यह गीत मनुष्य की भक्ति और उसकी इच्छाओं के बीच के अंतर को दर्शाता है। कवि बताता है कि मनुष्य भगवान के द्वार पर भी अपनी अनेक कामनाएँ, लालसाएँ और अपेक्षाएँ लेकर जाता है। वह भक्ति के नाम पर वस्तुएँ, सफलता और सांसारिक सुख मांगता है, परंतु जब उसकी इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं तो वह निराश और हताश हो जाता है। गीत यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति अपेक्षा रहित समर्पण है। ईश्वर को पाने के लिए मन की इच्छाओं, स्वार्थ, लोभ और लालच का त्याग करना आवश्यक है। भगवान दौलत या चाहतों से नहीं, बल्कि निष्काम प्रेम और आत्म-समर्पण से मिलते हैं।आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, आता दर पे तेरे लेकर वो कामनाओं का सब घर , #Aata Dar Pe Tere Lekar Vo kamnavo Ka Sab Ghar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Aata Dar Pe Tere Lekar Vo kamnavo Ka Sab Ghar
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की भगवन कैसी तेरी लीला तू बनाया जो मानव
आता दर पे तेरे लेकर वो कामनाओं का सब घर
सारी दुनियां आती है उद्देश्य लेकर आती है
भक्ति की सच्चाई में कुछ और मांग कर जाती है
आत्मिक शान्ति मांगती ना वो मांगती है सब चाहत
पाने की चाहत में वस्तु मांगती तुझसे राहत
मन की इच्छाएं मांगें सब मन की मुरादें
आशा लेकर आते है उम्मीद की सब आदत
की भगवन कैसी तेरी लीला तू बनाया जो मानव
आता दर पे तेरे लेकर वो कामनाओं का सब घर
देखा जब मैं उन भक्तों को अपनी दिल की आहट से
निराश खड़े थे दिल से वो तो अपने दिल की आहट से
हताश मनोबल शिथिल होकर खड़े रहे
आँख में आंसू भरे हुए थे दिल उनका अब बिखर पड़े
लौट जाते है वो जो जिनकी कमाना पूरी ना होता
अभिलाषा की चाहत में तमन्ना जिसकी अधूरी रहता
लालसा आरजू और मुरादें क्या क्या लेकर आए थे
ख्वाहिश की चाहत में वो तो तेरे पास आए थे
की भगवन कैसी तेरी लीला तू बनाया जो मानव
आता दर पे तेरे लेकर वो कामनाओं का सब घर
उत्साह श्रद्धा विश्वास जगाकर तेरे पास आए जो
क्षणिक हुआ उमंग हौसला बिना उल्लास के जाए घर
मिट गई खुशियां तीव्र भावना की हिम्मत हार गया जब
शक्ति हीन हुई है उसकी रुचियां टूट गई है अब
जितने कारण देखता है वो सत्य देख ना पाता
भटक गया जो स्वार्थ के राह पर निस्वार्थ देख ना पाता
लालच लोभ प्रसिद्धि वैभव भक्ति का कोई अंग नहीं
आत्म त्याग की धारा में बहता तेरी भाव सही
की भगवन कैसी तेरी लीला तू बनाया जो मानव
आता दर पे तेरे लेकर वो कामनाओं का सब घर
दिल मेरा कहता अब तुझसे दिल लगाकर
चाहतों से मिलता ना तू दौलत से बुलाकर
तेरे द्वार पे आना है तो पाने को सब खोना है
केवल चाहतों की इच्छा मिट्टी में मिलना है
चाहतों की आदत दिल निराश कर देती है
मिलता ना ईश्वर प्रभु उदास कर देती है
सच्ची भक्ति कहती है अपेक्षा ना समर्पण है
ईश्वर को पाने खातिर स्वयं को खो देना है
की भगवन कैसी तेरी लीला तू बनाया जो मानव
आता दर पे तेरे लेकर वो कामनाओं का सब घर
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