यह गीत आज की दुनिया शंका, भ्रम और असमंजस में जी रही है। लोग सही-गलत का निर्णय नहीं कर पा रहे, विश्वास कमजोर हो गया है और झूठ का प्रभाव बढ़ गया है। सत्य का मूल्य घटता जा रहा है, जिससे जीवन कठिन और निराशाजनक प्रतीत होता है। चारों ओर अशांति, अव्यवस्था और भय का वातावरण है। सत्ता और शक्ति का प्रदर्शन तो है, परंतु नैतिकता और स्थिरता का अभाव है। जीवन अनिश्चितताओं से भरा हुआ है, मानो सागर की तरह गहरा और रहस्यमय हो। इसके विपरीत, बच्चों का निष्कपट और निश्छल मन यह संदेश देता है कि सच्ची शांति सरलता और विश्वास में है। समग्र रूप से, यह गीत गुरु से मार्गदर्शन की विनम्र प्रार्थना है, जिसमें कवि संसार की उलझनों से मुक्ति और सत्य के मार्ग की खोज करना चाहता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,झिझक दुनियां की कैसे मैं समझाऊं गुरुवर #Jjhijhak Duniyan Ki kaise main Samans Guruvar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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झिझक दुनियां की कैसे मैं समझाऊं गुरुवर
शक में घूमे शंका बनीके दिल फुहार गुरुवर
बड़ा संकोची है असमंजस दिल का उलझन
समझ नहीं पाता है विश्वासी दिल का सुलझन
भरम में उलझा है जैसे भरोसे का लायक ना
गलत को सही समझे सही को सही ना
बड़ा मतभेद करता गलत धोखा शंका
उलझ कर फंसा देता उलझन की देवता
दुविधा में जीता दुनियां निश्चय ना करता
शक का उपाय ना कोई ना तसल्ली ना करता
झिझक दुनियां की कैसे मैं समझाऊं गुरुवर
शक में घूमे शंका बनीके दिल फुहार गुरुवर
संकट और मृत्यु की छाया से भरी सारी दुनियां
सचका कोई भाव ना है झूठ पर अटकी है दुनियां
असलियत का आश है पर दिखता असल में ना
होता है जो भी वो दिखता है सच में ना
कठिन है जीवन यहां कठिन है जमाना
निराशा में जीता दुनियां निराशा जमाना
आसामान के जैसा जीवन मार्ग का ठिकाना ना
चलता है तूफ़ान बेग में रोकटोक का हवाला
भटकते भटकते दुनियां भंवर में भुला है
खोकर मन बुद्धि को शक दिल में अटका है
झिझक दुनियां की कैसे मैं समझाऊं गुरुवर
शक में घूमे शंका बनीके दिल फुहार गुरुवर
अशांति कोलाहलो ने अंधेरा को फैलाया
बड़ी गड़बड़ी कर हलचल मचाया
शान्ति स्थिरता ना है बड़ा शोर शराबा है
व्यस्था ना भाव है अभाव का बोलबाला है
विलाप की विद्रोहो ने परिवर्तन है लाया
सत्ता नियम को अब खाट पे सोलाया
दुनियां अनिश्चित में निश्चित को भुला
बेकाबू में होकर काबू को छोड़ा
मानता प्रतीक बल का शक्ति दिखाता है
आँखो पे चश्मा डालकर सच छुपाता है
झिझक दुनियां की कैसे मैं समझाऊं गुरुवर
शक में घूमे शंका बनीके दिल फुहार गुरुवर
सागर की सच्चाई भी तो अजबे निराली है
निशान का कोई नाम ना जहाज को डुबाती है
जीवन दरबदर है यहां कुछ ना अस्पष्टता है
मिलता संकेत को ना जोखिम का घर है
चारों ओर विनाश फैला मृत्यु का आवरण का
घेरा है संकट मनकों मन के दुष्कर्मों का
बच्चों की खुशियां देख के मन खुश होता है
दुनियां में खेल का आनन्द ले रहा है
ना खतरों को देखता ना दुनियां को देखता
निश्छल मन से हंसता विपत्ति ना देखता
झिझक दुनियां की कैसे मैं समझाऊं गुरुवर
शक में घूमे शंका बनीके दिल फुहार गुरुवर
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