यह गीत मनुष्य के हृदय की संवेदनशीलता, प्रकृति से जुड़ाव और प्रेम-करुणा के महत्व को व्यक्त करता है। यह गीत बताता है कि मनुष्य का दिल प्रेम, करुणा और जागरूक भावनाओं से भरा होता है। संवेदनशील हृदय प्रकृति की सूक्ष्म सुंदरता जैसे फूलों की खुशबू, हवा की सरसराहट और चिड़ियों की चहचहाहट को गहराई से महसूस करता है। कुदरत हमेशा एक सच्चे साथी की तरह हमारे साथ रहती है, लेकिन उसे महसूस करने के लिए मन में दया प्रेम और सकारात्मक दृष्टि होना जरूरी है। जब मन करुणा से भर जाता है तब इंसान दूसरों के दुख-सुख को समझने लगता है और प्रकृति के साथ उसका आत्मीय संबंध बन जाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे, #Jagruk Bhavna Se Bhara Hai Dil Ka Pyaar Jaane Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 गीत =} #जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे 

#Jagruk Bhavna Se Bhara Hai Dil Ka Pyaar Jaane Re.

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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     की कोमल कोमल ये दिलवा दिल का हाल जाने रे 

     जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे 

    कुदरत की सूक्ष्म अनुभव को समझ लेता ये दिल से

      देख ना पाता मन कुदरत को वस्तु की निगाह से

         दिल कुदरत को बोला मेरा कुदरत जीवंत है

         आत्मा के साथी के जैसा अनुभव करता है

      भावुकता करुणा है इसमें परोपकार की भावना 

     दूसरों के दुख समझ लेता है दर्दों की सब घऊआ 

    की कोमल कोमल ये दिलवा दिल का हाल जाने रे 

     जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे 


       मन मेरा कहता है मुझसे सुन मेरी तू बात जरा

       सूर्य ज्योति की जैसा है संवेदन की प्यार यहां 

     फूलों की गंधों को देख जगमग जगमग करते है 

    खुशबू को फैलाकर जग में खुशियां दिल में भरते है

        गीत गाती जब पवन बयारे सरसराहट होती

        गूंज जाता चिड़ियों का बोली चहचहाट होती

    मौन संवाद से देख जरा तू इन कुदरत की बाणी को

   अपना ही लगती है कुदरत दिल की रूप जवानी को

     की कोमल कोमल ये दिलवा दिल का हाल जाने रे 

     जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे 


         लगता पराया नाही अपना ही ये साथी है

        बल बुद्धि शक्ति देता अपना ही आश्वासन है

        स्वयं ना बदलता कुदरत मन भी बदलता है

         देखने की दृष्टि से महसूस भी बदलता है

        करुणा में डूबता जब मन दया बरसाता है

         दिलवों का दुख मनवा आंखों से गिराता है 

          मिलता है कुदरत भी पास भाव में आकर 

          निकट में रहता है मौजूद दिल में समाकर 

     की कोमल कोमल ये दिलवा दिल का हाल जाने रे 

     जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे 


         आत्म कहता मेरा दिल को दिल से तौल के

         मानव और कुदरत के बीच गहराई है दौर के

         व्यक्त करता है ये आत्मीय भावनात्मक को

          दिल से बताता है कुदरत की संवेदना को

      हृदय के लिए कुदरत मित्र बनकर रूप में आता 

             साथ सदा रहता है दिल को बहलाता 

             बाहें फैलकर ये चुप चाप खड़ा होता

             दिल में सहारा भरता दिल में ही रहता 

    की कोमल कोमल ये दिलवा दिल का हाल जाने रे 

     जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे 

गीत =} #जागरूक भावना से भरा है दिल का प्यार जाने रे 

#Jagruk Bhavna Se Bhara Hai Dil Ka Pyaar Jaane Re.

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टिप्पणियाँ

मेरी आशिक़ी मेरी माँ

यह गीत माँ की महिमा, त्याग, प्रेम और शक्ति का भावपूर्ण वर्णन करती है। कवि बताता है कि माँ ही उसकी सबसे बड़ी रक्षक और प्रेरणा स्रोत है। संसार के तीर-तलवार, दुख-कष्ट और स्वार्थी लोगों का व्यवहार उसे विचलित नहीं कर सका, क्योंकि माँ के संस्कार और आशीर्वाद उसके साथ हैं माँ ने उसे कठिन परिस्थितियों में तपाकर मजबूत बनाया, ज्ञान दिया, साहस दिया और सही मार्ग पर चलना सिखाया। जब दुनिया स्वार्थ से भरी दिखाई देती है और कठिन समय में कोई साथ नहीं देता, तब माँ ही सच्ची सहारा बनती है। कवि माँ को देवी, शक्ति और ईश्वर का स्वरूप मानता है तथा उसके चरणों में समर्पित होकर कृतज्ञता व्यक्त करता है।माँ का प्रेम निष्काम, अटूट और जीवन का सबसे बड़ा आधार है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, #मेरी मईया तू बनाई मुझको फूल दिल के, #Meree Maiya Too Banaee Mujhako Phool Dil Ke, #Halendra Prasad,

यह गीत मनुष्य के मन की उस स्थिति का चित्रण करती है जहाँ वह इच्छाओं, कामनाओं और भौतिक लालसाओं के भ्रम में फँसकर अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाता है। चाहत और मोह में डूबकर वह सही-गलत का विवेक खो देता है और आत्मा से दूर हो जाता है। कवि बताता है कि संसार सुंदर है, परंतु मनुष्य की अतृप्त इच्छाएँ उसे भटकाती रहती हैं। दौलत, वासना और महत्वाकांक्षा के पीछे भागते-भागते वह सच्चे सुख और शांति से वंचित रह जाता है। जब मनुष्य एकांत, साधना और आत्मचिंतन की ओर मुड़ता है, तब उसे भीतर की दिव्यता और परम सत्य का अनुभव होता है। बाहरी दृष्टि भौतिक जगत को देखती है, पर आंतरिक दृष्टि ही वास्तविक सत्य को पहचानती है क्योंकि सच्चा सुख और शांति बाहरी चाहतों में नहीं, बल्कि आत्मबोध और भीतर के प्रकाश को पहचानने में है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, घिरा है चाहत के भरम में अब शरम भी ना आता, #Ghira Hai Chahat Ke Bharam Men Ab Sharam Bhi Naa Aata, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

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