यह गीत जीवन की क्षणभंगुरता, आत्मबोध और आध्यात्मिक जागरण को व्यक्त करता है। कवि मानता है कि सांसारिक रिश्तों और मोह का टूटना कोई हानि नहीं, बल्कि आत्मा के निखरने का मार्ग है। जीवन क्षणिक है, इसलिए बाहरी सहारों से अधिक भीतर के विश्वास, धैर्य और आत्मिक प्रकाश का महत्व है।कवि मौन, भाव और दृष्टि को सच्चे संवाद का माध्यम मानता है। प्रकाश और अंधकार, सुख और दुख, दिन और रात ये सभी जीवन के आवश्यक पक्ष हैं, जिनका संतुलन ही जीवन का सत्य है। नदी के प्रवाह की तरह जीवन निरंतर चलता रहता है और आत्मा का दीपक कठिन समय में भी प्रकाश देता है।त्याग, समर्पण और ईश्वर-विश्वास जीवन को दिशा देते हैं। ईश्वर का स्मरण मन में शक्ति, आशा और ऊर्जा भरता है। अंततः रचना यह संदेश देती है कि जब बाहरी जुड़ाव टूटते हैं, तब मनुष्य भीतर से मजबूत होकर आत्मिक रूप से निखर उठता है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,टूटा सबका जुड़ाव अब निखर आया है, #Tuta Sabka Judav Ab Nikhar Aaya, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
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की कैसा मन में ये भाव अब उखड़ आया है
टूटा सबका जुड़ाव अब निखर आया है
क्षणभर का ये जीवन केवल एक पलका अब साथी है
देख लिया मेरे दिल ने दिल को दिल की रोग बराती है
संकेत करता है मुझको क्षणभर क्षणभर बहुत जरूरी है
साथ नहीं है कोई भी फिर भी जीवन जरूरी है
सहज नहीं नजरों का अर्थ फिर भी अर्थ जरूरी है
मौन संवाद से बोल रहा है ये जीवन का अर्थ जरूरी
रात दिन का संगम गुरुवर जहां प्रकाश अंधेरा मिलता
मिलते है दोनों जब गोधूलि के बेला मिलता
मिल जाता प्रकाश अंधेरा संध्या के खेला में
धुंधला शाम की संध्या आई सांझ के बेला में
की कैसा मन में ये भाव अब उखड़ आया है
टूटा सबका जुड़ाव अब निखर आया है
काले काले नैनो से आँखो की गहरी राग बोली
करुणा की रहस्य छुपाकर नैनो की अनुराग बोली
जीवन की धारा है नदियां हरदम बहती रहती है
जैसे बहती नदियां वैसे जीवन चलती है
आसरा ना आशा है इसको रुकना इसने सिखा ना
भावपूर्ण की वचन बोली है भावनाओं से पूछा ना
भरी हुई है भावनाओं से दुख सुख से प्रभावित है
छू लेती ये हृदय का दिल दुख दिल प्रभावित है
चमक दमक दिन जब पश्चिम दिशा में अस्त होगा
दिल दीपक की रोशनी नदी बीच प्रवाह करेगा
जब दिन उजाला डूब जाएगा रात अंधेरी आयेगी
प्रेम आस्था की ख्याल नदी बीच जाएगी
आत्मा का प्रकाश जीवन रूप नदी में बह जाएगा
दीप सिखा हमने परंपरा साथ निभाएगा
की कैसा मन में ये भाव अब उखड़ आया है
टूटा सबका जुड़ाव अब निखर आया है
त्याग समर्पण आता है जब जीवन को भी बदल देता
बूझ ना पाता दीपक नदी धारा की जैसी प्रकाश देता
समय नियति कहता है ईश्वर का भगवन भरोसा ना छोड़ेगी
दिल में रहता ईश्वर उससे मुंह नाही मुड़ेगी
याद स्मरण की आवाज गूंजी है आत्मा के रग राग में
याद आई भगवन की बातें जीवन के बरसात में
आभा ओज तेज कांति उजाला जब नाम हमारे आती
किरण सौन्दर्य के चमक दमक से हमे जगाती
परिणाम उत्पन्न ये करती है बल बुद्धि पर आश धरे
गंगा जमुना की लहरों से चमक दमक का प्यार मिले
शोभा छवि सब दिखती है रंग विरंग लगती
आत्मा में प्रवेश करती है जीवन रंग बदलती है
की कैसा मन में ये भाव अब उखड़ आया है
टूटा सबका जुड़ाव अब निखर आया है
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