आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना, जीवन का झूला जन्म, मृत्यु और सद्गुणों की यात्रा Jeevan Ka Jhula: Janm Mrityu Aur Sadguono Ki Yatra
आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना, जीवन का झूला जन्म, मृत्यु और सद्गुणों की यात्रा Jeevan Ka Jhula: Janm Mrityu Aur Sadguono Ki Yatra
जीवन एक झूले की तरह है, जिसमें जन्म और मृत्यु का चक्र निरंतर चलता रहता है। सुख-दुःख, सफलता-असफलता जीवन के उतार-चढ़ाव हैं। सच्ची स्वतंत्रता और ज्ञान उस व्यक्ति में है जो भीड़ का अनुसरण न कर, अपने विवेक और सद्गुणों से जीवन को चमकाता है।
जीवन अनवरत परिवर्तनशील है, जन्म-मृत्यु का चक्र अवश्यंभावी है, और सच्ची सफलता, शांति और स्वतंत्रता केवल सद्गुणों और विवेक के मार्ग पर चलने से मिलती है।
ये संसार एक पालना की तरह झूला है जिसमें अन्तर आत्मा निरंतर हिलती-डुलती रहती है क्योंकि जन्म और मृत्यु का सागर जीवन चक्र का प्रतीक है और कभी जन्म मिलता है तो कभी मृत्यु आती है। इस जीवन चक्र से कोई भी बचा नहीं है हर जीव इस अनंत चक्र में झूले की माफिक झूलता रहता है ?
सृष्टि के इन्हीं दो सृष्टिविधानों के ध्रुवों के बीच जीवन अपनी गति से निरन्तर गति कर पाता है क्योंकि यह संसार सचमुच एक पालने-सा झूला है जिसमें हमारी अंतरात्मा निरंतर हिलती-डुलती रहती है कभी ऊँचाई को छूती है तो कभी नीचे आ जाती और कभी आरम्भ करती है तो कभी अन्त में विलीन हो जाती है
जिनके बीच हर जीव अपनी-अपनी लहरों पर यात्रा करता है वही जन्म और मृत्यु का सागर है क्योंकि जहाँ एक ओर जन्म नए आरंभ का द्वार खोलता है वहीं दसरी ओर किसी पूर्णता की अंतिम सीढ़ी पर चढ़ जाती है और ये दोनों ही जीवन के दो तट के कीनारे हैं जो जीवन को सुचारू रूप से संवारते और चलाते है जो जीवन चक्र का सबसे गम्भीर और सत्य का प्रतीक है।
जीवन का झूला हमें सिखाता है कि जीवन स्थिर नहीं बल्कि एक प्रवाह है एक यात्रा है और एक गतिमान सा एक अनंत लय है जहां निरंतर अनवरत अनियंत्रित कभी शांति से तो कभी वेग से सबके भीतर यह झूला डोलता रहता है इस अनंत चक्र से कोई भी मुक्त नहीं हो सकता न मनुष्य न पशु न वृक्ष न कोई अन्य जीवित सत्ता।
जीवन के उतार-चढ़ावों का नाम ही जीवन है जहां उत्थान सफलता सुख और पतन असफलता दुख है क्योंकि जैसे झूला ऊपर-नीचे होता है वैसे ही जीवन कभी ऊपर जाता है और कभी नीचे आता है क्योंकि यही गतिशीलता जीवन को जीवन बनाती है और स्थिरता मृत्यु मुक्ति है जो जीवन को गति देती है।
जीवन निरंतर परिवर्तनशील है और जन्म और मृत्यु का चक्र अवश्यंभावी है उतार-चढ़ाव ही जीवन की वास्तविकता और सुंदरता हैं जो इस झूले की प्रकृति को समझ लेता है वह जीवन में शांत और स्थिर रहता है।
जो व्यक्ति दूसरों के कुमार्ग का अनुसरण नहीं करता वही अपने जीवन का मार्ग स्वयं रचता है। असली स्वतंत्रता और ज्ञान उसी में है जो बहती भीड़ के पीछे न चलकर अपने विवेक और अंतरात्मा की रोशनी में आगे बढ़ता है।
जो व्यक्ति सद्गुणों से सुसज्जित और गुणवान होता है वही अपनी क्षमता प्रतिभा और वरिष्ठता की उज्ज्वलता को निरंतर चमकाता रहता है जिसमें सद्गुणों से सुसज्जित गुणवान न हो वो अपनी क्षमता प्रतिभा और वरिष्ठता की उज्ज्वलता को नहीं चमका सकता क्योंकि सद्गुण ही व्यक्ति की प्रतिभा और वरिष्ठता की चमक को स्थायी बनाते हैं।
सद्गुणों से सुसज्जित व्यक्ति अपने गुणों की शक्ति से अपनी प्रतिभा संवारता है अपनी क्षमता और वरिष्ठता की उज्ज्वलता, वह निरंतर चमकाता रहता है जैसे सूरज अपनी किरणों से अंधकार मिटाता है वैसे ही व्यक्ति अप नेसद्गुणों से सुसज्जित प्रतिभा संवारता है!
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