जीवन की कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि वही हमें एक सुंदर और मजबूत व्यक्तित्व में ढालती हैं क्योंकि यह गीत जीवन के संघर्षों और कठिनाइयों को पत्थर को तराशकर मूर्ति बनाने की प्रक्रिया से तुलना करता है। कवि बताते हैं कि जैसे मूर्तिकार पत्थर पर चोट करके उसे सुंदर रूप देता है, वैसे ही जीवन की समस्याएँ, दुःख और बाधाएँ इंसान के व्यक्तित्व को निखारती हैं। कठिन परिस्थितियाँ हमें डराती जरूर हैं, लेकिन वही हमें मजबूत, अनुभवी और परिपक्व बनाती हैं। हर संघर्ष एक सीख देता है और जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाता है।गीत के माध्यम से माँ को आंतरिक शक्ति और प्रेरणा का प्रतीक बताया गया है, जो हमें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का साहस देती है। भावपूर्ण, जीवन-दर्शन से भरी और अनुभवों की गहराई को दर्शाने वाली, आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन रचना,सुने ना कोई इसको दिल से बड़ी तूफ़ानी बोले माँ, #Suno Na Koi Isko Dil Se Badi Tufaani Bole Maa, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Suno Na Koi Isko Dil Se Badi Tufaani Bole Maa
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मेरे दिल की कहानी बेजूबानी बोले माँ
सुने ना कोई इसको दिल से बड़ी तूफ़ानी बोले माँ
पत्थर की मूर्त के जैसा जीवन की ये सूरत है
चोटों ने तराशा इसको सुन्दर इसकी मूरत है
जटिल जटिलता संकट ने संघर्षों को पेठाया
सुन्दर सुन्दर रूप सजाकर परेशानियों को लाया
बाधा अड़चन आते थे आपत्ति को पेठाते थे
मुश्किल भरी राहो से सब जीवन को रुलाते थे
संग्राम लड़ी जब जीवन से हथौड़ा चोट मारा
मूर्तिकार के जैसा तराश दिया है सुन्दर रूप दिया
मेरे दिल की कहानी बेजूबानी बोले माँ
सुने ना कोई इसको दिल से बड़ी तूफ़ानी बोले माँ
जीवन की परेशानियों में जब दुःख का चुनौती है
मजबूत बनाता अनुभव को एक भावी अनुभव देता है
गढ़ता है खूबसूरत मूर्ति जिसकी मूल्य अमोल है
कमियों को तराशा ऐसे जैसे कोई योग हो
उत्तम और मजबूत बनाकर अनुभव से सजाया
तैयार किया जब प्रौढ पुख्तको बुद्धि ज्ञान पठाया
बार बार कहता है मुझसे घबराना ना बाधा से
व्यक्तित्व निखारता आकर ये विपत्ति की साझा से
पत्थर की मूर्त है जीवन बिना चोट तराशे ना
जीवन की गहराई को बिना सत्य के आंके ना
मेरे दिल की कहानी बेजूबानी बोले माँ
सुने ना कोई इसको दिल से बड़ी तूफ़ानी बोले माँ
जीवन को मजबूत बनाता आता जब विपत्ति
करता है तुलना पत्थर से छेनी और हथौड़ी
जीवन को मूर्ति के जैसा गढ़ता जाता खुद से
तराश देता उन कमियों को जो दरबदर सुख से
बाधाओं की चोटों से तराश देता है तन मन को
सुन्दर मूर्ति गढ़ता जब काट देता बंधन को
मानव जीवन का एक ऐसा खेल खिलाड़ी चलता
संघर्षों के अनुभव से चोट ही उसे निखारता
व्यक्ति का व्यक्तित्व सजाता जब जब दुख आता है
सुख गठरी साथ ले आता रास्ता खुद दिखाता है
मेरे दिल की कहानी बेजूबानी बोले माँ
सुने ना कोई इसको दिल से बड़ी तूफ़ानी बोले माँ
जीवन की परेशानियों में जब संकट अपना रूप दिखाता
असफलता सामने दिखती कष्ट घेरकर आता
दुःख चुनौती आती है जब पल पल विचलित करती
लगता है गढ्ढे में डालकर जीवन को हर लेगी
मन को भ्रमित करती है इधर उधर दौड़ा कर
समझ ना आता रूप इसका रास्ता भटक जाता
सुन्दर सुन्दर रूप दिखाकर इधर उधर विशलाती
मार देती है तन मन को टेडी राह बताती
अजीब डरावनी रूप सजाती जैसे गरजे बादल
दिखता ना स्वरूप उसका जैसे चमके बिजली
मेरे दिल की कहानी बेजूबानी बोले माँ
सुने ना कोई इसको दिल से बड़ी तूफ़ानी बोले माँ
गीत=} #सुने ना कोई इसको दिल से बड़ी तूफ़ानी बोले माँ
#Suno Na Koi Isko Dil Se Badi Tufaani Bole Maa
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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