यह गीत मनुष्य को मोह, आलस्य और अज्ञान की नींद से जगाने का संदेश देता है। कवि बताता है कि सफलता और आत्मिक विकास मेहनत, सजगता और कर्मयोग से प्राप्त होते हैं। गुरु, माँ और आत्मज्ञान मन को सही दिशा देते हैं। फल की चिंता छोड़कर कर्तव्यपूर्वक कर्म करने से भीतर की आत्मिक ज्योति प्रज्वलित होती है और जीवन सार्थक बनता है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो, Nidiya Sustee Mein Ghiree Hai Tum Jigar Sookh Raha Ho, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो
#Nidiya Sustee Mein Ghiree Hai Tum Jigar Sookh Raha Ho
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
जैसे डूबे हो तुम मोह में वैसे जीवन पाए हो
निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो
नासमझी की निंदिया आँखों में छाई है
घेरा है अंधेरी आंधी गिरके मुरझाई है
कैसे समझाऊं तुमको दुनियां की राहे
जहाँ कांटे कष्ट है वही फूल की राते
सुन्दर सफलता खिलता बाग मुस्कुराता
मेहनत करता है जो वहीं आगे बढ़ता
जैसे डूबे हो तुम मोह में वैसे जीवन पाए हो
निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो
काहे को गंवाते हो तुम वक्त को व्यर्थ में
सजगता सावधानी को वो ले जाता है नर्क में
एहसास कर के देखो तुम चेतना जगाओ
ज्ञान संज्ञान का ध्यान हृदय में उतारो
गुरु माँ गुरुवर आत्मा को जगाते है
मन को बैठाकर वश में ज्ञान को लहराते है
सच्चे स्वरूप आत्मज्ञान को तुम पहचानो
मन के भीतर के रूप को अब तो संवारो
जैसे डूबे हो तुम मोह में वैसे जीवन पाए हो
निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो
छिपा है सन्देश तुझमें कर्मयोगी का
निष्ठा महान है भाई कर्तव्य के सीढ़ी का
चिन्ता करते हो तुम परिणामों को पहले
सफलता विफल हो जाती कार्य होने से पहले
छोड़ो निष्कर्ष का चिंता मेहनत करो तुम
नतीजा आयेगा एकदिन कर्मको करों तुम
सिखाता है हमको कर्मयोग कुछ बातें
कर्म तुम करो दिलसे फल की ना बातें
जैसे डूबे हो तुम मोह में वैसे जीवन पाए हो
निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो
हृदय आत्मा के मन में जलती है ज्योति
भीतर के दीपक को देखो सोती ना रोती
आलस ने ढक जो दी ज्योति को वो धूल से
जम गई है परते धूल की दिल से बिखर के
निदिया शारीरिक ना है अज्ञान की जड़ता है
मानव स्वरूप को भूला वास्तविक छोड़ा है
कर्मों के भीतर में प्रकाश खिलते रहते है
ज्ञान के सागर से सब ज्योति खिलते रहते है
जैसे डूबे हो तुम मोह में वैसे जीवन पाए हो
निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो
गीत =} #निदिया सुस्ती में घिरी है तुम जिगर खोए हो
#Nidiya Sustee Mein Ghiree Hai Tum Jigar Sookh Raha Ho
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें