आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना, कसक से जागरण तक सरल जीवन का गूढ़ सत्य Kasak Se Jagaran Tak Saral Jeevan Ka Gudh Satya
आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना, कसक से जागरण तक सरल जीवन का गूढ़ सत्य Kasak Se Jagaran Tak Saral Jeevan Ka Gudh Satya
सरल जीवन बाहर से मधुर लगता है किन्तु भीतर अनुभव और आत्मबोध की कसक छिपी रहती है। सच्चा सुख बाहरी दौड़ में नहीं बल्कि छोटी खुशियों प्रेम प्रकृति और माँ की करुणा में है। आधुनिक जीवन में मोह-माया के कारण संवेदना सूख जाती है परन्तु माँ की गोद में जीवन की शांति सुरक्षा और ऊर्जा मिलती है।
सरल जीवन बाहर से मधुर दिखता है पर उसके भीतर संवेदना पीड़ा अनुभव और आत्मबोध की कसक छिपी रहती है। क्योंकि कसक नकारात्मक नहीं बल्कि चेतना के जागरण की पीड़ा है।
संसार सुख के पीछे दौड़ रहा है पर उसी दौड़ में सुख का अनुभव खो देता है प्रेम अनुभव छल सब अपनी-अपनी व्यस्तता में उलझे हैं क्योंकि सुख बाहर नहीं अनुभव की गहराई में है।
शक्ति बुद्धि आनंद तीनों एक ही चेतना के रूप हैं और रंगों से भरा आकाश जीवन की विविधता और विभिन्न पहलों को व्यक्त करता है क्योंकि जो प्रकृति को समझता है वही जीवन को समझता है।
कितना भी बाहरी सम्पन्नता क्यों ना हो पर अंदर सूखापन ही है छोटी खुशियाँ ही जीवन की असली पूँजी हैं क्योंकि बड़ा पाने की चाह में हम छोटा जीना भूल जाते है आधुनिक जीवन में बहुत कुछ है पर कुछ भी नहीं है!
दुनिया जगत से बढ़िया जीवन का जगत है क्योंकि दुनिया में दिखावा भाग दौड़ मोह माया है पर जीवन में जीवन का रस अनुभूति और सत्य है!
नदियों का सूखना केवल जल का सूखना नहीं है मानवीय संवेदना का सूखना भी है क्योंकि सच दिखता है पर सत्य यह है कि सच देखा नहीं जाता।
इस जीवन में जैसे माँ सुरक्षा करुणा ऊर्जा ईश्वर है उसी प्रकार पिता पालनहार है जो हमारा मार्गदर्शन करता है पालनहारा जो हमारी रक्षा और पालन-पोषण करता है और हमें अनुशासनिक बनाता है पर जीवन की सारी थकान माँ की गोद में पिघल जाती है और आँसू भी शुद्धि बन जाती हैं माँ के बिना जीवन जड़ है।
भोलेपन से अनुभव तक की यात्रा पराया संसार की तरह है पर भीतर में माँ की कृपा और करुणा का स्नेह फैला हुआ है क्योंकि मानसिक शारीरिक आध्यात्मिक दार्शनिक दर्शन जब सब छूटता है तब माँ मिलती है।
इस जीवनकाल में कसक दुख नहीं बल्कि जागरण का संकेत है जहां माँ प्रकृति और आत्मा का संगम है वहीं गुरु-वाणी साधना है माँ की कृपा हमारे जीवन में औषधि बनकर बहती है।
सरल जीवन बाहर से मधुर लगता है पर भीतर अनुभवों की कसक छिपी रहती है। संसार सुख की व्यस्तता में उलझा है, जबकि सच्चा आनंद छोटी खुशियों प्रेम प्रकृति और आत्मबोध में है। आधुनिक जीवन में मोह-माया के कारण संवेदना सूख जाती है। और माँ की गोद में उसका प्रेम और कृपा ही शांति सुरक्षा और जीवन की सच्ची ऊर्जा मिलती है।
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