इस गीत के माध्यम से कवि सूर्यास्त के सुंदर दृश्य को जीवन की गहराई को समझाया कर पूरे दिन भर की रोशनी, ऊर्जा और गतिविधियाँ सूर्य के साथ ही सिमट जाती हैं और संध्या शांति का संदेश देती है।रात का अंधेरा मन में भय और अस्थिरता पैदा करता है, लेकिन यह हमें अपने कर्म, आत्मचेतना और ईश्वर की कृपा को याद दिलाता है। कवि ने जीवन के उतार चढ़ाव, परिवर्तन और घबराहट आते हैं, पर हर रात के बाद भोर ज़रूर होती है आशा, प्रकाश और नई शुरुआत हमेशा लौट आती है।भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है, Suraj Chala Apne Ghar Ko Dil Bator Liya Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है
#Suraj Chala Apne Ghar Ko Dil Bator Liya Hai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की देखो दिन भरका संगीत अब समेट लिया है
सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है
बिखरी हुई लालिमा को आसमा में फैलाया
जैसे दिखता रक्त राग कलाकार ने बनाया
फैली हुई रूप को स्वरूप में दिखाकर
गरुण जैसे पंख को विस्तार में सजाया
चम चम चमके ऐसे जैसे दिव्य प्रहरी है
दे रहा है पहरा ऐसे जैसे स्वर्ग में डहरि है
की देखो दिन भरका संगीत अब समेट लिया है
सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है
साम का ये सुन्दर दृश्य मन को मेरे भाता
शक्ति और विराट का शान्ति अनुभव बनकर आता
कितना मनमोहक लागे शक्तिमय का करुणा
कुदरत ने बनाया फितरत कैसा इसका महिमा
पलभर में लुप्त होजा मन को थाम लेता
दुनियां अन्हरा दिखता याद बड़ी आता
अदभुत ये सन्देश देता मार्ग को सजाता है
दौड़ी चली आता भोर में मुझको जगाता है
की देखो दिन भरका संगीत अब समेट लिया है
सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है
सूरज के बिना ये जीवन निर्जीव जैसा लगता है
भरदेता दुख से जीवन काली काली दिखता है
सूरज के सत्ता से लोग खूब जगमगाते
चल जाता घर जब सूरज बन्द आँख में सो जाते
कांप जाती आत्मा देखकर रात की अंगड़ाई
दुःख ऐसा घेरा आँख पे दिल ने बताई
भीतर का प्रकाश डगमगाने लगा है
देखकर काली रात को आँख भी झुराने लगा
की देखो दिन भरका संगीत अब समेट लिया है
सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है
दिल का कंपन रात को तीखा तीखा बोले
मौत जैसा आहट पाकर कर्मों को निरेखे
जानता है जग ना वो जिसने रात को देखा ना
मरण जैसे धागे को दिल में लपेटा ना
कर्मों का परिधान हमसे बार बार कहती
दिया है ईश्वर ने तुमको जीवन का अनुभूति
कर्मों के अनुभव से तुम एहसास को जगाओ
भावना को महसूस करो कर्म ही दिखाओ
की देखो दिन भरका संगीत अब समेट लिया है
सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है
दिल की ये चंचलता जब जब व्याकुलता में जाती
परिवर्तन की बेला देखकर दिल को बड़ी अकुलाती
कहता है मनमौजी मन ढुलमूल चलता
उतारव चढ़ाव की बेला में डगमग डगमग करता
कितना सुन्दर भुजबंध अंगद कितना सुन्दर हीरा मणि
इंद्र के जैसा दिख रही है कृपा तुम्हारी मात भवानी
हृदय हमारा भयाकुल घबराया है
सोच शक्ति सब खो गई है मन मेरा अकुलाया है
की देखो दिन भरका संगीत अब समेट लिया है
सूरज चला अपने घर को दिल बटोर लिया है
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#Suraj Chala Apne Ghar Ko Dil Bator Liya Hai
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