यह गीत के माध्यम से कवि बताना चाहता हैं कि मनुष्य आज धरती, धन, संपत्ति और संसार को अपना समझकर घमंड करता है, पर अंत में उसे सबकुछ छोड़ कर मिट्टी में ही मिल जाना है।जीवन दुख, आशा, निराशा, अकेलेपन और इच्छाओं के बोझ से भरा है। लोग मेरा तेरा में बंधे हैं लेकिन वास्तव में कुछ भी हमारा नहीं है यहां तक कि सांस ये भी हमारा नहीं है इस जीवन में मनुष्य लगातार किसी को तलाशता है, पर सच्चाई यह है कि सबका आधार स्वयं का मन है। आशाएँ टूटती हैं, लोग बदलते हैं, प्रेम कम होता जाता है और मन बेचैनी से भरा रहता है। भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, आज धरती है मानव का कल मानव जमीन का होगा, Aaj Dharti Hai Mana Ka Kal Manav Jamin Ka Hoga, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #आज धरती है मानव का कल मानव जमीन का होगा
#Aaj Dharti Hai Mana Ka Kal Manav Jamin Ka Hoga
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
एकदिन आयेगा जरूर जब परिवर्तन होगा
आज धरती है मानव का कल मानव जमीन का होगा
कहते है लोग यहां सबकुछ मेरा है
कुछ नहीं तेरा मेरा पक्षी का असेरा है
सांस भी ना अपना है हम ना सांसों का
सब कुछ जुदा है यहां कुछ ना अपनो का
भींगते पलको को एक बार पोंछ कर तुम देखो
गिर जायेंगे हाथों से रोक कर तुम देखो
एकदिन आयेगा जरूर जब परिवर्तन होगा
आज धरती है मानवका कल मानव जमीन का होगा
आँखों आँखों में सारी रात गुजर जाती है
मिलता ना कोई अपना जमीन ही सुलाती है
रोकर दिल कहता है जब दुख बढ़ी होता
बोझ है ये पल पल जीवन सुख नाही होता
सीसिक सिसिकर कटती जिन्दगी की राहे
मन बड़ी व्याकुल रहता करता अजीब बातें
चाहतो की चाह में ये घूमता रहता है
लेकर अभिलाषा ये दिल को पूछता रहता है
एकदिन आयेगा जरूर जब परिवर्तन होगा
आज धरती है मानवका कल मानव जमीन का होगा
ढूंढते हो किसको तुम कोई ना यहां पर तेरा
खुद को खुद में तुम ढूंढों देखकर सवेरा
कुछ ना नजर में रखो कुछ ना जिगर में
मन के खबर को तुम रखो बे ख़बर में
टूट जाती पल में आशा टूट जाती दुनियां
जिन्दगी फ़रेब है दिखाओ ना हरमुनिया
निराशो से सीखों तुम आशाओं को पाना
मिलेगी जरूर तुमको हवाओ की खाना
एकदिन आयेगा जरूर जब परिवर्तन होगा
आज धरती है मानव का कल मानव जमीन का होगा
खामोशियों के होठों पे ये दुनियां बोला है
घुट कर ये कंठ अब आँखो से डोला है
देखो जरा इसको तुम हाल ना पूछो
माया के आगोश में अब प्यार ना पूछो
सोया है ये मन अंतर्मन के पिपासा में
उमड़ा जब प्यार तो टूट गया आशा में
पीर है पराई पूज्य पास नहीं आया
व्याकुल किया मन को जब दिल मुर्झाया
एकदिन आयेगा जरूर जब परिवर्तन होगा
आज धरती है मानव का कल मानव जमीन का होगा
गीत =} #आज धरती है मानव का कल मानव जमीन का होगा
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