यह गीत एक गहरे आंतरिक शून्य, पीड़ा और एकांत की अभिव्यक्ति है। कवि का हृदय माँ से जुड़ा है और माँ के अभाव या दूरी से जीवन सूना, निर्जन और वीरान प्रतीत होता है। मन में न कोई हलचल है, न स्नेह का सहारा सिर्फ़ मौन, संदेह और उदासी व्याप्त है। कवि अपने भीतर के भावों को टटोलते हुए बताता है कि आशा, विश्वास और आत्मीयता अब केवल प्रतीक बनते जा रहे हैं। जीवन में अंधकार, निराशा और अज्ञानता फैली हुई है, फिर भी कवि नम्रता, विनम्रता, शालीनता और बिना अहंकार के सबको सम्मान देने की भावना को नहीं छोड़ता। हृदय को ही जीवन का आधार मानते हुए वह मानवीय संवेदनाओं की बात करता है। अंततः यह गीत प्रकाश की कामना है भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर। कवि चाहता है कि उसके जीवन के सूनेपन में कोई उजाला आए, कोई सहारा मिले, ताकि मानव हृदय फिर से सुन सके, महसूस कर सके और जीवन में आशा का संचार हो। आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति गीत, खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया, #Khaalee Hai Dil Ka Bhavan Man Nirjan Ho Gaya, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत=} #खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया
#Khaalee Hai Dil Ka Bhavan Man Nirjan Ho Gaya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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मेरे जीवन का आवाज सुना सुना हो गया
खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया
कोई ना आवाज है कोई नाही हलचल
उजड़ा आसियाना है नाही कोई दलदल
कोई नहीं रहता है जहां मेरा दिल है
निर्जन सुना है मईया वीराना जगह
भीतर की अभ्यंतर में अंदरूनी भाव बोले
जाहिर करता सामने में जिंदगी के रोड़े
मेरे जीवन का आवाज सुना सुना हो गया
खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया
साफ साफ कहता है सामने आ जाता है
अखियों के सामने प्रकट हो दिखाता है
मिलता सहारा ना कोई मिलता स्नेह है
ठहरे वो कैसे जहां सन्देह ही सन्देह ही
आशा विश्वास सब प्रतीक बनता जाता है
आत्मीयता के भाव में निशान छोड़ते जाता है
हृदय के आधार पे हृदय चलता है
हृदय की गति हृदय से निखरता है
मेरे जीवन का आवाज सुना सुना हो गया
खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया
अंधकार का अपार दुख जीवन में फैला है
निराशा अज्ञानता हो सबको दिखाता है
नम्रता विनम्रता से आदर सबको देता
बिना अहंकार के सम्मान सबको देता
शालीनता व्यवहार इसकी बहुते विनम्र है
आंख भरे भरे है दिल भी नरम है
सद्भावना से सबको सम्मान देता
पिंजरा के तोता जैसा सबको निरखा
मेरे जीवन का आवाज सुना सुना हो गया
खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया
देदो कुछ प्रकाश मेरे जीवन के सूनेपन को
चारों ओर अंधेरा छाया जीवन के उजालों को
गहरी पीड़ा को ये भूल नहीं पाता
मानव हृदय की बातें अब सुन नहीं पाता
सहारे की कमाना से आशा करता है
प्रकट करता रूप अपनी आशा करता है
बाहरी प्रकाश को देखे अंतर को निरेखा
अन्तर को अनुभव करता अन्तर को देखे
मेरे जीवन का आवाज सुना सुना हो गया
खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया
गीत=} #खाली है दिल का भवन मन निर्जन हो गया
#Khaalee Hai Dil Ka Bhavan Man Nirjan Ho Gaya
Writer ✍️ #Halendra Prasad
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