आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी, #Mere Nidra Svapn Vichaar Ke Shaasan Mein Lin Rahata Karm Gurujee , Writer ✍️ #Halendra Prasad,
#Mere Nidra Svapn Vichaar Ke Shaasan Mein Lin Rahata Karm Gurujee
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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की कोई होता गा क्यों ना प्रिय आत्मा का आदर्श गुरुजी
मेरे निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी
प्यारा प्यारा प्रेमी सखा है प्यारा मित्र है प्रीतम
मान सम्मान के स्नेहपात्र है जीवन का ये करतब
कौशल कला हुनर करामात शिल्प गुण कारीगरी है
विशेष निपुण्डता साहस का है कर्म जीवन आज्ञाकारी है
प्रवीण दक्षता कुशल विशेषता योग्यता का रूप बताता
कर्मों के जीवन में कर्म अपना ही स्वरूप दिखाता
की कोई होता गा क्यों ना प्रिय आत्मा का आदर्श गुरुजी
मेरे निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी
मेरे अवचेतन के चिन्तन में व्यवहारिक जीवन का कर्म आता
संचलित करता है मुझको सब उसका प्रभाव कहता
फिर भी दूर हो जाता है कुछ भी ना कह पाता
सब अधिकारों के बावजूद अकेला रहता
प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा नहीं है औरों के ये साथ कही
गहरा गहरा उलझन रचता कथनों के विरुद्ध वहीं
सबके भीतर रहता जो संचालित करता है सबको
अपने आप अकेला रहता साथ ना रहता किसको
की कोई होता गा क्यों ना प्रिय आत्मा का आदर्श गुरुजी
मेरे निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी
निर्भर ना हो पाता अब ये बाहर के सहारो पे
अस्तित्व में पूर्ण रहता है ये तो तनहा के बहारों में
तर्क वितर्क करता है ये तो भीतर विरोधी बातों पर
मेल खाता ना जो भी तथ्य अड़ता उस विचारों पर
आता समझ में ना जो उसपे तर्क करता है
कैसी पहेली जीवन का जो दरबदर करता है
भ्रम की भावना उलझन को दर्शाती जब
लेके आती उलझन मुश्किल रहस्य को छुपाती तब
की कोई होता गा क्यों ना प्रिय आत्मा का आदर्श गुरुजी
मेरे निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी
हर प्राणी के अंदर रहता भीतर में विद्यमान रहता
आत्मा या परमात्मा जो है सब जीवों के साथ रहता
बाहर से कुछ आता ना है बाहर की कोई वस्तु ना
अस्तित्व मूलका स्वांस चेतना सबके भीतर रहता क्या
अनुभव क्षमता सब देता है सब उसी से मिलते है
विरोधाभास में लगता है वो गहरी भीतर जलते है
पकड़ ना पाती तन की अंगे आंख से जो दिखता है
समझ जाता है बुद्धि से जो सांस से जो दिखता है
की कोई होता गा क्यों ना प्रिय आत्मा का आदर्श गुरुजी
मेरे निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी
बाहर में जो खोजते है हम नाम रूप में दिखता वो
लौट आता जहां वाणी मन में आंख बंद में दिखता वो
जन्म-मरण का समय-स्थान सुख-दुःख में बँधा नहीं
तन बदलता मन बदलता वो तत्व बदलता सादा ना
एक सा रहता दिव्य शुद्धता चेतना बदलता बाधा ना
अनुभूति मनोवृति है ये ध्यान ज्ञान साधना
दुःख ना है एकांत की राहें अद्वैत का संकेत है
भीतर वही है बाहर वही है सब ईश्वर का खेल है
की कोई होता गा क्यों ना प्रिय आत्मा का आदर्श गुरुजी
मेरे निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी
गीत =} #मेरे निद्रा स्वप्न विचार के शासन में लिन रहता कर्म गुरुजी
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Writer ✍️ #Halendra Prasad
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