यह गीत माँ की महिमा का गुणगान करती है। कवि बताता है कि माँ केवल संतान को जन्म ही नहीं देती, बल्कि उसे जीवन का वास्तविक उपहार देती है जैसे संस्कार, ज्ञान, बल, बुद्धि, साहस और चेतना। माँ ही पहली गुरु है, जो जीवन जीने की कला सिखाती है। गीत में माँ को करुणा, ममता और त्याग की मूर्ति बताया गया है। वह संतान के दुःख दूर करती है, निराशा में सहारा देती है और अपने प्रेम से जीवन में प्रकाश भरती है। कवि माँ को दिव्य शक्ति के रूप में भी देखता है जैसे दुर्गा, काली, लक्ष्मी और भवानी जो सृष्टि की पालनकर्ता, रक्षक और संहारक हैं। माँ ही जीवन की आधारशक्ति है वही प्रेम, शक्ति, ज्ञान और मुक्ति का स्रोत है। आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर, #Keval Janma Na Mandi Hai Ki Jivan Ka Uper Guruvar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,
गीत =} #केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर
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✍️ #Halendra Prasad
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की मईया परम शक्ति पालक और संहार के गुरुवर
केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर
बल बुद्धि चेतना देती ज्ञान मुक्ति स्रोत को
जीवन की जौहर देती देती शौर्य बलिदान को
जब जब थकता है तन दौड़ी चली आती है
मन की बेचैनी को माँ आगी में जरातीं है
फूंक देती प्राण को माँ अपनी संजीवनी से
दिल मुस्कुराए जैसे दिल की औषधि से
की मईया परम शक्ति पालक और संहार के गुरुवर
केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर
जीवनदायिनी है माता मृत्युमारक अमृत
मौत से बचाने वाली औषधि आर्वेदिक
गगन अम्बर में रहती सबको ध्यान से देखती है
पानी नीर वर्षा के माई करुणा से दुख धोती है
अग्नि अनल पावक ज्वाला बनकर आती जब
घर जग सृष्टि को माँ दिल से जगमगाती तब
देती है जीवन माता मौत को मार देती
आँचल ढाक सुलाती है माँ सब सुख देती
की मईया परम शक्ति पालक और संहार के गुरुवर
केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर
माता का प्रेम कृपा जीवन का संजीवनी है
जीना सिखाती है माँ जो भी टूट जाता है
सूरज बनकर आती माँ चांद बनकर आती है
लोरिया सुनाकर माता पीठ थप थापती है
अखियों में रहती है माँ दिलवो में रहती
अंगना दुआरवा माई आशारा में रहती
अमरता संजीवनी है माँ पुष्प सुमन का
मीठी मीठी बोलियों की सखियां है माँ सागर का
की मईया परम शक्ति पालक और संहार के गुरुवर
केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर
जब जब निराशा आता माता याद आती है
दुनियां की चोट से माँ सृष्टि को बचाती है
आत्मा पुकारे माँ को शान्ति सुख मांगे
करुणा दया की भीख माई से जागे
सारी दुःख हर लेती प्रेम भरी देती है
अपने स्नेह से माता पीड़ा हर लेती है
ममता की सागर है माँ दया की समन्दर
दिल को बनाया उसने दिलवे के अन्दर
की मईया परम शक्ति पालक और संहार के गुरुवर
केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर
दुर्गा काली लक्ष्मी माता वेद माँ भवानी है
जन्मदात्री माता मेरी प्रेम की निशानी है
बल बुद्धि शक्ति देती रक्षा मेरी करती
अधर्म की विनाशक करती शासन मुझमें भरती
ज्ञान चेतना की जननी सुख की स्वरूप माँ
बैठी है पहाड़ों में माँ लेकर शिव की रूप माँ
पूरी सृष्टि की माता आदि जननी है
समृद्धि ऐश्वर्य माता वैभव की रानी है
की मईया परम शक्ति पालक और संहार के गुरुवर
केवल जन्म ना देती है देती जीवन का उपहार गुरुवर
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