मनुष्य को धन के घमंड से दूर रहकर अच्छे चरित्र और विनम्रता के साथ जीवन जीना चाहिए क्योंकि धन सत्ता और वैभव स्थायी नहीं होते। आज जो व्यक्ति धनवान और शक्तिशाली है वह समय के बदलने पर गरीब या साधारण भी हो सकता है। धन का घमंड मनुष्य को अहंकारी और मूर्ख बना देता है जिससे उसका जीवन दुख और अकेलेपन से भर जाता है दौलत किरायेदार की तरह है जो एक जगह स्थायी नहीं रहती और समय के साथ बदलती रहती है। इसलिए मनुष्य को धन पर घमंड नहीं करना चाहिए। मानव जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति चरित्र, दया, करुणा और अच्छे कर्म हैं। यही गुण मनुष्य को सच्चा सुख, शांति और सम्मान दिलाते हैं। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है, #Bankar Jogi Jag Mein Doulat Jamaana Rakhta Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 गीत =} #बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है

#Bankar Jogi Jag Mein Doulat Jamaana Rakhta Hai

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      गुरुवर धनवानों को देखो अब अफसाना लिखता है

          बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है

         जो भी आज मालिक है वो नौकर हो सकता है 

           धन के घमंड में गुरुवर शातिर हो सकता है

             दबदबा हुकूमत जब चूर चूर हो जाएगा 

          फूल सा मुरझा कर वो जमी पर गिर जाएगा

           पैसे का घमंड जब अपना रूप दिखाता है 

             पागल बनाकर तन मन नाश कर देता है

       गुरुवर धनवानों को देखो अब अफसाना लिखता है

          बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है


              जिंदगी में तीन चीजें स्थाई नहीं होती

           बार बार बदलती है घर तन्हाई नहीं होती

              जैसे किरायेदार घर बदलते रहता है 

              वैसे बदले दौलत धन चलते रहता है

          धन समाप्ति जब देखा मैं कीमती वस्तु को

             कोई ना सुकून देता दिल की घड़ी को

             कहता है दिल मेरा ये अजीबे नशा है

           मिलता किराए पर जो दिखता अपना है

     गुरुवर धनवानों को देखो अब अफसाना लिखता है

         बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है


          सत्ता पैसा रुतबा सब वक्त पर बदलते है

       समय को आने पर गुरुवर हाथ से निकलते है

          जैसे किरायेदार घर में रहता है आकर

             खाली कर जाता मसर्रफ बनाकर 

        जो आज ऊपर है वो कल नीचे हो जाएगा 

   जिसके आगे झुकते है लोग वो अकेला हो जाएगा

             धन का घमंड अब मूर्खता बताता 

          जीवन दरबदर करता आंखों को रुलाता

    गुरुवर धनवानों को देखो अब अफसाना लिखता है

       बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है


        मानव जीवन का सबसे बहुमूल्य है चरित्र 

            करुणा विवेक दया कर्म ही पवित्र 

           घर ना बदलता ये तो आत्मा बदलता 

      सुख शान्ति संयम देता जीवन को निखारता 

         वक्त का है खेल सब खेलता मानव से

       खुद को मालिक साझे देखता प्याली से

             मन बड़ा चँचल है सब कुछ मांगे

        धन दौलत वैभव मांगे खालीपन को डांटे 

  गुरुवर धनवानों को देखो अब अफसाना लिखता है

       बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है

गीत =} #बनकर जोगी जग में दौलत जमाना रखता है

#Bankar Jogi Jag Mein Doulat Jamaana Rakhta Hai

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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टिप्पणियाँ

मेरी हृदय मेरी माँ

संघर्ष संतुलन और अवसर की खोज जीवन अवसर नहीं, चेतना की यात्रा, Sangharsh Santulan Aur Avasar Ki Khoj Jeevan Avasar Nahin, Chetna ki Yatra,

यह गीत माँ की महिमा, त्याग, प्रेम और शक्ति का भावपूर्ण वर्णन करती है। कवि बताता है कि माँ ही उसकी सबसे बड़ी रक्षक और प्रेरणा स्रोत है। संसार के तीर-तलवार, दुख-कष्ट और स्वार्थी लोगों का व्यवहार उसे विचलित नहीं कर सका, क्योंकि माँ के संस्कार और आशीर्वाद उसके साथ हैं माँ ने उसे कठिन परिस्थितियों में तपाकर मजबूत बनाया, ज्ञान दिया, साहस दिया और सही मार्ग पर चलना सिखाया। जब दुनिया स्वार्थ से भरी दिखाई देती है और कठिन समय में कोई साथ नहीं देता, तब माँ ही सच्ची सहारा बनती है। कवि माँ को देवी, शक्ति और ईश्वर का स्वरूप मानता है तथा उसके चरणों में समर्पित होकर कृतज्ञता व्यक्त करता है।माँ का प्रेम निष्काम, अटूट और जीवन का सबसे बड़ा आधार है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #मेरी मईया तू बनाई मुझको फूल दिल के, #Meree Maiya Too Banaee Mujhako Phool Dil Ke, #Halendra Prasad,

यह गीत मनुष्य के मन की उस स्थिति का चित्रण करती है जहाँ वह इच्छाओं, कामनाओं और भौतिक लालसाओं के भ्रम में फँसकर अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाता है। चाहत और मोह में डूबकर वह सही-गलत का विवेक खो देता है और आत्मा से दूर हो जाता है। कवि बताता है कि संसार सुंदर है, परंतु मनुष्य की अतृप्त इच्छाएँ उसे भटकाती रहती हैं। दौलत, वासना और महत्वाकांक्षा के पीछे भागते-भागते वह सच्चे सुख और शांति से वंचित रह जाता है। जब मनुष्य एकांत, साधना और आत्मचिंतन की ओर मुड़ता है, तब उसे भीतर की दिव्यता और परम सत्य का अनुभव होता है। बाहरी दृष्टि भौतिक जगत को देखती है, पर आंतरिक दृष्टि ही वास्तविक सत्य को पहचानती है क्योंकि सच्चा सुख और शांति बाहरी चाहतों में नहीं, बल्कि आत्मबोध और भीतर के प्रकाश को पहचानने में है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, घिरा है चाहत के भरम में अब शरम भी ना आता, #Ghira Hai Chahat Ke Bharam Men Ab Sharam Bhi Naa Aata, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

हिन्दी रोमांटिक गीत, मिटाले दाग को दिल से, Hindi Romantic Geet, Meetale Daag Ko Dil Se,

बसंत पंचमी मातादी भक्ती गीत, Basant Panchami Matadi Bhakti Geet, सरवस्वती महालक्ष्मी बुद्धि के बुद्धादात्री, Saravasvatee Mahaalakshmee Bbuddhi Ke Buddhaadaatree, Writer ✍️ Halendra Prasad,

मनुष्य इस संसार में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है। धन, रूप, नाम और पद जैसी बाहरी चीजें स्थायी नहीं हैं जीवन में घमंड करना व्यर्थ है जीवन में समय-समय पर कठिनाइयाँ और परीक्षाएँ आती रहती हैं। इन्हीं परिस्थितियों में सही कर्म, अच्छा चरित्र, करुणा और साधना ही मनुष्य को सच्ची शांति और संतोष देती है।संसार की चमक-दमक केवल एक क्षणिक भ्रम माया है, जो मनुष्य को आकर्षित तो करती है लेकिन स्थायी सुख नहीं देती। अंत में मनुष्य के साथ केवल उसके कर्म और उसका चरित्र ही चलते हैं।इसलिए हम अहंकार, मोह और दिखावे से दूर रहकर सच्चाई, सेवा और सद्कर्म का मार्ग अपनाए। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,यही से यही तक है जीवन का सफर, #Yahi Se Yahi Tak Hai Jivan Ka Safar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना, माँ शक्ति का दिव्य स्वरूप माँ शक्ति की महिमा, Maa Shakti ka Divya Swaroop aur Maa Shakti ki Mahima

मनुष्य का शरीर नश्वर है और अंत में राख बन जाता है, लेकिन उसके भीतर की आत्मिक चेतना और ऊर्जा अमर होती है। साधना और आत्मज्ञान की अग्नि से मनुष्य अपने अहंकार, घमंड और भय को जला देता है। जब साधक इन बंधनों से मुक्त हो जाता है, तब वह भीतर से स्वतंत्र शांत और जागृत हो जाता है। संसार उसे पागल समझ सकता है पर वास्तव में वह आत्मिक सत्य को प्राप्त कर चुका होता है। यही अवस्था सच्ची मुक्ति और आंतरिक स्वतंत्रता की है।जिसे आत्मज्ञान वैराग्य अहंकार त्याग और आत्मा की स्वतंत्रता का संदेश कहते है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मेरे गर्मी से गतिमान है कण मैं राख में रहत, #Mere Garmi Se Gatimaan Hai Kan Main Raakh Mein Rehta, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

यह गीत मनुष्य के हृदय की संवेदनशीलता, प्रकृति से जुड़ाव और प्रेम-करुणा के महत्व को व्यक्त करता है। यह गीत बताता है कि मनुष्य का दिल प्रेम, करुणा और जागरूक भावनाओं से भरा होता है। संवेदनशील हृदय प्रकृति की सूक्ष्म सुंदरता जैसे फूलों की खुशबू, हवा की सरसराहट और चिड़ियों की चहचहाहट को गहराई से महसूस करता है। कुदरत हमेशा एक सच्चे साथी की तरह हमारे साथ रहती है, लेकिन उसे महसूस करने के लिए मन में दया प्रेम और सकारात्मक दृष्टि होना जरूरी है। जब मन करुणा से भर जाता है तब इंसान दूसरों के दुख-सुख को समझने लगता है और प्रकृति के साथ उसका आत्मीय संबंध बन जाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे, #Jagruk Bhavna Se Bhara Hai Dil Ka Pyaar Jaane Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,