माँ केवल जन्मदात्री नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रकृति और चेतना की जीवंत धारा है। वह गंगा-जमुना की तरह निरंतर बहती जीवन-शक्ति है, जो बिना दिखे सबको पोषित और मार्गदर्शित करती है। माँ प्रश्न भी है और उत्तर भी जिज्ञासा जगाने वाली और उलझनों का समाधान देने वाली। वह गुरु-तत्व, आशा की ज्योति और भवसागर पार कराने वाली नैया है। प्रकृति के समान माँ का प्रेम, त्याग और ज्ञान अविराम प्रवाह में जीवन को संतुलन, सहयोग और दिशा देता है।आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना माँ प्रश्न भी उत्तर भी Adhytmik Darshanik Anmol Rachana Maa Prashn Bhi Uttar Bhi Halendra Prasad, आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल रचना माँ प्रश्न भी उत्तर भी Adhytmik Darshanik Anmol Rachana Maa Prashn Bhi Uttar Bhi Halendra Prasad,

 

माँ केवल जन्मदात्री नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रकृति और चेतना की जीवंत धारा है। वह गंगा-जमुना की तरह निरंतर बहती जीवन-शक्ति है, जो बिना दिखे सबको पोषित और मार्गदर्शित करती है। माँ प्रश्न भी है और उत्तर भी जिज्ञासा जगाने वाली और उलझनों का समाधान देने वाली। वह गुरु-तत्व, आशा की ज्योति और भवसागर पार कराने वाली नैया है। प्रकृति के समान माँ का प्रेम, त्याग और ज्ञान अविराम प्रवाह में जीवन को संतुलन, सहयोग और दिशा देता है।

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माँ केवल जन्मदात्री ही नहीं बल्कि ज्ञान, प्रकृति, चेतना और जीवन-शक्ति के रूप है क्योंकि माँ का ज्ञान गंगा जमुना की तरह निरंतर बहने वाला निर्मल जीवनदायी है जो सबको पोषित करता है!

 माँ जीवन की वो मूल शक्ति है निर्मल जल की तरह पालनहारी है पोषण देने वाली है जैसे जल बिना दिखे जीवन चलाता है, वैसे ही माँ का त्याग और ज्ञान अदृश्य रहकर भी सब कुछ सम्भालती है। माँ अपने गूढ़ रहस्यों को प्रकट नहीं करती, पर हर संकट में मार्ग दिखा देती है।

 माँ अंतर्ज्ञानी है बिना बोले मन की बात समझने वाली रानी हैस्वप्न में आकर प्यास बुझाने वाली जिंदगानी है माँ केवल माँ नहीं, बल्कि ईश्वरीय चेतना का भी संकेत है जो मनुष्य को भीतर से दिशा देती है। इसीलिए माँ को अंतर्ज्ञान और स्वप्न-दर्शिनी कहते है!

जब मन सत्य को जानना चाहता है तब प्रश्न गढ़ता हैं और माँ गुरु-तत्व बनकर उस खोज को जन्म देती है जहां से उलझन प्रश्न और जिज्ञासा आकर मन की उलझनें बढ़ती हैं क्योंकि माँ प्रश्न भी हैं उत्तर भी है जिज्ञासा उत्सुकता उत्कंठा भी है और यहीं अवस्था स्वीकृती देती है!

माँ आशा का दीप है जीवन की रोटी है भवसागर पार कराने वाली नैया है माँ आध्यात्मिक भी है और व्यावहारिक भी माँ भक्ति भी है और भूख भी मिटाती है।

कुदरत कितनी सुंदर लगती है कुदरत की अध्ययन करने पर कुदरत सौंदर्य का दर्शन होता है क्योंकि जब आत्मा फूल की तरह खिलती है तो कला, रूप, रंग, सौंदर्य दिखता है।

जहाँ माँ प्रकृति है वहां प्रकृति ईश्वर की कला है पर यह सुंदरता भी एक पहेली है क्योंकि जितनी सुंदर है उतनी ही जटिल भी है।

यहाँ सब कुछ आपस में जुड़ा है सब कुछ तालमेल, सहयोग, सद्भाव से चलता है जैसे पानी बहता है, वैसे जीवन चलता है क्योंकि यही सामंजस्य और सहयोग का सिद्धांत और जीवन का दर्शन देती है !

हमारा जीवन स्थिर नहीं बल्कि प्रवाह है माँ केवल शरीर नहीं बल्कि चेतना है माँ ज्ञान है प्रकृति है गुरु है और माँ रहस्य गूढ़ है और वही जीवन का आधार है क्योंकि जैसे गंगा-जमुना बिना रुके बहती हैं वैसे ही माँ का प्रेम और ज्ञान निरंतर बहता रहता है।

 माँ गंगा जमुना जैसी निरंतर बहने वाली ज्ञान प्रेम और।जीवन-शक्ति के रूप में प्रस्तुत है माँ केवल जन्म देने वाली नहीं बल्कि पालन करने वाली, मार्गदर्शक और चेतना जगाने वाली शक्ति मानता है। 

माँ का ज्ञान गूढ़ और अदृश्य है जो बिना प्रकट हुए भी जीवन को दिशा देता है। वह मन की उलझनों को समझती है स्वप्नों में आकर आशा देती है और संकट में सहारा बनती है। क्योंकि माँ को आशा की ज्योति जीवन की रोटी और भवसागर पार कराने वाली नैया कहा गया है। 

 प्रकृति के सौंदर्य कला और सामंजस्य यह बताता है कि जीवन सहयोग संतुलन और प्रवाह से चलता है। जैसे जल निरंतर बहता है वैसे ही जीवन और माँ का प्रेम भी अविराम है माँ के उस रहस्यमय स्वरूप को नमन है जो सब कुछ अपने भीतर छुपाकर भी सम्पूर्ण सृष्टि को पोषित करती है।

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