भक्ति गीत, पुत्र आपन महाज्ञानी, Hindi Geet, Putr Aapan Mahagyani, Writer Halendra Prasad,
गीत =} #पुत्र आपन महाज्ञानी
Geet=} #Putr Aapan Mahagyani
Writer ✍️ #Halendra Prasad #CISF
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हे महाभाग भगवान देव देवता तूही सुख तूही दुख तूही देव देवता
तूही देव देवता
वो बात बता दी हमके भगवान दिल मांग रहा दिल तोरा
तड़प रहा है कान मेरा दिल चाहे थोड़ा थोड़ा
देव वासुदेव जी ने कैसे पुत्रों को प्राप्त किया
घूम घूम कर वन में कृष्णा ने शंका को कैसे नाश किया
भगवन बल बुद्धि के ज्ञानी कर्जा कर्ज देवे विज्ञानी
तनी हमारे के तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
घुमन जंगल जंगल रोज कईन सब उलझन के खोज
मिले सबकर सब अधिकार जीवन सब जिए गुलजार
मिलजुल करे सब उपकार खुशियां झूम उठे परिवार
तनी हमारे के तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
भगवन बल बुद्धि के ज्ञानी कर्जा कर्ज देवे विज्ञानी
तनी हमारे के तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
हे गुरुवर आप ज्ञान के दाता ज्ञान हमे दिखलाओ अब
विधि वेवस्था रीति नीति को आप मुझे समझाओ अब
श्रवण किया कैसे वेदों का कथा समस्त सुनावो आज
मन मंदिर में उठा है उलझन बात हमे बतलाओ अब
मन मंदिर में उठा है उलझन बात हमे बतलाओ अब
बोल पड़े सूती महाबानी बात सुनो ऋषि महाज्ञानि
भोजवंश सत्राजित राजा द्वारकापूरी में राज करता
आनन्दपूर्वक निवास करता वो सूर्य का हरदम ध्यान करता
मित्र बना कर सूरज को वो भक्ति में हरदीन लीन रहता
मित्र बना कर सूरज को वो भक्ति में अब लीन रहता
भक्ति में अब लीन रहता
भगवन बल बुद्धि के ज्ञानी
भगवन बल बुद्धि के ज्ञानी कर्जा कर्ज देवे विज्ञानी
तनी हमारे के तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
जब थोड़े समय के बाद दिवाकर खुश हुए
तब अपनी रूप दिखाए दुनिया का दृष्टिकोण बताकर
प्रेम प्रसन्न में मगन हुए जब स्यमन्तक मणि को हाथ थमाए
स्यमन्तक मणि को पाकर सत्राजित गले के हार बनाए
खुशियों के वन में झूम उठे वो द्वारिका पूरी की राह सजाए
देख मणि की तेज को भ्रम में पागल हुए नगरवासी
सत्राजित को सूर्य समझकर
सुधर्मा ने अपने सभा में कृष्ण के पास पहुंचा दी
बोल पड़े नगर के वासी कृष्णा को एसी बोल
जगतपते सुदर्शन भगवन मिलने सूर्य देव खुद आए
जगतपते सुदर्शन भगवन मिलने सूर्य देव खुद आए
मिलने सूर्य देव खुद आए
हे गुरुवर आप ज्ञान के दाता ज्ञान हमे दिखलाओ अब
विधि वेवस्था रीति नीति को आप मुझे समझाओ अब
आप मुझे समझाओ अब
भगवन बल बुद्धि के ज्ञानी
भगवन बल बुद्धि के ज्ञानी कर्जा कर्ज देवे विज्ञानी
तनी हमारे के तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
तनी हमारे के बता द कईसे ढूंढ के लईलन
पुत्र आपन महाज्ञानी तनी हमारे के
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