माँ का प्रेम अमूल्य होता है जो जीवन के अंधकार को दूर करके बच्चे को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाता है। माँ के प्रेम त्याग और प्रेरणा की महिमा का वर्णन कहता है कि जीवन के संघर्षों और कठिनाइयों में मै कई बार निराश और बुझा हुआ महसूस करता था दुनिया की परेशानियाँ हमें कमजोर बना देती हैं लेकिन मेरी माँ मुझे हिम्मत विश्वास और प्रेम देकर फिर से आगे बढ़ने की शक्ति देती है। माँ का स्नेह मेरे जीवन में दीपक की तरह प्रकाश फैलाता है और मुझे घर का चिराग बनाकर माँ की ममता से मेरे हृदय में आशा उत्साह और नया जीवन जाग उठता है माँ ही बच्चे के जीवन की सबसे बड़ी शक्ति और मार्गदर्शक होती है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मेरी मईया मुझे बनाई है घर की चिराग माँ, #Meri Miya Mujhe Banai Hai Ghar Ki Chirag Maa, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मैं बुझा बुझा सा रहता हूँ दुनियां की समन्दर में माँ
मेरी मईया मुझे बनाई है घर की चिराग माँ
कमजोर समझकर मुझे रुलाया इस दुनियां की दंगल ने
माँ का प्रेम अमूल्य बनाया इस दुनियां की जंगल में
उज्ज्वल समर्थ बहुमूल्य बनाया तन मन को तपाया
महत्वपूर्ण कीमती दिल को उसने स्वयं जगाया
विश्वास की दीप है माता अंतिम रूप में आती है
अंधेरों की आंधियों से खींचकर ज्योति जीवन को जगाती है
मैं बुझा बुझा सा रहता हूँ दुनियां की समन्दर में माँ
मेरी मईया मुझे बनाई है घर की चिराग माँ
जीवन की इस अनुभव ने मुझे संघर्ष विफलता देता
थकान उदासी देकर मुझको खुशियां लेकर जाता
जिम्मेदारीयों ने उपजाया है आत्मिक सुस्ती जोर से
संकेत दिया थक जाने को दिल में रोग भरा था जोग से
बाहर से कुम्हल्या था दिल अन्दर से उदास था
भावना में चुप रहता था दिल दिल से आजाद था
देखा जब माँ को मैने हस दिया खिलखिलाकर
दृष्टि उसकी चिराग बनाई आँचल से नहलाकर
मैं बुझा बुझा सा रहता हूँ दुनियां की समन्दर में माँ
मेरी मईया मुझे बनाई है घर की चिराग माँ
आशा की प्रकाश में मैने खुद को उज्ज्वल देखा
सम्मान मिला मुझे ज्योति का बुझा हुआ दिल खोला
माँ का कथन बताता था मुझको ही बुलाता था
मानसिक से परे होकर के अस्तित्व जगाता था
समझ गया मै माँ कि प्रेम को हृदय में बसाकर
टूट जाऊ मैं कितना भी जोड़ दिया आकर
असफल ना होता माँ की ममता अमृत को बरसता है
जीवन का सब दीप जलाकर दिल को खूब हंसाता है
मैं बुझा बुझा सा रहता हूँ दुनियां की समन्दर में माँ
मेरी मईया मुझे बनाई है घर की चिराग माँ
करुणा माँ की दीप है वो जो रोशनी चमकाता है
घर परिवार को जीवन देता पत्थर को पिघलाता है
सच कहता है हृदय मेरा थक कर चकनाचूर हुआ
बुझा बुझा सा रहता था जो फूलों सा था खिला हुआ
उत्साह सजाकर दिल में खुशी जगाई माँ
चिराग बनाकर आँचल का मुझको लोरी सुनाई माँ
समझ गया मैं कि बाते बेटा उसकी शान है
आशा और भविष्य का जलता हुआ मशाल है
मैं बुझा बुझा सा रहता हूँ दुनियां की समन्दर में माँ
मेरी मईया मुझे बनाई है घर की चिराग माँ
गीत=} #मेरी मईया मुझे बनाई है घर की चिराग माँ
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