यह गीत गुरु की महिमा, आत्मचेतना और स्वाभिमान की भावना को व्यक्त करती है। कवि बताते हैं कि सच्चा प्रकाश बाहरी दीपक से नहीं, बल्कि गुरु के ज्ञान से जागृत आत्मा की उजास से मिलता है। गुरु मनुष्य के भीतर आशा, विश्वास और आत्मसम्मान जगाते हैं, जिससे वह अपनी क्षमताओं को पहचानकर गर्व और गरिमा के साथ जीवन जीता है।गीत में मन की क्रियाशीलता, भावनाओं की गहराई और विचार प्रक्रिया का वर्णन है। मन दुख-सुख, क्रोध और डर जैसी भावनाओं का अनुभव करता है, परंतु गुरु का मार्गदर्शन उसे संतुलन और विवेक प्रदान करता है। आत्ममंथन और गहन विचार से मन सही-गलत का निर्णय लेना सीखता है। गुरु के ज्ञान से ही आत्मबल, स्वाभिमान और सही निर्णय की शक्ति प्राप्त होती है, और वही जीवन को सच्चा अर्थ और प्रकाश प्रदान करता है।आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी #Milta Aasha Aur Vishvaas Svaabhimaan Gurujee, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी
#Milta Aasha Aur Vishvaas Svaabhimaan Gurujee
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दीपक दीप नहीं है आत्मा की उजास गुरुजी
मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी
अपने आप पर गर्व करता इज्जत की वो भावना से
मूल्यवान बनाता मानव मनको क्षमताओं की गढ़ना से
पल पल की ठहराव ये गुरुवर गहन अनुभूति देता जब
कोमल कोमल मीठे मीठे मन में गौरव भरता तब
रुक जाना शारीरिक ना है ना तन के सम्बंधित
ठहराव लेता जब मन तो अर्थ देता निर्णयित
दीपक दीप नहीं है आत्मा की उजास गुरुजी
मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी
मन चेतना निष्क्रिय ना होता क्रियाशील फुर्तीला है
ऊर्जावान जीवन्त उत्साही मेहनती कार्य को करता है
चुस्त दुरुस्त चौक्कना रहता फुर्ती मन की तेजी से
सजीव उत्साह में भरकर गतिमान रहता है परिश्रम से
जोशीला जज्बाती है भावना को महसूस करे
तीव्र गति से काम करता है भावुकता से भावी है
विषय सोच की गरिमा इसमें मर्यादा की शान है
महिमा इज्ज़त पद्य प्रतिष्ठा जीवन की स्वाभिमान है
दीपक दीप नहीं है आत्मा की उजास गुरुजी
मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी
दुख सुख क्रोध खुशी और डर को सोचने लगता जब
महसूस करता है अपने को मैं क्यों ऐसा करता अब
विचार करता है भावों पर अपने को खूब दौड़ता
ढूंढने लगता कारण को पत्थर को पानी बनाता
याद करता जब घटना को अनुभव याद आते है
विचार करता है यादों पर चेतना होश बताता है
विस्तार से करता जॉच परीक्षण स्पष्ट अर्थ को ढूंढे
समझ जाता उन चीजों जब गहन व्याख्या जूझे
दीपक दीप नहीं है आत्मा की उजास गुरुजी
मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी
कार्य करता जब मन तो सही गलत का शोध करता
चुनने लगता सही विकल्प को आगे का रोग दूर करता
निर्णय पर विचार करता है पल पल पानी पिता
नैनो को वोझाल करके आत्मा से पूछता
मन चेतना की मूल विशेषता सोच समझकर काम करे
करे विवेचन घट कर्मों का गहन समीक्षा तार करे
मन भावना और यादों को धागे रूप पिरोता
निर्णय के माध्यम से मनवा अनुभव को अर्थ पेठाता
दीपक दीप नहीं है आत्मा की उजास गुरुजी
मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी
गीत=} #मिलता आशा और विश्वास स्वाभिमान गुरुजी
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