यह गीत माँ को गंगा जमुना जैसी निरंतर बहने वाली ज्ञान, प्रेम और जीवन-शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है। कवि माँ को केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि पालन करने वाली, मार्गदर्शक और चेतना जगाने वाली शक्ति मानता है। माँ का ज्ञान गूढ़ और अदृश्य है, जो बिना प्रकट हुए भी जीवन को दिशा देता है। वह मन की उलझनों को समझती है, स्वप्नों में आकर आशा देती है और संकट में सहारा बनती है। गीत में माँ को आशा की ज्योति, जीवन की रोटी और भवसागर पार कराने वाली नैया कहा गया है। कवि प्रकृति के सौंदर्य, कला और सामंजस्य के माध्यम से यह बताता है कि जीवन सहयोग, संतुलन और प्रवाह से चलता है। जैसे जल निरंतर बहता है, वैसे ही जीवन और माँ का प्रेम भी अविराम है।अंततः कविता माँ के उस रहस्यमय स्वरूप को नमन करती है, जो सब कुछ अपने भीतर छुपाकर भी सम्पूर्ण सृष्टि को पोषित करता है।आध्यात्मिक दार्शनिक भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, बहती गंगा जमुना जैसे तेरी ज्ञान तुम कहा रहती हो, #Bahatee Ganga Jamuna Jaise Teree Gyaan Tum Kaha Rahatee Ho, Writer ✍️ #Halendra Prasad
Writer ✍️ #Halendra Prasad
BLOGGER=} 🙏♥️ #मेरी_हृदय_मेरी_माँ ♥️🙏
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की अपने भीतर में छुपाके राज तुम कहा जाती हो
बहती गंगा जमुना जैसे तेरी ज्ञान तुम कहा रहती हो
अदभुत निर्मल जल है तेरी तू दुनियां की पालन हारी
प्रकट ना होता गूढ़ तेरी माँ तू है पोषण हारी
मेरे मन में गूंज रहा जो उसको समझ जाती है तू
सपनों में आकरके माता पानी दे जाती है तू
रंग बिरंगी लहरे तेरी चमके तारों जैसा
प्रकट होता जो रोशनी माता आंखों छा जाता
सुलझ ना पाता मन की बातें मुश्किल बढ़ती जाती
उलझन की उलझन में माता उलझन बढ़ती जाती
की अपने भीतर में छुपाके राज तुम कहा जाती हो
बहती गंगा जमुना जैसे तेरी ज्ञान तुम कहा रहती हो
दीप आशा की ज्योति तू माँ तू जीवन की ज्योति हो
पार करती है नैया सबकी तू जीवन की रोटी हो
कुदरत सा जीवन है जग में कुदरत सी सब बाते
मालूम ना होता राज इसकी माँ उलझ जाती तेरी यादें
सुनसान रास्ता है जीवन सुनसान ये यादें
उठ रहा उत्कंठा मन में दिखती ना वो बाते
संकोच लज्जा सब भाव प्रकट है इच्छा है अनमोल
पूछताछ से खोजे मनवा दिल देता है जोर
आतुरता उत्सुकता माता यूंही बढ़ती जाती
उत्कंठा सवाल करे माँ उत्तर ढूंढ ना पाती
की अपने भीतर में छुपाके राज तुम कहा जाती हो
बहती गंगा जमुना जैसे तेरी ज्ञान तुम कहा रहती हो
सुन्दर बोध की दुनियां में माँ सौन्दर्य कला सब दिखता है
अध्ययन जब मैं करता हूँ तो कुदरत सुंदर दिखता है
महसूस होता मेरे अंतर मन में सुंदरता की शोभा
खिल जाता फूलों के जैसा आत्मा की सुषमा
कलाकृति की कैसा सौंदर्य खिला है सुंदर
समझ में उलझा दिल मेरा ये सुन्दर कितना उलझन
रूप ज्ञान की अद्भुत दुनियां अदभुत इसके रूप
कैसे बनाया कुदरत सुन्दर सुख स्वरूप
सुन्दरता की कला प्रेमी है सुंदरता धनवान
दिखता आत्मा को सुन्दर ये जग का परिधान
की अपने भीतर में छुपाके राज तुम कहा जाती हो
बहती गंगा जमुना जैसे तेरी ज्ञान तुम कहा रहती हो
राज भेद गूढ़ गुप्त पहेली समझ ना आता राज मुझे
आसानी से समझ ना पाऊं कैसा है ये साज तेरे
सुन्दर सुन्दर मेल मिलान है सुन्दर इसकी प्रकृति
तालमेल की सुन्दर व्यस्था सुन्दर इसकी शक्ति
मिलकर काम करता है ये तो सहयोगी और साथी है
एक दूसरे से मिलकर रहता सम्बन्ध इसका अनुरागी है
सामंजस्य से भरा हुआ है एक दूसरे से जुड़ा हुआ है
तालमेल सद्भाव मिलकर दिल के अन्दर घुला हुआ है
पानी जैसे बहता है जीवन वैसे चलता है
कुदरती की करिश्मा है जीवन रंग बदलता है
की अपने भीतर में छुपाके राज तुम कहा जाती हो
बहती गंगा जमुना जैसे तेरी ज्ञान तुम कहा रहती हो
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#Bahatee Ganga Jamuna Jaise Teree Gyaan Tum Kaha Rahatee Ho
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