आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल बातें समर्पण की राह में ईश्वर ही मेरा सच्चा सहारा Adhytmik Darshanik Anmol Bate Samarpan Kee Raah Mein Eeshvar Hee Mera Sachcha Sahaara

 

यह रचना जीवन के अनुभवों से उपजे आत्मबोध और ईश्वर के प्रति समर्पण को दर्शाती है। लेखक मानता है कि सुख-दुःख, वैभव और सीख सब ईश्वर की कृपा हैं। कठिन समय में जब संसार साथ छोड़ देता है, तब ईश्वर ही सच्चा सहारा बनता है। भौतिक ठाठ क्षणिक हैं, जबकि माँ का स्नेह, आत्मसम्मान और ईश्वर-स्मरण ही जीवन की वास्तविक संपत्ति है। यह रचना ईश्वर से प्रेम, मार्गदर्शन और सही राह पर बने रहने की प्रार्थना है। 🌿
आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल बातें समर्पण की राह में ईश्वर ही मेरा सच्चा सहारा Adhytmik Darshanik Anmol Bate Samarpan Kee Raah Mein Eeshvar Hee Mera Sachcha Sahaara

 जब मनुष्य स्वयं को भगवान के चरणों में नतमस्तक कर यह स्वीकार करता है कि जीवन की हर उपलब्धि हर अनुभव सुख हो या दुःख ईश्वर की कृपा से ही संभव हुआ है। तो वह पूर्ण समर्पण कृतज्ञता आत्मबोध और ईश्वर से मार्गदर्शन की याचना का प्रतीक बन जाता है।

ईश्वर के चरणों में शीश झुकाना यानी अपने मैं को छोड़कर ईश्वर की शरण में जाना। मनुष्य भौतिक वस्तुएँ नहीं बल्कि ईश्वरीय प्रेम चाहता है और केवल साथ प्रेम और आशीर्वाद माँग चाहता है। जिसे अहंकार के त्याग का प्रतीक कहते है।

जब मनुष्य यह स्वीकार करता है कि ईश्वर ने उसे सबकुछ वैभव, सुख, सुविधाएँ और आत्मसम्मान दिया जीवन को जीने की समझ दी तो वह खुद को भगवान का आभारी और उपासक मानता है। और कहता है कि हे प्रभु आपने सब कुछ दिया अब बस इतना साथ दे दीजिए कि मैं जीवन की राह भटक न जाऊँ।

जब मनुष्य ईश्वर भक्त स्वयं को अज्ञानी मानता है और ज्ञान, विवेक और सही मार्ग की कामना करता है तो वह ऐसा समाज चाहता है जहाँ कोई अपमानित न हो सबको सम्मान मिले

अभिमान न नहीं जिसे आत्मिक प्रार्थना कहते है।क्योंकि यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक प्रार्थना है एक श्रेष्ठ, संवेदनशील और नैतिक संसार की कामना है।

 जीवन का यथार्थ दर्शन यह है कि अमीरी-गरीबी दोनों देखीछल कपट उपेक्षा का अनुभव मिला लोग स्वार्थ में दूसरों को जलील करते हैं तब भक्त ईश्वर से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु, इस स्वार्थी संसार में तू ही मेरा सच्चा सहारा है। मुझे आत्मसम्मान के साथ जीना सिखा !

कठिन समय में कोई साथ नहीं देता बल्कि अनुभव ही जीवन का असली शिक्षक बनता है जब सब साथ छोड़ देते हैं तब केवल भगवान साथ होते हैं सच्ची लड़ाई जीवन की होती है, और उस युद्ध में ईश्वर ही सबसे बड़ा संबल है। क्योंकि मनुष्य विपत्तियों में खुद को मैं अकेला पाता है जिसे अनुभवसिद्ध गुण कहते है।

भौतिक ठाठ-बाट अस्थायी हैं अहंकार पतन की जड़ है जीवन की सच्ची शक्ति ईश्वर, अनुभव और आत्मबोध में है कठिन समय में भगवान का स्मरण ही सबसे बड़ा सहारा है जीवन की आत्मकथा हर उस व्यक्ति के मन को छूती है जिसने सब कुछ पाकर भी भीतर से कुछ खोया है और अब ईश्वर से सिर्फ़ प्रेम, मार्ग और आशीर्वाद चाहता है।

 भक्त ईश्वर के प्रति कृतज्ञता, विनम्रता और आत्मसम्मान की भावना प्रकट करता है। कवि कहता है कि हे भगवान, आपने मुझे जीवन में सभी सुख-सुविधाएँ और वैभव ठाठ दिए हैं, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। अब वह केवल इतना चाहता है कि आपका थोड़ा-सा साथ और जीवन भर बना रहे।

 अपना सिर केवल ईश्वर के चरणों में झुकाया है और वह यही चाहता है कि उसे किसी और के सामने विवश होकर या अपमानित होकर सिर न झुकाना पड़े।

भक्त के लिए ईश्वर का साथ सबसे बड़ा सहारा है। वह चाहता है कि ईश्वर की कृपा से उसका आत्मसम्मान बना रहे और वह सदा सही मार्ग पर चलता रहे।

फकीरी में भी अमीरी का मैने ठाठबाट देखा है माँ हजारों गेमों को दिल ने आबाद रखकर बादशाह बन सहेजा माँ खत्म हो गया महफिलों में बैठने का शौक अब जब हमने विपत्तियों में ख़ुद को अकेला पाया मां 

 फकीरी के जीवन में भी हमने अमीरी जैसा ठाठ-बाट देखा है, क्योंकि माँ का स्नेह और संस्कार ही हमारे लिए सबसे बड़ी संपत्ति हैं। भले ही जीवन में धन न हो, पर माँ के कारण जीवन कभी खाली नहीं लगा माँ के प्रति हमने अपने जीवन-अनुभव संघर्ष और भावनात्मक परिपक्वता को जाना है!

हमने अपने दिल में हज़ारों ग़मों को बसाकर, उन्हें सहते हुए भी खुद को बादशाह की तरह संभाले रखा है दुखों के बीच भी आत्मसम्मान और धैर्य बनाए रखा जो हमें माँ से मिला।

 अब हमें महफ़िलों और भीड़ में बैठने का शौक नहीं रहा क्योंकि विपत्तियों के समय हमने स्वयं को अकेला पाया। इसी अनुभव ने मुझे सिखा दिया कि सच्चे संबंध वही होते हैं जो कठिन समय में साथ दें और माँ का साथ रहा और सबसे सच्चा रहा ।

माँ का स्नेह इंसान को अभाव में भी समृद्ध बनाता है। जीवन की कठिनाइयाँ मनुष्य को परखती हैं और उसे दिखा देती हैं कि भीड़ नहीं, बल्कि सच्चा साथ ही सबसे बड़ा सहारा होता है।


टिप्पणियाँ

मेरी आशिक़ी मेरी माँ

बसंत पंचमी मातादी भक्ती गीत, Basant Panchami Matadi Bhakti Geet, सरवस्वती महालक्ष्मी बुद्धि के बुद्धादात्री, Saravasvatee Mahaalakshmee Bbuddhi Ke Buddhaadaatree, Writer ✍️ Halendra Prasad,

हिन्दी रोमांटिक गीत, मिटाले दाग को दिल से, Hindi Romantic Geet, Meetale Daag Ko Dil Se,

भक्ति गीत, सफल जीवन सौभाग्य का सुख है, Bhakti Geet, Safal Jiwan Soubhagya Ka Sukh Hai,

राम भजन गीत, भजों मन सीता सीता राम, Ram Bhajan Bhajo Geet, Man Sita Sita Ram,

देश भक्ति गीत, याद करो तुम उन वीरों को, Desh Bhakti Geet, Yad Karo Tum Un Veero Ko,

वेदमाता भक्ति गीत, प्राण वायु, Vedmata Bhakti Geet, Pran Vayu,

हिन्दी गीत, आंख में पानी आई, Hindi Geet, Aankh Me Pani Aai,

देश भक्ति गीत, भारत माता वर दे, DESH BHAKTI GEET BHARAT MATA VAR DE,

भोजपुरी रोमांटिक गीत, तनका अपने हाथ खिलादी राजाजी, Bhojpuri Romantic Geet, Tanka Apne Hath Khiladi RajaJi,

माता भक्ती गीत, सृष्टिकर्ता ब्रम्हाको तू मार्ग शक्ति बतलाती है, Mata Bhkti Geet, Srshtikarta Bramhaako Too Maarg Shakti Batalaatee Hai,