प्रेम कोमल भी है और कभी पीड़ादायक भी परंतु उसकी पवित्रता और गहराई उसे जीवन का अनमोल अनुभव बनाती हैयह गीत प्रेम की कोमलता चंचलता और उसकी पीड़ा का सुंदर वर्णन करती है। यह गीत बताती हैं कि प्रेम बहुत नाजुक और संवेदनशील भावना है। यह मन में कोमल भाव करुणा और सुख का अनुभव कराता है लेकिन जब परिस्थितियाँ बदलती हैं या जुदाई आती है तो वही प्रेम हृदय को गहरा घाव भी दे देता है।गीत के अनुसार प्रेम का दर्द किसी दवा से ठीक नहीं होता क्योंकि यह मन और भावनाओं से जुड़ा होता है। सच्चा प्रेम वही व्यक्ति समझ सकता है जिसका हृदय कोमल और संवेदनशील होता है। प्रेम कभी खुशी देता है तो कभी पीड़ा और इसमें त्याग समर्पण तथा सहनशीलता भी आवश्यक होती है।अंत में गीत यह संदेश देते हैं कि प्रेम बहुत पवित्र और गहरा भाव है लेकिन इसे समझना और निभाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। जो व्यक्ति इसके सूक्ष्म भाव को समझ लेता है वही सच्चे प्रेम का अनुभव कर पाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल बदले रूप और स्वरूप पल पल घाव देता रे, #Badale Roop Aur Svaroop Pal Pal Ghaav Deta Re, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Badale Roop Aur Svaroop Pal Pal Ghaav Deta Re
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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नाजुक प्रेम की चंचलता कोमल भाव देता रे
बदले रूप और स्वरूप पल पल घाव देता रे
मरहम ना होता है इसका डॉक्टर की दवाई में
दर्द देता है भीतर भीतर ये टूटन की जुदाई में
कोमल होता करुणा होता सुकुमार होता है प्रेम यहां
आंखों में जब आशु देता काट देता है गला यहां
रंग बिरंगी श्याम होता है गोरा और घमंडी
धन दौलत के चक्कर में तोड़ देता दिल नरमी
नाजुक प्रेम की चंचलता कोमल भाव देता रे
बदले रूप और स्वरूप पल पल घाव देता रे
इन गुणों के कारण गुरुवर प्रेम पवित्र कहाता है
जब भावुक दिल कोमल होता तो संवेदनशील हो जाता है
निश्चल प्रेम को पाने को लोग बड़ी इतराते है
दिल में रहमत रखकर कभी कभी भटक जाते है
जिसका हृदय कोमल होता है वो सच्चा प्रेम को पाता
भूल जाता दुनियां में वो अपनी जीवन सजाता
इतना सूक्ष्म प्रेम यहां का जो समझा वो पाया
कोमल नाजुक इसकी आहट तारों को जगाया
नाजुक प्रेम की चंचलता कोमल भाव देता रे
बदले रूप और स्वरूप पल पल घाव देता रे
प्रेम जीतना कोमल है गुरुवर उतना निष्ठुर होता
जरा सी कठोरता से आहत पे रूश जाता
प्रेम तालाब ना नदी के जैसा बहता है
स्थिर ना होता है वो तो पल पल रंग बदलता है
चँचल भावना साथ रखता है इधर उधर वो जाता
कभी कभी वो हर्ष होता है कभी पीड़ा को लाता
कोमल और करुणा से भरा है मृदुल आशु का धार है
बरस जाता है सावन जैसा मतलब का भी यार है
नाजुक प्रेम की चंचलता कोमल भाव देता रे
बदले रूप और स्वरूप पल पल घाव देता रे
सुख सागर केवल ना है प्रेम दुख को भी लाता है
त्याग वेदना से भरा हुआ है खुशियां भी ले जाता है
ऊपर से सरल दिखता है अन्दर भाव विभोर है
व्याकुल रहता चाहत में इसका जीवन भी कमजोर है
कोमल प्रेम जब करुणा भर के आता है
धरती जैसा स्थिर होकर अपना विस्तार दिखाता है
पवित्र प्रेम की डोरी सबको ना मिल पाती
अडिग सच्चाई खो देती जब कितने घर रुलाती
नाजुक प्रेम की चंचलता कोमल भाव देता रे
बदले रूप और स्वरूप पल पल घाव देता रे
गीत=} #बदले रूप और स्वरूप पल पल घाव देता रे
#Badale Roop Aur Svaroop Pal Pal Ghaav Deta Re
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