संकट के समय उपदेश नहीं बल्कि सहारा और संवेदना देना ही सच्ची मानवता है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति संकट और दुःख में होता है तब लोग उसकी मदद करने के बजाय उसे उपदेश देने लगते हैं। दुःख से घिरा हुआ मनुष्य मानसिक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है। उस समय उसका मन इतना व्यथित होता है कि वह सही-गलत या ज्ञान की बातों को समझ नहीं पाता। ऐसे समय में उसे सबसे पहले सहारा संवेदना और अपनापन चाहिए। जैसे जो व्यक्ति पानी में डूब रहा हो उसे तैरने का सिद्धांत समझाने से कोई लाभ नहीं होता बल्कि पहले उसे बचाना जरूरी होता है। उसी प्रकार जीवन में भी संकट में पड़े व्यक्ति को पहले सहयोग और सहानुभूति देनी चाहिए। जब व्यक्ति दुःख से बाहर निकल जाता है और उसका मन शांत हो जाता है तब वह शिक्षा और सीख को आसानी से ग्रहण कर सकता है। इसलिए मानवता का सच्चा धर्म यही है कि हम दुखी लोगों की सहायता करें, उन्हें सहारा दें और प्रेम व संवेदना से उनका मन मजबूत बनाएं। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, देते संकट में सहारा ना उपदेश देते है, #Dete Sankat Men Sahara Naa Updesh Dete Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Dete Sankat Men Sahara Naa Updesh Dete Hai
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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भगवन देख कैसी दुनियां तू बनाया लोग संदेश देते है
देते संकट में सहारा ना उपदेश देते है
घेर लेता जब दुख की आहट तोड़ देता है दिल को
कौन सीखे उन राहों को जो दीक्षा देता है दिल को
भय के मारे कांप रहा जो सामने पतन खड़ी है
गुजर रहा है दौर दुखों का दिल का हाल बुरा है
हालत हाल बुरी है भगवन दिल पे छुरिया अड़ी पड़ी
काट दे गर्दन समय का मौका तलवार निकालकर खड़ी रही
भगवन देख कैसी दुनियां तू बनाया लोग संदेश देते है
देते संकट में सहारा ना उपदेश देते है
घेर लेता जब दुःख मानव को अच्छा ना कुछ लगता
रहती ना सीखने की हालत दिल में आग है जलता
सही गलत का बोध ना होता आत्मा दुखी होती है
ज्ञान कैसे लें पायेगा वो दिल भी दुखी रहता है
कौन समझाए किसको किसको दुख ना दुनिया में
सब दुखी है चाहत से कौन बजा हरमुनिया में
जो डूब रहा है उसको सिद्धान्त काम ना आता
घबराकर वो डूब जाएगा तैरना उसे ना आता
भगवन देख कैसी दुनियां तू बनाया लोग संदेश देते है
देते संकट में सहारा ना उपदेश देते है
दौर ऐसा लाया भगवन अजीब अजीब दृश्य है
कोई ना किनारा करता सबके सब सदृष्य है
हृदय कहता मेरा आत्मा के संवाद में
पहले किनारा करो डूबते को बिंदास में
दुख से पीड़ित है जो उसे संवेदना से जगाओ
रक्षा सुरक्षा करो दिल से दिल मिलाओ
अपनापन का उसके जीवन को बचाएगा
खुशियां दिलो में भरकर आत्मा जगाएगा
भगवन देख कैसी दुनियां तू बनाया लोग संदेश देते है
देते संकट में सहारा ना उपदेश देते है
दुख की मुक्ति से दुखी सुखी हो जाएगा
अपने को संभाल लेगा खुशी छा जाएगा
गहरी गहरी सांसों से वो जीवन को सजाएगा
सिख को ग्रहण कर शिक्षा अपनाएगा
क्षमता बढ़ती जाएगी दुख मिटता जाएगा
खुशियों की बाहर में सुखी हों जाएगा
संकट में उपदेश ना सहयोग दिया जाएं जब
संवेदना के भाव से दर्द मिट जय तब
भगवन देख कैसी दुनियां तू बनाया लोग संदेश देते है
देते संकट में सहारा ना उपदेश देते है
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