यह गीत एक कोमल भावुक और करुणामय हृदय की महिमा का वर्णन करती है कि सच्चा हृदय केवल अपने दुःख से नहीं बल्कि दूसरों की पीड़ा से भी पिघल जाता है। वह छोटी-छोटी बातों से प्रभावित होता है और प्रेम व करुणा की गहराई को सहज समझ लेता है। ऐसा हृदय छल-कपट से दूर रहकर जीवन के सुख-दुःख को स्वीकार करता है। निर्मल और निश्चल प्रेम आत्मा की भाषा है, जिसे शब्दों से अधिक अनुभव किया जाता है। हृदय की सच्चाई आँसुओं और मौन में झलकती है। ईश्वर ही जीवन की डोर संभालते हैं और जब मनुष्य अहंकार व भय छोड़कर प्रेम और करुणा को अपनाता है तभी उसे सच्ची शांति और सुख प्राप्त होता है। क्योंकि मानव जीवन का वास्तविक सौंदर्य कोमल दयालु और प्रेमपूर्ण हृदय में ही निहित है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, भरा है चंचल भावुक करुणा से बख़ूब गुरुजी, #Bhara Hai Chanchal Bhaavuk Karuna Se Bakhoob Gurujee, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Bhara Hai Chanchal Bhaavuk Karuna Se Bakhoob Gurujee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
दिलवा कितना कोमल कितना है नाजुक गुरुजी
भरा है चंचल भावुक करुणा से बख़ूब गुरुजी
आंसू केवल दुःख के ना है करुणा प्रेम से आते है
दर्द समझता अपना वो दूसरों पर पिघल जाता है
छोटी छोटी बातों से मुताशिर हो जाता
प्रेम पीड़ा की गहराइयों को जल्दी समझ जाता
महसूस करता सौन्दर्य कीमत को हृदय कठोर ना होता
दूसरों की भावनाओं को वो खुलकर सपोर्ट करत
दिलवा कितना कोमल कितना है नाजुक गुरुजी
भरा है चंचल भावुक करुणा से बख़ूब गुरुजी
स्वीकार करता जब दुःख को दुःख ही रास्ता देता
गहरी नीद की शान्ति में दिल खोलकर सोता
जैसे गहरी दिखता है वैसे दिल चलता
नरम नरम घासों के जैसा अपना रूप बदलता
हृदय भरा है चंचलता से भीतर कितनी रोष है
गंभीर हृदय से भरा है दिल दिल में कितनी चोट है
राेनेवाला दिल दयालु कोर कपट ना रखता
जीवन की गहराइयों जीवन को स्वीकार करता
दिलवा कितना कोमल कितना है नाजुक गुरुजी
भरा है चंचल भावुक करुणा से बख़ूब गुरुजी
मासूम बना है जीवित हृदय निर्दोष प्रेम ने बोला
काजल कलाई से वो अन्तर मन को खोला
गूढ़ सत्य को समझ लिया जब गम्भीरता की डोरी से
कैसा प्रेम की नैया भगवन दर्द दिया है भोली से
निश्चल शुद्ध हृदय की भाषा समझ नहीं अब आता
मौन बना है आत्मा दिल का दिल से ही चल पाता
भाव दर्शन से भरी है आँखें आंखों से अब निर बहे
दर्द छुपा है दिल के अन्दर दिल के ही सब रोग कहे
दिलवा कितना कोमल कितना है नाजुक गुरुजी
भरा है चंचल भावुक करुणा से बख़ूब गुरुजी
पावन प्रेम निश्चल है करुणा जीवन की आवाज में
मन आत्मा की वर्णन कहता देख जरा तू प्यार से
परम शक्ति है ईश्वर दिल का जीवन का बागडोर संभाला
खुश रखता है हृदय को भगवन समझ नहीं कोई पता
कोमल भाऊक हृदय की गतियां सबको सुख दिलाती
सच्चे प्रेम को प्राप्त करती है आहट दिल में आती
अजीब मानव का दुःख है भगवन दुख दूर नहीं हो पाता
अहंकार भय की ज्योति ने दिल को अजीब रुलाता
दिलवा कितना कोमल कितना है नाजुक गुरुजी
भरा है चंचल भावुक करुणा से बख़ूब गुरुजी
गीत =} #भरा है चंचल भावुक करुणा से बख़ूब गुरुजी
#Bhara Hai Chanchal Bhaavuk Karuna Se Bakhoob Gurujee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें