जो व्यक्ति सत्य और ज्ञान के मार्ग पर चलता है वह निडर और आत्मविश्वासी बन जाता है। यह गीत बताता है कि मनुष्य के अंदर का डर अज्ञान, ज्ञान की कमी से पैदा होता है। जब उसे सत्य ज्ञान और आत्मबोध प्राप्त होता है, तब वह निडर, शांत और स्थिर हो जाता है। जैसे प्रकाश आने पर अंधकार अपने आप मिट जाता है, वैसे ही ज्ञान आने पर डर, भ्रम, झूठ, लोभ और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। सत्य कभी छुप नहीं सकता, वह हमेशा प्रकट होता है। आत्मज्ञान का प्रकाश मनुष्य के जीवन से दुख और भय को दूर करके उसे साहसी और मजबूत बनाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,डरता किसी से ना कब हूँ बड़ा दिल जिगर होता है, #Darata Kisee Se Na Kab hoon Bada Dil Jigar Hota hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad
#Darata Kisee Se Na Kab hoon Bada Dil Jigar Hota hai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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सत्य ज्ञान का आत्मबोध जब होता है तो निडर होता है
डरता किसी से ना कब हूँ बड़ा दिल जिगर होता है
जैसे जैसे आता है वो वैसे वैसे रहता
शान्त स्थिर रहता है निडर हो कर रहता
डरता अंधेरा है प्रकाश नहीं डरता
अपने उजाला से अंधकार दूर करता
जैसे अज्ञान झूठ भ्रम डर जाते है
लोभ और अहंकार में उलझकर मर जाते है
सत्य ज्ञान का आत्मबोध जब होता है तो निडर होता है
डरता किसी से ना कब हूँ बड़ा दिल जिगर होता है
जैसे प्रकाश आता है अंधकार मिट जाता
लड़ नहीं पाता वो तो दूर भाग जाता
जब ज्ञान की ओर बढ़ता है मानव डर भी घबराता है
भाग जाता है अन्तर मन से पत्थर को पिघलते
सत्य ऐसा है जैसे गंगा बहती है
ओपन करदे अज्ञान की बातें जैसे ज्ञान बरसती है
हरा ना सकता प्रकाश को कोई ज्योति के सागर में
बस होने का अधिकार दिखाता अंधकार की अपनी रोटी में
सत्य ज्ञान का आत्मबोध जब होता है तो निडर होता है
डरता किसी से ना कब हूँ बड़ा दिल जिगर होता है
सत्य मार्ग पर चलने वाला निडर होजाता जग में सारा
डरता ना अज्ञानी से छुप जाता अज्ञान यहां
आत्मज्ञान का ज्योति तेज बड़ा होता
शुद्ध स्पष्ट होता है पकवान नहीं होता
मानव के भीतर में कमजोरी डर जाती है
असत्य दिखावा करता है जब आँखें भी रो देती है
मानव के स्वभाव में हरदम ऐसा होता
अपना दोष वो देखे ना अच्छा नहीं लगता
सत्य ज्ञान का आत्मबोध जब होता है तो निडर होता है
डरता किसी से ना कब हूँ बड़ा दिल जिगर होता है
जब आत्म तेज की ज्योति सामने आती है
मोह लेती है मन के डर को जीवन से दूर भगाती है
सत्य कभी ना छुपता है झूठ के बादल से
देख ना पाते उसकी हम अपनी आंखों से
दुख ढाल अज्ञानी होता अज्ञान से ढक देता
देख ना पाते अपने भीत नजरे मोड देता
जब हट जाता है डर की छाया सब कुछ दिखने लगता
दिखता है प्रकाश जीवन दुख मिटने लगता
सत्य ज्ञान का आत्मबोध जब होता है तो निडर होता है
डरता किसी से ना कब हूँ बड़ा दिल जिगर होता है
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