यह गीत जीवन के संघर्ष, निराशा और मानसिक अंधकार से घिरे एक संवेदनशील मन की करुण पुकार है। कवि स्वयं को कठिन परिस्थितियों, भ्रम और अकेलेपन के बीच खड़ा पाता है, जहाँ चारों ओर निराशा, अंधकार और कुहासा छाया हुआ है। ऐसे समय में वह अपनी माँ को स्मरण करता है, जो उसके लिए आशा, शांति, ज्ञान और प्रकाश का स्रोत है। रचना में रात, अंधेरा, ठंड, तन्हाई और प्रकृति के दृश्य जीवन की जटिलताओं और रहस्यों के प्रतीक हैं। कवि इन रहस्यों को समझने का प्रयास करता है, परंतु असमंजस में पड़ जाता है। अंततः वह माँ से मार्गदर्शन की याचना करता है कि वह उसके जीवन से अज्ञान और निराशा को दूर कर प्रकाश भर दे। यह गीत भक्ति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक अनुभूति का भावपूर्ण चित्रण है, जो यह संदेश देता है कि कठिन समय में माँ गुरु ईश्वर का स्मरण मनुष्य को संबल और दिशा प्रदान करता है। आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत,, घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है, #Ghira Hai Aandhiyon Ke Andhere Mein Badi Kuhaasa Vhhaaya Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 

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       भर दो जीवन में प्रकाश बड़ी निराशा छाया है 

     घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है

        दिखता ना कुछ भी माता कर्म के जिम्मेवारी में

           घूमता हूँ रात भर मै ठंड के बदमाशी में

         सुनसान नदी के जैसा दिखता है आकाश 

             देता संकेत मुझको रात की आवाम 

         शान्ति सुख संयम देता तन्हाई की वो यादें

          अकेलेपन की जीवन में लाता है तेरी यादें 

         भर दो जीवन में प्रकाश बड़ी निराशा छाया है 

       घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है


                कुदरत की गोद में मैं बैठा अकेला

            समझ में ना आता मुझको रात की अंधेरा

                 कितनी रहस्यों से भरी है ये राते 

               गहरा है गूढ़ इसकी मुस्कान भरी बातें

               छिपा है अंधेरों बीच प्रकट नाही होता

             कैसे मैं जानू इसको अनजान में है दिखता

         अनोखा अजीब है इसकी आश्चर्य की कहानी

                  वैभव से गुंजा है रात की रवानी

          भर दो जीवन में प्रकाश बड़ी निराशा छाया है 

       घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है


        धुंधला धुंधला दिखता है मुझे साफ नहीं दिखता

          कैसे समझूं मैं इसको अस्पष्ट में ना दिखता 

              अद्भुत है अंधेरा ये हैरान कर देता है 

              पहेली के जैसा ये परेशान कर देता है

            कहा नहीं जाता इसकी कला की कर्म को

              तारे टिम टीमाते है आसमा में रंग को

              अजबे मुस्काती है ये अनूठी ये राते 

           अनुपम अलौकिक इसकी मनमोहक बातें

         भर दो जीवन में प्रकाश बड़ी निराशा छाया है 

      घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है


             धरती की चारों ओर फैली जो हवाएं 

             आसपास को घेरी है ठंड की अदाएं

             मदमस्त मिजाज में बहे जब ये पूर्वा 

          चारों ओर से घेर आई शीतलता की दूर्वा 

         अनोखी विचित्र इसकी अदा की कहानी 

            सबसे अलग दिखती रात की रवानी 

              पहले कभी ना मैं देखा था इसको 

            कितनी बेजोड़ है ना सोचा था इसको

       भर दो जीवन में प्रकाश बड़ी निराशा छाया है 

     घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है


          इस लोक है ना ये अलौकिक लगती है

       बहुत बढ़िया भव्य इसका शानदार दिखती है

          विश्वास करूं तो मैं बड़ा मुश्किल होता

           अनोखी आश्चर्य में मैं डावाडोल होता

          सूचित करती मुझको ये अपनी अदा से

           प्रकट होती संकेत में दिल की जहां में

                तूही बतादे माँ मैं कैसे समझूं 

               ज्ञान का पिटारा ना मैं कैसे परखू 

       भर दो जीवन में प्रकाश बड़ी निराशा छाया है 

     घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है

गीत=} #घिरा है आंधियों के अंधेरा में बड़ी कुहासा छाया है 

#Ghira Hai Aandhiyon Ke Andhere Mein Badi Kuhaasa Vhhaaya Hai 

        Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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