है मोहित रंग जो दिलको इधर उधर कर देता
अपने रंगों में उलझाकर ये आत्मा को भरम से भर देता
माया जाल बुनता है ये तो मोह माया को लाता
असली सत्य से अलग करता है कितने रूप दिखाता
सोने का ये रंग है अमरत वैभव और खुशहाली का
देता समृद्धि संपन्नता धन दौलत सोना चांदी का
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