राम-नाम से आरंभ हुआ दिन जीवन को शांति, प्रेम और आनंद से भर देता है। सुबह की उजली किरणें नई ऊर्जा, सकारात्मकता और सृजन का संदेश देती हैं। ईश्वर-स्मरण से जुड़ी दिनचर्या मन को संतोष देती है और जीवन को अर्थपूर्ण व आनंदमय बनाती है। आध्यात्मिक दर्शनिक शान्ति से भरा अनमोल वचना राम-नाम से रंजित प्रातः और आनंदमय जीवन Raam-Naam Se Ranjeet Praatah Aur Aanandamay Jeevan
आध्यात्मिक दर्शनिक शान्ति से भरा अनमोल वचना राम-नाम से रंजित प्रातः और आनंदमय जीवन Raam-Naam Se Ranjeet Praatah Aur Aanandamay Jeevan
जब सुबह की शुरुआत राम-नाम से होती है तो दिन भर कर्म और प्रेम और शाम को विश्राम व संतोष यह संकेत करता है कि जब जीवन ईश्वर-स्मरण से जुड़ता है, तो पूरा दिन आनंदमय बन जाता है। जिसे जीवन की आदर्श दिनचर्या कहते है!
सुबह की रोशनी को सुख और खुशी की वर्षा कहा जाता है।जैसे सूर्य हँसता है वैसे ही मन में प्रकाश फैलता हैहृदय में आत्मिक आनंद उत्पन्न होता है और हर क्षण नया और पवित्र जीवन लगता है जिसे सुबह का आत्मिक जागरण का प्रतीक कहा जाता है।
इस जीवन में हर सुबह नया जीवन लिखने का अवसर मिलता है। क्योंकि सुबह की पहली किरण को नवीनता और सृजन का स्रोत बताया गया है जो अंधकार को मिटता है नए विचार को जन्म देता हैं और जीवन में नई ऊर्जा की बरसात करता है!
सुबह केवल समय नहीं बल्कि भावनात्मक जागृति है। क्योंकि सुबह की रोशनी हमे प्रेम स्नेह देता है और संबंधों को जोड़ता है जैसे आत्मा में प्रेम की शक्ति जागती है रिश्तों में मधुरता लाती है और मन के आनंद भरती है वैसे ही सुबह भावनाओं को जागृत करती है!
सुबह दर्शाता है कि प्रकृति और मानव दोनों एक ही ऊर्जा से जुड़ते हैं क्योंकि सुबह का प्रकाश तन-मन के रोम-रोम में भर जाता है। दुख दूर होते हैं पृथ्वी जागती हुई प्रतीत होती है और पवन सूर्य मन सब आनंद से भर जाते हैं!
जब सुबह ईश्वर-स्मरण से दिन शुरू हो प्रेम और सकारात्मकता से जीवन जिएँ शाम को संतोष और शांति से विश्राम करें।तो जीवन स्वयं उजाले सुख और आनंद की वर्षा बन जाता है क्योंकि न कोई शिकायत रहती न कोई शिकवा!
जब जीवन जीने की आध्यात्मिक कला को पहचान लिया जाता है तो राम-नाम माँ का हृदय प्रकृति और प्रेम सब एक हो जाते हैं और इस सृष्टि में जीने की एक अद्भुत जीवन मिलता है!
सुबह की पवित्रता, राम-नाम के स्मरण और जीवन में आने वाले आत्मिक आनंद का सुंदर चित्रण करता है। जब दिन की शुरुआत ईश्वर-स्मरण से होती है और शाम शांति व विश्राम में ढलती है, तो पूरा जीवन सुख, प्रेम और प्रसन्नता से भर जाता है। सुबह की रोशनी नवीनता, सकारात्मक सोच और सृजन का संदेश लाती है।
जब अंधकार और निराशा को दूर कर मन तन और आत्मा में ऊर्जा भर जाता है तो प्रेम स्नेह और ममता की भावनाएँ जागृत होकर संबंधों को मधुर बनाती हैं। यही हमे सिखाता है कि प्रकृति प्रेम और अध्यात्म के साथ जुड़कर जीवन को आनंदमय बनाया जा सकता है। राम-नाम से जुड़ी दिनचर्या मनुष्य को शांति संतोष और सच्चे सुख की अनुभूति कराती है।
जब हृदय में अपार आनंद की अनुभूति होती है। उस क्षण को ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रातःकाल की उजली ज्योति सुबह की रोशनी हमारे जीवन में सुख और प्रसन्नता की वर्षा कर रही हो क्योंकि जब हम अपने प्रिय आत्मा को हँसाने के लिए उसके मुख का स्नेहपूर्ण ध्यान करते है तो गहरे प्रेम और आत्मिक आनंद की अभिव्यक्ति करता है।
प्रेम स्नेह और आत्मीय संबंध को दर्शाता है। जब प्रिय आत्मा के साथ बिताया गया प्रेमपूर्ण क्षण हमारे लिए सुबह की रोशनी की तरह जीवन को आनंद और उल्लास से भर देता है जिसे।प्रात-ज्योति नवीनता पवित्रता और आशा का प्रतीक कहा जाता है
शरीर के रोम-रोम में हर्ष की अनुभूति भर जाती है। जब ग्रीष्म ऋतु की सुहावनी पवन तन मन के अंग-अंग को स्पर्श कर आनंद से भर रही होती हैं । ग्रीष्म पवन जीवन्तता ऊष्मा और उल्लास का प्रतीक है, जबकि अंग-अंग में हर्ष भरना प्रेम से उत्पन्न आंतरिक प्रसन्नता को दर्शाता है।
प्रकृति के सुखद अनुभवों का अनुभव आनंद प्रदान करता है क्योंकि एक चेहरे की अहमियत हर नजर मे अलग अलग होता है और उसी चेहरे पे कोई खफा तो कोई फिदा होता है!
एक ही चेहरे का महत्व हर व्यक्ति की नज़र में अलग-अलग होता है, क्योंकि हर इंसान की सोच, अनुभव और भावनाएँ अलग होती हैं। कारण यह है कि एक चेहरा किसी को नाराज़ कर देता है, तो किसी को उसी चेहरे से गहरा प्रेम हो जाता है।
किसी व्यक्ति का मूल्य या प्रभाव उसके गुणों से अधिक देखने वाले की मानसिकता और भावनात्मक जुड़ाव पर निर्भर करता है।।क्योंकि दुनिया में कोई भी व्यक्ति सबको एक-सा प्रिय या अप्रिय नहीं हो सकता, क्योंकि हर नज़र अपने साथ अलग दृष्टिकोण लेकर आती है।
जब को व्यक्ति ईश्वर के प्रति गहरी आस्था और विश्वास प्रकट करता है। और संसार के जिन घटनाओं को नसीब भाग्य का खेल मानता है, वे वास्तव में ईश्वर की ही लीला हैं। सब कुछ उसकी इच्छा और व्यवस्था से होता है।
ईश्वर से धन-दौलत क्यों मांगा जाए, क्योंकि हमने सुना है कि ईश्वर गरीबों और जरूरतमंदों का मित्र होता है। यह संकेत देता है कि ईश्वर भौतिक संपत्ति से अधिक सच्चे हृदय, विनम्रता और विश्वास को महत्व देता है।
मनुष्य को धन की लालसा के बजाय ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए। ईश्वर निष्काम भाव से भक्ति करने वालों और गरीब-दुखियों का सहायक होता है। सच्चा सुख दौलत में नहीं, बल्कि आस्था और संतोष में है।
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