यह गीत मानव जीवन के गहरे दुःख, मानसिक पीड़ा और असहायता को व्यक्त करता है। कवि अपने कष्टों से इतना व्यथित है कि वह अपने आँसू तक बेच देने की कल्पना करता है, जिससे उसे सुख और शांति मिल सके। किंतु उसे यह बोध होता है कि अपनों से मिला दर्द कोई वस्तु नहीं है जिसे किसी को सौंपा या बेचा जा सके। कवि इस गीत में यह दर्शाता है कि जीवन की कुछ समस्याएँ साधनों, बल और बुद्धि से भी हल नहीं होतीं। जब मनुष्य पूरी तरह टूट जाता है और सभी उपाय निष्फल हो जाते हैं, तब वह ईश्वर की शरण में जाता है। प्रार्थना, आस्था और विश्वास उसके लिए शक्ति का स्रोत बन जाते हैं।अंततः कवि इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि संसार में सच्चा सहारा दुर्लभ है और सच्चे मन में ही ईश्वर का वास होता है। ईश्वर पर विश्वास ही जीवन को अर्थ, शांति और दिशा प्रदान करता है। आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर, #Bechunga Ankhiyo Kaa Aansu Mai Udhar Guruvar, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

 

 गीत=} #बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर 

#Bechunga Ankhiyo Kaa Aansu Mai Udhar Guruvar 

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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       की सोच सोच कर गया जब मैं बाजार गुरुवर 

          बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर

       दुःख पीड़ा अनुभव बेचकर सुखी हो जाऊंगा 

         दर्द से छुटकारा पाकर हर्षित हो जाऊंगा 

         दिल मेरा चाहता है तकलीफों का विदाई 

         मोल भाव करूंगा नाही चीजों की दुखदाई

           बोला खरीदारों ने मुझे जो समझकर 

         अपनो का तोफा बेचा जाता ना भुलाकर 

                दर्द ही दावा है दर्द ही दुआ है 

          अपनों से मिला जो वहीं सब अपना है

      की सोच सोच कर गया जब मैं बाजार गुरुवर 

         बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर


              कैसे भुलाऊं उसको कैसे छुपाऊ 

                यादों में आता है कैसे जलाऊ 

           छोड़ता ना मुझको वो छुटता ना मुझसे

        रहता है हरदम आसपास देखता है मुझको

             जीवन के गहरे घाव मिला जो मुझे

             मिला था उपहार में किसे हम अब दे 

      किसी को ना सौंपा जाता किसी से ना पूछा जाता

        सौदा करु मैं किसका किसी को ना दिया जाता

            मन के भीतर में रहता घर जो बनाया है

           बोझ बनकर रहता है दरद से जलाया है 

        की सोच सोच कर गया जब मैं बाजार गुरुवर 

          बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर


      जीवन का समस्या जब साधनों से हल ना होता

         करता है ठीक दावा दिल का दर्द ना जाता

           मन भाग्य हालत सब छोड़ कर पराए 

               वश में ना रहता कुछ भी भुलाए 

            बल बुद्धि शक्ति साधन हीन हो गया है

             चल नहीं पाता सब खिन्न हो गया है

           दिल का विश्वास सब ईश्वर पर आया 

            विनती निवेदन भाव शक्ति बन छाया

     देती है शांति दुआ असंभव को संभव बनाकर 

           खोल देती मार्ग दिल से दर्द मिटा कर

      की सोच सोच कर गया जब मैं बाजार गुरुवर 

          बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर


        करुणामय दुनियां में अब सच्चे मन ना मिले

          महिमा बताऊं किसका कौन किसे पूछे

        खोजता है जीवन सच्चा साथी दरबदर में

         मार्ग को दिखाए कौन दिल के सफर में

          आस्था विश्वास सब प्रार्थना बन गया 

           ईश्वर का भरोसा ही जीवन बन गया 

      भगवन का स्वरूप साथ संवाद की इच्छा है

         सान्निध्य में रहना अब दिल समीक्षा है

          सुना हूँ मैं ईश्वर सच्चे दिल में रहते है

          हृदय में बास करते दिल से कहते है 

    की सोच सोच कर गया जब मैं बाजार गुरुवर 

        बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर

गीत=} #बेचूंगा अखियों का आंसू मैं उधार गुरुवर 

#Bechunga Ankhiyo Kaa Aansu Mai Udhar Guruvar 

           Writer ✍️ #Halendra Prasad 

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