के.औ.सु.ब. के 57वें स्थापना दिवस पर सभी वीर जवानों को हार्दिक शुभकामनाएँ। हम अपनी जन्मभूमि की सेवा, उसके उत्थान और संविधान में निहित कर्तव्यों के प्रति पूर्ण समर्पण का संकल्प लेते हैं। हमारा परम कर्तव्य है अपने देश की सुरक्षा, संरक्षण और समृद्धि सुनिश्चित करना। देशभक्ति अमूल्य रचना, जन्मभूमि के प्रण में सेवा और संकल्प, Anmbhoomi Ke Pran Mein Seva Aur Sankalp,
जय हिंद! जय भारत! जय के.औ.सु.ब.!
देशभक्ति अमूल्य रचना,जन्मभूमि के प्रण में सेवा और संकल्प, anmbhoomi Ke Pran Mein Seva Aur Sankalp
जिस धरती ने हमें जन्म दिया पाला-पोसा जीवन के साधन दिए और समाज में हमारी पहचान बनाई उस महान पवित्र भूमि को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।
हम अपनी माँ-भूमि की महानता उसकी समृद्ध संस्कृति और वीर बलिदानों को याद रखते हुए अपने देश का मान और सम्मान हमेशा बनाए रखने का संकल्प लेते हैं। इसी भावना के साथ हम अपने आप को अपनी जन्मभूमि की सेवा और उसके उत्थान के लिए समर्पित करते है।
हम अपनी भारतीय प्राकृतिक विविधता और संपदा के लिए विश्व में अद्वितीय है। और हम अपने देश के विधि द्वारा स्थापित संविधान के कर्तव्यों दायित्वों के प्रति अपने आप को समर्पित करते है।
हमारा भारत अपनी प्राकृतिक विविधता और संपदा के लिए विश्व में अद्वितीय है। हम अपने देश द्वारा स्थापित संविधान में निहित कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति स्वयं को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रतिबद्ध करते हैं।
हम अपनी जन्मभूमि की समृद्धि और संवैधानिक नियमों का सम्मान करते हुए, अपने देश की सेवा और उसके विकास के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं। हमारा संविधान ही हमारे देश का सर्वोच्च मार्गदर्शक है।
हम अपनी देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ अपने देश के उत्थान और विकास में योगदान देने को तैयार हैं हमारा परम कर्तव्य अपने देश की सुरक्षा और संरक्षण की समृद्धि है।
हम अपनी देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ अपने देश के उत्थान और विकास में योगदान देने के लिए सदैव तैयार हैं। हमारा परम कर्तव्य है अपने देश की सुरक्षा, संरक्षण और समृद्धि सुनिश्चित करना।
हम अपनी जन्मभूमि की महानता, उसकी समृद्ध संस्कृति और वीर बलिदानों को याद रखते हुए अपने देश का मान और सम्मान बनाए रखने का संकल्प लेते हैं। इसी भावना के साथ हम स्वयं को अपनी जन्मभूमि की सेवा और उसके उत्थान के लिए समर्पित करते हैं।
हमारा भारत अपनी प्राकृतिक विविधता और संपदा के लिए विश्व में अद्वितीय है। हम संविधान में निहित अपने कर्तव्यों और दायित्वों के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रतिबद्ध हैं।
हमारा परम कर्तव्य है अपने देश की सुरक्षा, संरक्षण और समृद्धि सुनिश्चित करना। देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ हम अपने देश के उत्थान और विकास में सदैव योगदान देने के लिए तैयार हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें