यह गीत जीवन के परिवर्तन आत्मचेतना और भगवान के रहस्य को समझने की एक आध्यात्मिक खोज को व्यक्त करता है।कवि इस गीत के माध्यम से भगवान से प्रश्न करता है कि वह पागल नहीं है बल्कि जीवन और चेतना के गहरे रहस्यों को समझने की कोशिश में भटक रहा है। संसार हर पल बदलता रहता है सुख-दुःख आशा-निराशा जन्म-मरण सब आते-जाते रहते हैं। मनुष्य बाहर की दुनिया को आँखों से देखता है लेकिन असली सत्य मन आत्मा और चेतना के भीतर छिपा है। यह जीवन कोई स्थिर चीज नहीं है बल्कि लगातार बदलने वाली प्रक्रिया है। जो व्यक्ति इस परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है और भीतर की चेतना को समझने का प्रयास करता है वही जीवन के सच्चे अर्थ को जान पाता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, भटका चेतना के सागर में ना मैं पागल भगवन, #Bhatka Chetna Ke Saagar Mein Na Main Paagal Bhagwan, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #भटका चेतना के सागर में ना मैं पागल भगवन #Bhatka Chetna Ke Saagar Mein Na Main Paagal Bhagwan Writer ✍️ #Halendra Prasad BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏 🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏 कि काहे लगती है मुझे कोमल भी कड़वाहट भगवन भटका चेतना के सागर में ना मैं पागल भगवन सृजनकर्ता भगवन मेरे एक बात मुझे समझाओ इस जीवन का जोग बताओ मुझको तुम समझाओ पल पल क्यों बदलते हो इस दुनियां को रंगते हो तह तह में जाकरके तुम तो गहरी ज्ञान बरसते हो कितने रूप में ढाल देते हो समझ नहीं मै पाता नया नया आख्यान तुम्हारा ध्यान नहीं मुझे आता कि काहे लगती है मुझे कोमल भी कड़वाहट भगवन भटका चेतना के सागर में ना मैं पागल भगवन रंगों का जो दृश्य दिखे मुझे रंग नहीं वो भावना है ...
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