यह गीत वर्तमान समय की दुखद स्थिति और मानव जीवन में बढ़ती निराशा को दर्शाती है। कवि कहता है कि आज का समय इतना कठिन हो गया है कि उसे भुलाना संभव नहीं है क्योंकि चारों ओर अंधकार दुख और निराशा फैली हुई है समाज में संस्कार प्रेम और नैतिकता समाप्त होते जा रहे हैं और उनकी जगह धन स्वार्थ और लालच ने ले ली है लोगों के जीवन से आशा उत्साह और आनंद खत्म हो चुके हैं जिससे जीवन बोझ जैसा लगने लगा है कवि यह भी महसूस करता है कि अब प्रकृति और आध्यात्मिकता की सुंदरता भी खो गई है और मनुष्य का ईश्वर तथा दिव्यता से संबंध कमजोर पड़ गया है अंततः कवि अपनी माँ को संबोधित करके अपनी पीड़ा व्यक्त करता है और बताता है कि यह समय ऐसा है जिसमें सुख-शांति और उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, आया ऐसा अब समय जो भुला ना पाता मैं , # Aaya Yesa Ab Samay Jo Bhula Naa Pata, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
# Aaya Yesa Ab Samay Jo Bhula Naa Pata
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
आया ऐसा अब समय जो भुला ना पाता मैं
दिखता आँखो के जो सामने वो रुला ना पाता है
अम्बर का प्रकाश क्या है देवता का संगीत क्या
लगता है सब खत्म हुआ है सृष्टि सिद्धान्त क्या
चारों ओर उदासी छाई निराशा फैलाकर
निचोड़ दिया है दुनियां को अब मलीनता फैलाकर
आशा और आनंद शक्ति लुप्त हुए है जीवन से
चारों ओर अंधेरा छाया प्रदूषण की वेला में
आया ऐसा अब समय जो भुला ना पाता मैं
दिखता आँखो के जो सामने वो रुला ना पाता है
ऐसा समय आया है जग में कैसे तुझे बताऊं
सीना फाड़ दिखाऊं की माँ दिल चीरकर समझाऊं
बची नहीं अब आश किरण की सुख शान्ति सब खत्म हुई
उत्साह उमंग को मारा ऐसा जैसे जीवन पतन हुई
चारों ओर दुख निराशा छाया है चाहत की दीवारों पे
बिक गया संस्कार यहां पे दौलत के किनारों पे
ऐसा कठिन समय है मईया जैसे सारी खुशियां नष्ट हुई
खत्म हुई उम्मीद जीवन से सारी जीवन जंग हुई
आया ऐसा अब समय जो भुला ना पाता मैं
दिखता आँखो के जो सामने वो रुला ना पाता है
जगह जगह दुख छाए है दौड़ निराशा आए है
चारों ओर फैलकर जंग अपने खुद मुस्काते है
मार्गदर्शन अब देता कौन माँ कौन पूछता हाल
कौन देता उत्साह जीवन में कौन देता प्रकाश
जीवन की मधुरता क्या है क्या है शक्ति और आनन्द
कैसा होता दिव्यता जीवन कैसा होता ज्ञान
बेहतर से बेहतर लोग अब रोते और बिलखते है
आंखो का काजल धोकर के अब जीवन डगर से कहते हैं
आया ऐसा अब समय जो भुला ना पाता मैं
दिखता आँखो के जो सामने वो रुला ना पाता है
टूट गई सब आशा जीवन से जो आसमान में दिखते थे
प्रकाश दृष्टि की श्रृंखला टूटा जो ध्यान बनकर रहते थे
छाया है अंधकार चारों ओर दिखाता ना कहीं आसमा में
देवताओं की सुन्दर वाणी अब दिखती ना तारों में
मधुर गीत संगीत सब रुक गए है ऐसा मुझको लगता है
निराश होकर सब देवता कहते ऐसा मुझको दिखता है
दुनियां की सुंदरता अब दिखती ना इस जग में
समाप्त हुई आनन्द यहां पे दौलत के चौखट पे
आया ऐसा अब समय जो भुला ना पाता मैं
दिखता आँखो के जो सामने वो रुला ना पाता है
गीत =} #आया ऐसा अब समय जो भुला ना पाता मैं
# Aaya Yesa Ab Samay Jo Bhula Naa Pata
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी
_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें