चन्द पंक्तियां पिता पर, कविता=} #पिता Kvita=} Peeta, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
कविता=} #पिता। Kvita=} Peeta
Writer ✍️ #Halendra Prasad #CISF
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_आशिक़ी_मेरी_माँ ♥️🙏
🙏❤️ #Meri_Ashiki_Meri_Maa❤️🙏
विश्वास नहीं है इस दुनिया में लाल पिता का रोता है
कितना प्यारा रिश्ता है जब बात पिता से होता है
सौ सौ चोट खाके दिलपे जिगर जवानी खोता है
दुनिया का दस्तूर है साहब पिता अकेला होता है
अनुशासन है पिता की आंखे अनुशासन है ज्ञान
विरान पड़े वो जिन्दगी जिसके पिता रहे सुनसान
तकदीर चमकती उनकी है जिनके सर पे हाथ पिताका हो
बल बुद्धि बलवान बने जिनके साथ पिता का हो
मरहम भी बन जाते है जब चोट जिगर पर आती है
आसमान है पिता हमारे छाया बन कुम्हलाते है
विद्वत्ता है उनकी शासन विधि हमे सिखलाते है
मां की चूड़ी मां की कंगन नाम उनकी दर्शाते है
रखकर हाथ देखा है जगने पत्थर भी सिर नवाया है
पढ़कर हृदय देखो एकबार पथ भी खूब बताया है
जल जलकर रोज करते काम धरती जलती तवा समान
कभी नहीं कुम्हलाते है सूर्य पिता है रोशनी सबे दिलाते है
दृण संकल्प से करते काम करते कभी ना वो आराम
सिख हमे वो देते है जब दुर्जन भाग खड़े मुरझाते है
रग रग में बहती है धारा लहू उनकी है नाम हमारा
सिच रही थी मां की ममता पिता होते है नाथ हमारा
पल पल बल भरते है हमे हार नहीं कभी मानते
आसमान का तारा बनाकर रोशनी तन में भरते
पिता हमारे पिता होते है जीवन का रब पिता होते है
देखकर मनवा झूम उठे पिता हमारे गीता होते है
बदल गई है दुनिया सारी बदल गई सारी बाते
अंगुली पकड़ चलाया जिसने निकल गई वो राते
ना मांगे वो धन दौलत ना मांगे वो रुपया
येक झलक का सपना मांगे देखे जब वो अपना
बोल ना पता खोल ना पता राज दिलों में रखता जाता
पिता अयैसा येक दुनिया है जो राग जहन में रचता जाता
कविता=} #पिता। Kvita=} Peeta
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