कवि माँ के दिव्य सौंदर्य का वर्णन दिव्य अंगद आभूषण तेज की अद्वितीय सुंदरता का वर्णन करते हुए माँ का रूप चाँद, सितारों, रत्नों और उज्ज्वल प्रकाश जैसा पवित्र और मनमोहकलगाने वाली आभूषणों की वर्णन करते हुए ज्योति अंधकार और भटकाव से निकालकर शांति, ज्ञान और प्रेम का मार्ग दिखाती है। माँ की आभा कभी दीपक की लौ जैसी, कभी भोर की रोशनी जैसी और कभी तलवार पर चमकती दिव्यता जैसी प्रतीत होती है।कवि बार-बार कहता है कि माँ का सौंदर्य, करुणा, तेज और शक्ति अमूल्य और अद्वितीय है, जिसका कोई तुलनात्मक मोल नहीं। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे, Kitana Sundar Tera Angad Badee Man Mohan Laage, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे
#Kitana Sundar Tera Angad Badee Man Mohan Laage
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कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे
सजा है चांद और सितारों से मनभावन लागे
निर्मल दिव्य की रोशनी ने शान्ति को पिरोया
सौंदर्य साधारण करके मईया आँखो को जगाया
भावना को दर्शाया जब प्रेम उड़कर आया
पवित्र उज्ज्वल की रहो ने ब्रम्हांड को मुझे दिखाया
देख लिया तेरी रोशनी मैया आँखो की इस जंगल में
प्यास लगी थी मुझको मैया सागर और समन्दर में
कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे
सजा है चांद और सितारों से मनभावन लागे
रंग बिरंगी रत्नों से माँ अंगद का जो रूप बनाया
तर्क वितर्क के मन में जाकर अंगद का श्रृंगार सजाया
सुन्दर सुन्दर तत्व की भाषा चमक रही चारों ओर
गरिमा के गहनों में आकर दिख रही मुझे भोर
अलग अलग की सुन्दर मोतिया सुन्दर इनके रूप
अनमोल विशेषता कितना मंहगा कितना अच्छा स्वरूप
विधि रत्नों का जोड़ अद्भुत है अद्भुत इसकी आभा
निपुण कुशल कलाकार बनाया भावों का है प्यासा
कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे
सजा है चांद और सितारों से मनभावन लागे
रचना करने वाला मईया कितना बड़ा महान है
निर्माण किया हाथों से अपना कितना सुन्दर हार है
जैसे चमक रही है आभा वैसे चमक रही आभूषण
हल्के हल्के के रोशनी में वो दिख रही है भूषण
दिख रहा है मुझको ऐसे जैसे दीपक जलता है
ज्योति की रोशनी से मैया उमंग हवा में भरता है
रजत लहरी की नृत्य दिखे मुझे चमक ज्ञान की धार है
तलवार की जैसा प्रकाश दिखे मुझे चारों ओर प्यार है
कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे
सजा है चांद और सितारों से मनभावन लागे
तलवारों की धरो पे माँ मुड़ी तुड़ी जो रोशनी है
फैल रही है आभा बनकर मुझको अब वो खींचती है
इतना सुन्दर चमक इसकी है जिसका कोई मोल नहीं
सुन्दर है प्रतिबिंब इसकी माँ धातु जैसी दिखती है
खेल रही तलवारों पे ये चमक दमक में दिखती है
शोभा इसकी मोह लेता मुझे मनमोहक में रहती है
तेज इसकी माँ सुन्दर सुन्दर चमक रहा है तलवारों पे
खेल रहा है रोशनी बनकर आसमान के तारों पर
कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे
सजा है चांद और सितारों से मनभावन लागे
गीत =} #कितना सुंदर तेरा अंगद बड़ी मन मोहन लागे
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