यह गीत माँ के मौन प्रेम और संतान की गहरी पीड़ा को व्यक्त करता है। कवि माँ को चुपचाप खड़ी हुई पत्थर-सी मानता है, पर यह चुप्पी कठोरता नहीं बल्कि त्याग, सहनशीलता और ममता का प्रतीक है। कवि माँ से धन, सुख या वैभव नहीं चाहता कवि माँ से केवल माँ का प्रेम और सान्निध्य चाहता है। इस गीत के माध्यम से कवि आज के समाज की कठोर सच्चाई को दिखाया है, जहाँ स्वार्थ, अहंकार और लोभ ने मानवीय संबंधों को कमजोर कर दिया है और नारी का सम्मान खोता जा रहा है। इस पीड़ादायक संसार से थककर कवि माँ की शरण चाहता है और स्वयं को उसकी दासी मानता है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं, Khadee Hai Chupchap too patthar Ke Jaisa Kaise Tera Pyaar Main Pau, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Khadee Hai Chupchap too patthar Ke Jaisa Kaise Tera Pyaar Main Pau
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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की कैसे पूछूं तुमसे कुछ भी अपना नाम बताऊं
खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं रे कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
अन धन ना मैं मांगू तुमसे ना मांगू अभीराम
सुख दुख ना मैं मांगू तुमसे ना मांगू खुशधाम
झुकी हुई तरु छाया में मैं तुझको रोज पुकारु
चुप रहती हो क्यों मईया अब मुझको यहीं उकारों
की कैसे पूछूं तुमसे कुछ भी अपना नाम बताऊं
खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
दिख रहा है मुझको जो भी वो कैसा मंजर है
दुनियां के बाजार में मईया दिल कैस समन्दर है
नारियों का अभिमान गूंजा है पुरुषों अहंकार गूंजा है
मिट्टी का ये तन है मईया मिट्टी का स्वाभिमान कहा है
घर घर की ये बोली मईया घर घर की ये जोड़ी
आँख में पानी सबके मईया किसने तोड़ी किसने जोड़ी
जोर लगाकर जीवन का लोग देखते बलका रूप
तोड़ देते है दिल से दिल को आँख मारे संजोग
की कैसे पूछूं तुमसे कुछ भी अपना नाम बताऊं
खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
ले चलो तुम मुझको माता इस दुनियां से दूर कहीं
मैं तेरी दाशी हूँ मईया देखो मेरा रूप सही
धुंधले भावों के दुनियां में दिल मेरा अकुलाता है
याद आती है तेरी मईया दिल मेरा टूट जाता है
दुनियां की ये खड़ी आलस ने मुझको खूब रुलाया
सुख गया पानी आँखो से नैन भी मुरझाया
दर दर ठोकर कहती मुझसे तू अपना अब रास्ता देख
मार दूंगा मैं तुझको छल से तू अपना अब रक्षा देख
की कैसे पूछूं तुमसे कुछ भी अपना नाम बताऊं
खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
सुनी पड़ी है जीवन मेरा सुनी पड़ी सब राहें
पैरों का आवाज बोला है दूर तेरी है राहें
कदमों का निशान कहता है आँखो का अरमान कहता है
आए थे अज्ञात धरती पर धरती का स्वाभिमान कहता है
जब जब तुमने याद किया ममता तेरी आई है
दुख सुख के सारे नगमों को नैनो से दिखाई है
देख लिया मैं सारी दुनियां देख लिया मैं लोग
लोभ में जलता जीवन देखा दोष बना निर्दोष
की कैसे पूछूं तुमसे कुछ भी अपना नाम बताऊं
खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
गीत =} #खड़ी है चुपचाप तू पत्थर के जैसा कैसे तेरा प्यार मैं पाऊं
#Khadee Hai Chupchap too patthar Ke Jaisa Kaise Tera Pyaar Main Pau
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