माँ ही कवि की आत्मा और जीवन का आधार हैं क्योंकि यह गीत माँ के मौन, त्याग और दिव्य स्वरूप को दर्शाता है। माँ लज्जा और करुणा से भरी हुई हैं, जो बिना बोले ही सब कुछ सह लेती हैं। कवि माँ को शक्ति, दया और संरक्षण संरक्षिका की मूर्ति मानते हुए उनका निरंतर स्मरण करता है। माँ दुर्गा, काली, लक्ष्मी जैसे अनेक रूपों में जीवन को बल, शांति और प्रकाश देती हैं। अंततः माँ ही कवि की आत्मा और जीवन का आधार हैं। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, मौन खड़ी थी लाज के मारे कुछ भी ना बोल पाती थी, Maun Khadee Thee Laaj Ke Maare Kuchh Bhee Na Bol Patee thee, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Maun Khadee Thee Laaj Ke Maare Kuchh Bhee Na Bol Patee thee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
मौन खड़ी थी लाज के मारे कुछ भी ना बोल पाती थी
पूछा था नाम मैने हिचकिच में सुगबुगाती थी
पूछा था नाम मैने
जब जब मैने नाम पूछा वो चलते चलते रुक जाती
डर के मारे घबराती है आगे पीछे हो जाती
ठिठककर ठिठककर बोले हमसे हैरत में कुछ गाती
लज्जा इतनी गहरी थी कि उत्तर ना दे पाती
सोच रही थी असमंजस में हिचकिच में रह जाती थी
किया कौन सा काम मैने जो यादों में भूल जाती थी
मौन खड़ी थी लाज के मारे कुछ भी ना बोल पाती थी
पूछा था नाम मैने हिचकिच में सुगबुगाती थी
पूछा था नाम मैने
तेरी प्यास बुझाने को मैं दीप जलाकर रखा हूँ
तृष्णा तेरी शान्त हो जाय साम सजा कर रखा हूँ
देखती है तू दुःख क्यों अब मैने दिया जलाया है
प्रज्वलित किया अंगारों से मैं जीवित करके लाया हूँ
वो पल पल यादें आती है अब याद नहीं मिट पाती
जलती है उजाला बनकर भीतर ना छुप पाती
लिख देता हूँ याद तुम्हारी इस कोरे कागज पर
पड़ लेना तू आकर देवी जीवन की बातों पर
मौन खड़ी थी लाज के मारे कुछ भी ना बोल पाती थी
पूछा था नाम मैने हिचकिच में सुगबुगाती थी
पूछा था नाम मैने
सदा सुरक्षित रह अंतर में यादों की बरसात भरी
बरस जाना तू आंखों से नैनो का ननिहाल तेरी
पल पल सुमिरन करता हूँ मैं शक्ति और दया की
बल बुद्धि की चाहत में मैं याद करता हूँ माँ की
भीतर निरंतर रहती तुम खुशी नगर की सागर में
शान्त संतुष्टि देती हो तुम दुष्टों के भवसागर में
जब जब आती पास मेरे तुम मन को हलका कर देती
प्रेम ज्योति के बन्धन से तू पत्थर कर दाती
मौन खड़ी थी लाज के मारे कुछ भी ना बोल पाती थी
पूछा था नाम मैने हिचकिच में सुगबुगाती थी
पूछा था नाम मैने
ज्वाला बनकर रहती है तू दुर्गा बनकर रहती
काली बनकर रहती है तू सविता बनकर रहती
श्रद्धा प्रेम की श्रोत है तू तूही लक्ष्मी गौरी
मन के भीतर राज करती है तूही है वो चंडी
आनंद ज्वाला तू बनकर रहती दुखियों से खुश रहती है
मन मन्दिर को सजग बनती आत्मा में तू रहती है
पूजा तुम्हारी करता हूँ मैं मुझको तूही याद आती
दिया जलाकर लाया आया हूँ मैं तूही मेरी आत्म सही
मौन खड़ी थी लाज के मारे कुछ भी ना बोल पाती थी
पूछा था नाम मैने हिचकिच में सुगबुगाती थी
पूछा था नाम मैने
गीत =} #मौन खड़ी थी लाज के मारे कुछ भी ना बोल पाती थी
#Maun Khadee Thee Laaj Ke Maare Kuchh Bhee Na Bol Patee thee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृ
दय_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Hriday_Meri_Maa❤️🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें