प्रेम, लौक लगा कर अन्त: करण में बन्द किया है प्रेम को जिसने, गीत, बन्द किया है प्रेम को जिसने, राइटर हालेंद्र प्रसाद, Pem, Louk Laga Kar Antah Karan Menv Band Kiya Hai Prem Ko jisne, Geet, Band Kiya Hai Prem Ko jisne,
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लौक लगा कर अन्त: करण में बन्द किया है प्रेम को जिसने
सुख दुःख का अनुभव किया जब लौक लगाया तन मन में
संकल्प लिया जब हृदय विभोर
संकल्प लिया जब हृदय विभोर विकल्प नहीं दिख पाया
टूट गया प्रतिज्ञा उसकी जिसने प्रीत लगाया
टूट गया प्रतिज्ञा उसकी जिसने प्रीत लगाया
मनभवों का मान मिटा अब तन भावों का ज्ञान
खामोश हुआ अब ह्रदय भवन का साधन कैसे जुटाए
अवसर नहीं जब दिखता मानव को चुप रहे मुस्काए
व्यक्ति का व्यक्तित्व मिटा है विरह किसे बतलाए
व्यक्ति का व्यक्तित्व मिटा है विरह किसे बतलाए
कैसे करे अब पुष्टि वो विकसित दिल पड़ा मुरझाए
उन्नत उदय सब मिट गया है ह्रदय कहे घबराए
जीवन की प्रवाह गति सब हानिप्रद सहे घबराए
परिवार्त किया है दिशा को अपने आंसू आंख सुखाए
परिवार्त किया है दिशा को अपने आंसू आंख सुखाए
धुन सभी की अपनी अपनी अपनी राग सुनाता
न्याय नगर में मची है खलबल कौन किसे अब भाता
प्रेम के खातिर मर मिटने को कसम रखे रह जाता
बीत गया वो जुग यहां से जो प्रीत रीत की जोगन थी
ज्ञान पाया है अरसो बाद अब हक रोगन की जोड़ी थी
ज्ञान पाया है अरसो बाद अब हक रोगन की जोड़ी थी
विधि रीति नही होता तो रोज रोज कुछ होता जाता
चार कदम जो चल ना पाता इल्जाम जिगर पे थोप जाता
सौदा बना है प्रीत यहां का दौलत पे मुस्काता है
राम नाम को मुख में रखकर तीर विरह चलाता है
राम नाम को मुख में रखकर तीर विरह चलाता है
गीत =} #बन्द किया है प्रेम को जिसने
Geet=} #Band Kiya Hai Prem Ko jisne
Writer ✍️ #Halendra Prasad #CISF
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